शास्त्रों में इसलिए वर्जित है एक गोत्र में और घर के आसपास विवाह

सनातन धर्म में विवाह एक महत्वपूर्ण संस्कार है। विवाह दरअसल केवल वर-कन्या का ही नहीं, बल्कि दो परिवारों या यूं कहें कि दो खानदानों का मिलन होता है। इसलिए शादी-विवाह से पहले वर और वधू दोनों ही पक्ष कई सारी जांच-पड़ताल और औपचारिकताएं पूरी करते हैं। इनमें कुंडली मिलान के साथ ही एक-दूसरे का फैमिली बैकग्राउंड और गोत्र भी बहुत मायने रखता है। आज भी एक ही गोत्र में शादी से लोग परहेज करते हैं। अब तो मेडिकल साइंस ने भी प्रमाणित किया है कि एक ही गोत्र में शादी से उत्पन्न होने वाली संतान में जेनेटिक बीमारियों का खतरा रहता है। साथ ही प्राचीन समय में घर के आसपास यानी एक गांव या मुहल्ले में शादी से भी परहेज किया जाता था।

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