आईआईटी दिल्ली की वैज्ञानिकों ने विकसित की आंख के फंगल इन्फेक्शन के उपचार की नई विधि

भारत की आबादी का एक बड़ा हिस्सा अब भी कृषि कार्यों में संलग्न है। ये कृषि कार्य न केवल अधिक परिश्रम की मांग करते हैं, बल्कि इन कार्यों के दौरान कई किस्म के जोखिम भी होते हैं। इन्हीं जोखिमों में से एक आंख में होने वाला फफूंद का संक्रमण (फंगल इन्फेक्शन) भी है। इस कारण खेतिहर लोगों को अन्य तकलीफों के अलावा कई बार एक आंख की रोशनी भी गंवानी पड़ती है।

भारत के वैज्ञानिकों ने बना डाली 5जी क्षमता वाली स्वदेशी स्मार्टफोन चिप

डिजिटल युग में स्मार्टफोन के बिना रोजमर्रा के जीवन की कल्पना कठिन है। आज हमारे दैनिक जीवन का अहम हिस्सा बन चुके स्मार्टफोन का महत्वपूर्ण भाग उसमें लगने वाली चिप को माना जाता है। तकनीकी शब्दावली में इसे एसओसी यानी सिस्टम ऑन चिप कहा जाता है। किसी भी स्मार्टफोन की क्षमताएं काफी कुछ इसी एसओसी पर निर्भर करती हैं। एसओसी बाजार में मुख्य रूप से अमेरिकी, दक्षिण कोरियाई और ताइवानी कंपनियों का ही दबदबा है। लेकिन, हाल में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) हैदराबाद के शोधार्थियों ने वाईसिग के साथ मिलकर एक नैरोबैंड इंटरनेट ऑफ थिंग्स-सिस्टम ऑन चिप (एनबी-आईओटी-एसओसी) ‘कोआला’ विकसित किया है। उल्लेखनीय बात यह है कि यह स्वदेशी एसओसी 5जी क्षमताओं से लैस है। देश में जल्द ही इन सेवाओं की शुरुआत हो सकती है, जिसके लिए तैयारियां चल भी रही हैं।

मुलेठी से बन सकती है कोरोना की दवा

केंद्र सरकार के जैव प्रौद्योगिकी विभाग (डीबीटी) के अंतर्गत कार्यरत राष्ट्रीय मस्तिष्क अनुसंधान केंद्र (एनबीआरसी) के वैज्ञानिकों की एक टीम ने कोविड-19 की दवा विकसित करने के संभावित स्रोत के रूप में मुलेठी की पहचान की है, जो आमतौर पर इस्तेमाल की जाने वाली एक जड़ी-बूटी है। वैज्ञानिकों ने पाया है कि इस जड़ी-बूटी की जड़ में पाया जाने वाला ग्लाइसीराइज़िन नामक एक सक्रिय तत्व रोग की गंभीरता को कम करता है और वायरल की प्रतिकृति बनने की प्रक्रिया को अवरुद्ध करने में भी सक्षम है।
यह खोज महत्वपूर्ण है क्योंकि अब भी कोविड -19 संक्रमण के इलाज के लिए कोई विशिष्ट दवा नहीं है।

ग्लेशियरों के पिघलने से प्रभावित हो सकते हैं सौ करोड़ लोग

समूचे विश्व के लिए आज जलवायु परिवर्तन एक चुनौती है। जलवायु परिवर्तन के कारण ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं। इस कारण नदियों-सागरों के जलस्तर में वृद्धि हो रही है, जो भविष्य में विकराल रूप ले सकती है। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) इंदौर द्वारा किए गए अध्ययन में यह बात सामने आई है कि जलवायु परिवर्तन के कारण हिमालय पर्वत श्रृंखलाओं में बर्फ और ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं। इस कारण हिमालय से निकलने वाली सिंधु, गंगा और ब्रह्मपुत्र जैसी नदियों के जलस्तर में वृद्धि देखने को मिली है।

बच्चों को ऐसे बचाएं कोरोना की तीसरी लहर से

देश में कोरोना की दूसरी लहर कमोबेश खत्म होने के बाद अब लोगों को तीसरी लहर की आशंका सताने लगी है। इसकी वजह है कि वैज्ञानिकों ने आगाह किया है कि देश में कोरोना की तीसरी लहर अवश्य आएगी, जिसका सबसे ज्यादा प्रभाव बच्चों पर पड़ सकता है। ऐसे में बच्चों की सुरक्षा और इलाज के लिए स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय (डीजीएचएस) ने विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं।

ऊर्जा संरक्षण की दिशा में नई उपलब्धि

समय के साथ ऊर्जा की लगातार बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए वैकल्पिक स्रोतों की निरंतर तलाश जारी है। इस क्रम में दुनिया भर में विभिन्न किस्म के ऊर्जा उपकरण विकसित किए जा रहे हैं। इन उपकरणों में बैटरी एक सहज और लोकप्रिय विकल्प है। इनमें लीथियम-आयन बैटरी, लेड-एसिड बैटरी, रेडॉक्स फ्लो बैटरी, लीथियम-एयर बैटरी, जिंक-एयर बैटरी के अलावा सोडियम-आयन बैटरी, फ्यूल सेल्स और सुपर कैपेसिटर्स प्रमुख हैं। इन सब में जिंक एयर बैटरी को ज्यादा महत्व दिया जाता है। इसकी वजह है, इसकी कम लागत और अधिकतम ऊर्जा घनत्व। पोर्टेबेल इलेक्ट्रॉनिक्स और इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए ये ऊर्जा के दमदार स्रोत हैं।

1 10 11 12 13 14