अंतरिक्ष में जैविक प्रयोग के लिए वैज्ञानिकों ने बनाया मॉड्यूलर उपकरण

भारतीय विज्ञान संस्थान (आईआईएससी) और भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के शोधकर्ताओं ने अंतरिक्ष में सूक्ष्मजीवों के संवर्द्धन के लिए एक मॉड्युलर उपकरण विकसित किया है। यह नया मॉड्युलर उपकरण बाहरी अंतरिक्ष में जैविक प्रयोग कार्यों में उपयोगी हो सकता है।

कीट-पतंगों की दृष्टि को प्रभावित कर रहा प्रकाश प्रदूषण

एक नए अध्ययन में पता चला है कि प्रकाश प्रदूषण के रंगों और इसकी तीव्रता में परिवर्तन के परिणामस्वरूप पिछले कुछ दशकों के दौरान जीव-जंतुओं की दृष्टि पर जटिल और अप्रत्याशित प्रभाव पड़ रहा है। ब्रिटेन के एक्सेटर विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं द्वारा किया गया यह अध्ययन दुनियाभर में प्रकाश प्रदूषण के कारण बढ़ते पर्यावरणीय खतरों के प्रति सचेत करता है।

गुणों का खजाना है बांस

भारत में बांस को हरा सोना भी कहा जाता है क्योंकि यह एक टिकाऊ और बहुउपयोगी प्राकृतिक संसाधन एवं भारतीय संस्कृति का एक अविभाज्य हिस्सा है। लेकिन, ज्यादातर लोग इस तथ्य से अनजान हैं कि बांस केवल इमारती लकड़ी नहीं है, बल्कि एक औषधि और खाद्य भी है।

आईवीएफ की सफलता दर को और बेहतर बनाएगी नई तकनीक

निःसंतान दंपतियों के लिए सहायक प्रजनन तकनीक आईवीएफ उम्मीद की एक किरण है, लेकिन इस तकनीक की सफलता की राह में कुछ चुनौतियां भी हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए वैज्ञानिकों ने एमपीटीएक्स (mPTX) या एमपीटैक्स नाम का एक लघु कार्बनिक अणु (स्मॉल आर्गेनिक मॉलिक्यूल) का डिजाइन तैयार किया है, जो इन विट्रो फर्टिलाइजेशन (आईवीएफ) प्रक्रिया की सफलता में अहम भूमिका निभाने वाले स्पर्म की क्षमताओं को बेहतर बनाती है।

फलों और फूलों के स्वाद-सुगंध पर खतरा, जानिए कैसे

फलों और फूलों के स्वाद तथा सुगंध पर संकट मंडरा रहा है। ऐसा इसलिए क्योंकि फूलों के फल में रूपांतरण के लिए जरूरी तितलियों का अस्तित्व संकट में है। स्वयं केंद्र सरकार ने संसद में बताया है कि देश में तितलियों की 35 प्रजातियों के अस्तित्व पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है।

कोरोना की चौथी वैक्सीन ‘जायकोव-डी’ को आपातकालीन मंजूरी जल्द

कोरोना संक्रमण की संभावित तीसरी लहर से निपटने के लिए देश में युद्ध स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं। इन प्रयासों में ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत किया जा रहा है तो वहीं, दूसरी तरफ यह प्रयास भी किए जा रहे हैं कि अधिक से अधिक लोगों को वैक्सीन लगाई जा सके। ऐसा इसलिए क्योंकि वैक्सीन ही एकमात्र ऐसा हथियार है, जो कोरोना वायरस के प्रभाव को कम कर सकता है।

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