स्वर्ण जयंती फेलोशिप के लिए 17 युवा वैज्ञानिक चयनित

देश के अलग-अलग वैज्ञानिक संस्थानों के 17 वैज्ञानिकों को शोध संबंधी उनके नवोन्मेषी विचारों और विभिन्न विषयों में अनुसंधान एवं विकास को प्रभावी बनाने के लिए स्वर्ण जयंती फेलोशिप प्रदान की गई है।स्वर्णजयंती फेलोशिप योजना के तहत युवा वैज्ञानिकों को विज्ञान व प्रौद्योगिकी में मूलभूत अनुसंधान के लिए विशेष सहायता व संरक्षण दिया जाता है।

आईआईटी दिल्ली में इलेक्ट्रिक वाहन तकनीक से जुड़ी तीन नई प्रयोगशालाएं शुरू

जलवायु परिवर्तन और प्रदूषण के बढ़ते दबाव के चलते इलेक्ट्रिक वाहन वर्तमान युग की एक अनिवार्य आवश्यकता बनकर उभरे हैं। देश में इलेक्ट्रिक वाहनों के बढ़ते उपयोग को देखते हुए चार्जिंग स्टेशनों की संख्या बढ़ाने के साथ-साथ इलेक्ट्रिक वाहन प्रौद्योगिकी से संबंधित शोध एवं विकास पर भी जोर दिया जा रहा है।

अतिरिक्त सौर ग्रहों के अध्ययन में प्रकाश ध्रुवण मददगार

भारतीय खगोलविदों ने अतिरिक्त सौर ग्रहों के वातावरण को समझने की एक नई विधि खोजी है। उन्होंने दिखाया है कि सूर्य के अलावा अन्य तारों के चारों ओर घूमने वाले ग्रहों का अध्ययन प्रकाश के ध्रुवण को देखकर और ध्रुवण के संकेतों के आधार पर किया जा सकता है। ध्रुवण संकेत या प्रकाश की प्रकीर्णन तीव्रता में परिवर्तन को मौजूदा उपकरणों के साथ देखा जा सकता है और सौर मंडल से परे ग्रहों के अध्ययन का विस्तार किया जा सकता है।

आईवीएफ तकनीक से भारत में पहली बार भैंस के बछड़े का जन्म

कृत्रिम गर्भाधान की आईवीएफ तकनीक से भारत में पहली बार भैंस का गर्भाधान किया गया और बछड़े ने जन्म लिया। यह भैंस बन्नी नस्ल की है। इसके साथ ही भारत में ओपीयू-आईवीएफ तकनीक अगले स्तर पर पहुंच गई है। पहला आईवीएफ बछड़ा बन्नी नस्ल की भैंस के छह बार आईवीएफ गर्भाधान के बाद पैदा हुआ। यह प्रक्रिया सुशीला एग्रो फार्म्स के किसान विनय एल. वाला के घर जाकर पूरी की गई। यह फार्म गुजरात के सोमनाथ जिले के धनेज गांव में स्थित है।

Nalanda News : मेनिनजाइटिस के लक्षणों की पहचान कर सही इलाज जरूरी

बारिश के कारण जगह-जगह जलजमाव है। ऐसे में मलेरिया, डेंगू आदि मच्छर जनित रोगों के फैलने की आशंका बढ़ गई है।मेनिनजाइटिस भी एक मच्छर जनित रोग है और इसके लक्षण दिखने पर किसी भी तरह की लापरवाही रोगी के लिए जोखिम भरी होती है।

सूर्य के कोरोना से निकलने वाले पदार्थ से प्रभावित होते हैं मौसम के पूर्वानुमान

हाल के एक अध्ययन से पता चला है कि कैसे सौर वातावरण में सूर्य के किरीट (कोरोना) से उत्सर्जित होने वाले पदार्थ (कोरोनल मास इजेक्शन) जैसी स्थितियां और घटनाएं अंतरिक्ष के मौसम पूर्वानुमानों की उस सटीकता को प्रभावित करती हैं, जो हमारे उपग्रहों के स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण हैं। यह अध्ययन भारत के पहले सौर मिशन आगामी आदित्य-एल1 से प्राप्त होने वाले आंकड़ों (डेटा) की व्याख्या में सहायता करेगी। अंतरिक्ष का मौसम सौर वायु और पृथ्वी के निकट के अंतरिक्ष की उन स्थितियों को संदर्भित करता है, जिनसे अंतरिक्ष में भेजी गई और भूमि पर स्थापित तकनीकी प्रणालियों के प्रदर्शन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

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