स्वर्ण जयंती फेलोशिप के लिए 17 युवा वैज्ञानिक चयनित

देश के अलग-अलग वैज्ञानिक संस्थानों के 17 वैज्ञानिकों को शोध संबंधी उनके नवोन्मेषी विचारों और विभिन्न विषयों में अनुसंधान एवं विकास को प्रभावी बनाने के लिए स्वर्ण जयंती फेलोशिप प्रदान की गई है।स्वर्णजयंती फेलोशिप योजना के तहत युवा वैज्ञानिकों को विज्ञान व प्रौद्योगिकी में मूलभूत अनुसंधान के लिए विशेष सहायता व संरक्षण दिया जाता है।

आंखों के इलाज के लिए आईआईटी हैदराबाद की क्रांतिकारी खोज

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी), हैदराबाद की एक खोज आफ्थमालजी यानी नेत्र विज्ञान के क्षेत्र में अत्यंत उपयोगी सिद्ध हो सकती है। संस्थान के बायो-मेडिकल इंजीनियरिंग विभाग में एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. फाल्गुनी पाटी के नेतृत्व शोधकर्ताओं ने एक विशेष हाइड्रोजेल बनाया है, जिसे आंख के कार्निया में चोट लगने के तत्काल बाद उपयोग किया जा सकता है। नेत्र चिकित्सा के क्षेत्र में यह खोज क्रांतिकारी मानी जा रही है।

आईवीएफ की सफलता दर को और बेहतर बनाएगी नई तकनीक

निःसंतान दंपतियों के लिए सहायक प्रजनन तकनीक आईवीएफ उम्मीद की एक किरण है, लेकिन इस तकनीक की सफलता की राह में कुछ चुनौतियां भी हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए वैज्ञानिकों ने एमपीटीएक्स (mPTX) या एमपीटैक्स नाम का एक लघु कार्बनिक अणु (स्मॉल आर्गेनिक मॉलिक्यूल) का डिजाइन तैयार किया है, जो इन विट्रो फर्टिलाइजेशन (आईवीएफ) प्रक्रिया की सफलता में अहम भूमिका निभाने वाले स्पर्म की क्षमताओं को बेहतर बनाती है।

कोरोना की चौथी वैक्सीन ‘जायकोव-डी’ को आपातकालीन मंजूरी जल्द

कोरोना संक्रमण की संभावित तीसरी लहर से निपटने के लिए देश में युद्ध स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं। इन प्रयासों में ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत किया जा रहा है तो वहीं, दूसरी तरफ यह प्रयास भी किए जा रहे हैं कि अधिक से अधिक लोगों को वैक्सीन लगाई जा सके। ऐसा इसलिए क्योंकि वैक्सीन ही एकमात्र ऐसा हथियार है, जो कोरोना वायरस के प्रभाव को कम कर सकता है।

फेफड़ों के कैंसर पर अब हो सकेगा सटीक प्रहार

हाल में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) कानपुर और संजय गांधी पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेस (एसपीजीआईएमएस), लखनऊ के वैज्ञानिकों ने मिलकर एक ऐसा उपकरण विकसित किया है, जिसकी मदद से फेफड़ों के कैंसर से जूझ रहे मरीजों के उपचार में मदद मिल सकती है। इस उपकरण को ‘3डी रोबोटिक मोशन फैंटम’ नाम दिया गया है। इसके माध्यम से फेफड़ों के कैंसर के मरीजों को सटीक और कम मात्रा में भी अधिक प्रभावी रेडिएशन थेरेपी दी जा सकती सकेगी।

इसरो की इस उपलब्धि पर पूरी दुनिया बोल उठी-वाह, एलन मस्क ने भी दी बधाई

अंतरिक्ष के क्षेत्र में देश को एक से बढ़कर एक उपलब्धियों से गौरवान्वित करने वाले भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने 14 जुलाई को एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की। इस दिन इसरो ने गगनयान के विकास इंजन का तीसरा हॉट टेस्ट किया और यह परीक्षण पूरी तरह सफल रहा। परीक्षण के दौरान तमिलनाडु के महेंद्रगिरी स्थित इसरो प्रोपल्शन कॉम्पलेक्स में इंजन को 240 सेकंड तक चलाया गया। मानव आधारित जीएसएलवी एमके3 मिसाइल पर के कोर एल110 लिक्विड स्टेज पर यह परीक्षण पूरा हुआ।

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