हिमालयी क्षेत्र में जलवायु परिवर्तन का हो सकेगा सटीक आकलन

भारतीय शोधकर्ताओं ने एक ऐसी पद्धति विकसित की है, जो हिमालयी क्षेत्र में ब्लैक कार्बन के सटीक आकलन और मौसम तथा जलवायु संबंधी पूर्वानुमानों के सुधार में मददगार हो सकती है।शोध पत्रिका ‘ एशिया पेसिफिक जर्नल ऑफ एटमॉस्फेरिक साइंसेज ’ में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार ब्लैक कार्बन (प्रदूषक तत्व) को ग्लोबल वार्मिंग बढ़ाने में कार्बन डाइ ऑक्साइड के बाद दूसरा सबसे बड़ा कारण माना जाता है। शोधकर्ताओं ने पाया है कि हिमालयी क्षेत्र में ब्लैक कार्बन का सटीक आकलन ऑप्टिकल उपकरणों के उपयोग से संभव हो सकता है। यह पद्धति हिमालयी क्षेत्र के लिए मास एब्जॉर्प्शन क्रॉस-सेक्शन (एमएसी) नामक विशिष्ट मानदंड पर आधारित है।

हर्बल गुलाल ने राजस्थान की जनजातियों के जीवन में भरे रंग

जंगल के उत्पादों को जमा करने वाली जनजातियों के लिए वनधन जनजातीय स्टार्ट-अप की पहल वरदान साबित हो रही है। लघु वनोत्पाद (एमएफपी) पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) प्रणाली से इन जनजातियों को उनके उत्पादों की बिक्री में काफी सहूलियत हुई है। ये पहल ट्राइफेड द्वारा की जा रही है।

स्वदेशी कोविड वैक्सीन कोवैक्सीन के लिए कच्चे माल का उत्पादन करेगी इंडियन इम्यूनोलॉजिकल लिमिटेड

कोरोना वैक्सीन के उत्पादन में आत्मनिर्भर बनने के लिए केंद्र सरकार कई स्तर पर काम कर रही है। इसी कड़ी में स्वदेशी कोविड वैक्सीन कोवैक्सीन का उत्पादन बढ़ाने के लिए कच्चा माल (औषधि पदार्थ) तैयार करने का जिम्मा सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड की हैदराबाद स्थित सहायक कंपनी इंडियन इम्यूनोलॉजिकल लिमिटेड (आईआईएल) को दिया गया है।

कोरोना वैक्सीन : महाराष्ट्र की सरकारी कंपनी हैफकाइन बायोफार्मा बनाएगी कोवैक्सिन की 22.8 करोड़ डोज

देश की 130 करोड़ की आबादी को जल्द से जल्द कोरोना वैक्सीन उपलब्ध कराने के लिए केंद्र सरकार युद्ध स्तर पर काम कर रही है। इसी क्रम में केंद्र सरकार ने महाराष्ट्र की सरकारी कंपनी हैफकाइन बायोफार्मा को प्रौद्योगिकी हस्तांतरण कराकर स्वदेशी कोरोना वैक्सीन कोवैक्सिन की 22.8 करोड़ डोज तैयार कराने का फैसला किया है।

देश को मिलने वाली है एक और स्वदेशी वैक्सीन, केंद्र सरकार ने बुक कराई 30 करोड़ डोज

भारत को एक और स्वदेशी कोरोना वैक्सीन अगस्त तक मिलने जा रही है। हैदराबाद की कंपनी बायोलॉजिकल-ई इस वैक्सीन को विकसित कर रही है। इस आरबीडी प्रोटीन सब-यूनिट आधारित वैक्सीन के फिलहाल तीसरे चरण का परीक्षण चल रहा है। पहले और दूसरे चरण के इसके परीक्षण में उत्साहजनक नतीजे मिले हैं। इसे देखते हुए केंद्र सरकार ने वैक्सीन की तीस करोड़ डोज बुक करा ली हैं। साथ ही इस मद में कंपनी को पंद्रह सौ करोड़ का भुगतान भी केंद्र सरकार द्वारा जल्द किया जाएगा। अभी तक भारत बायोटेक की को-वैक्सीन ही स्वदेशी वैक्सीन है।

इंडिगो की पत्तियों का रस आंखों को लेजर विकिरण से बचाने में सक्षम

इंडिगो की पत्तियों के रस (डाई) को मानव आंखों को हानिकारक लेजर विकिरण से बचाने में सक्षम पाया गया है। ऐसे में इनका उपयोग हानिकारक विकिरण को कमजोर करने और मानव आंखों या अन्य संवेदनशील ऑप्टिकल उपकरणों को ऐसे वातावरण में अचानक क्षति से बचाने के लिए उपयोगी दवा विकसित करने में किया जा सकता है।

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