कीट-पतंगों की दृष्टि को प्रभावित कर रहा प्रकाश प्रदूषण

एक नए अध्ययन में पता चला है कि प्रकाश प्रदूषण के रंगों और इसकी तीव्रता में परिवर्तन के परिणामस्वरूप पिछले कुछ दशकों के दौरान जीव-जंतुओं की दृष्टि पर जटिल और अप्रत्याशित प्रभाव पड़ रहा है। ब्रिटेन के एक्सेटर विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं द्वारा किया गया यह अध्ययन दुनियाभर में प्रकाश प्रदूषण के कारण बढ़ते पर्यावरणीय खतरों के प्रति सचेत करता है।

गुणों का खजाना है बांस

भारत में बांस को हरा सोना भी कहा जाता है क्योंकि यह एक टिकाऊ और बहुउपयोगी प्राकृतिक संसाधन एवं भारतीय संस्कृति का एक अविभाज्य हिस्सा है। लेकिन, ज्यादातर लोग इस तथ्य से अनजान हैं कि बांस केवल इमारती लकड़ी नहीं है, बल्कि एक औषधि और खाद्य भी है।

आईवीएफ की सफलता दर को और बेहतर बनाएगी नई तकनीक

निःसंतान दंपतियों के लिए सहायक प्रजनन तकनीक आईवीएफ उम्मीद की एक किरण है, लेकिन इस तकनीक की सफलता की राह में कुछ चुनौतियां भी हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए वैज्ञानिकों ने एमपीटीएक्स (mPTX) या एमपीटैक्स नाम का एक लघु कार्बनिक अणु (स्मॉल आर्गेनिक मॉलिक्यूल) का डिजाइन तैयार किया है, जो इन विट्रो फर्टिलाइजेशन (आईवीएफ) प्रक्रिया की सफलता में अहम भूमिका निभाने वाले स्पर्म की क्षमताओं को बेहतर बनाती है।

नार्थ-ईस्ट में मोदी सरकार के सात साल में पिछले 70 वर्षों से ज्यादा विकास : अमित शाह

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शनिवार को शिलांग में उत्तर पूर्वी अंतरिक्ष उपयोग केंद्र (North Eastern Space Applications Centre-NESAC) के बहुउद्देयशीय सम्मेलन केंद्र और प्रदर्शनी सुविधा का शिलान्यास किया। एनईसैक सोसाइटी के अध्यक्ष अमित शाह ने अंतरिक्ष विज्ञान और प्रौद्योगिकी केंद्र के संचालन संबंधी उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता भी की। केंद्रीय गृह मंत्री ने एक अन्य बैठक में पूर्वोत्तर राज्यों के सभी मुख्यमंत्रियों के साथ सुरक्षा और विकास की गहन समीक्षा की।

कोरोना की चौथी वैक्सीन ‘जायकोव-डी’ को आपातकालीन मंजूरी जल्द

कोरोना संक्रमण की संभावित तीसरी लहर से निपटने के लिए देश में युद्ध स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं। इन प्रयासों में ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत किया जा रहा है तो वहीं, दूसरी तरफ यह प्रयास भी किए जा रहे हैं कि अधिक से अधिक लोगों को वैक्सीन लगाई जा सके। ऐसा इसलिए क्योंकि वैक्सीन ही एकमात्र ऐसा हथियार है, जो कोरोना वायरस के प्रभाव को कम कर सकता है।

दिल्ली में प्रदूषण पराली से बढ़ा या उद्योगों से, मिलेगी सटीक जानकारी

सर्दियों के दौरान उत्तर-पश्चिम भारत और विशेषकर राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली केवल ठंड से ठिठुरन की चपेट में ही नहीं आती, बल्कि इस दौरान बढ़े वायु-प्रदूषण की समस्या भी इन इलाकों को खासा परेशान करती है। यहां तक कि अदालतें भी सर्दियों के दौरान दिल्ली-एनसीआर की आबोहवा की तुलना गैस चैंबर से कर चुकी हैं।सर्दियों के साथ आने वाली इस चुनौती से निपटने के लिए मौसम वैज्ञानिकों ने एक डिसिजन सपोर्ट सिस्टम (डीएसएस) विकसित किया है। इससे न केवल दिल्ली और अन्य शहरों के प्रदूषण के स्रोतों को लेकर सटीक जानकारी उपलब्ध हो सकेगी, बल्कि सर्दियों के लिए एक व्यावहारिक परिदृश्य का अनुमान लगाना भी आसान होगा। सिस्टम यह भी बताएगा कि प्रदूषण का कारण पंजाब और हरियाणा में जलाई जाने वाली पराली है या उद्योग और वाहनों से निकलने वाला धुआं।

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