नार्थ-ईस्ट में मोदी सरकार के सात साल में पिछले 70 वर्षों से ज्यादा विकास : अमित शाह

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शनिवार को शिलांग में उत्तर पूर्वी अंतरिक्ष उपयोग केंद्र (North Eastern Space Applications Centre-NESAC) के बहुउद्देयशीय सम्मेलन केंद्र और प्रदर्शनी सुविधा का शिलान्यास किया। एनईसैक सोसाइटी के अध्यक्ष अमित शाह ने अंतरिक्ष विज्ञान और प्रौद्योगिकी केंद्र के संचालन संबंधी उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता भी की। केंद्रीय गृह मंत्री ने एक अन्य बैठक में पूर्वोत्तर राज्यों के सभी मुख्यमंत्रियों के साथ सुरक्षा और विकास की गहन समीक्षा की।

Tokyo Olympics : मीराबाई चानू ने बिखेरी चांदी की चमक

भारोत्तोलक मीराबाई चानू ने शनिवार को महिलाओं की 49 किलोग्राम वर्ग की भारोत्तोलन स्पर्धा में रजत पदक जीतकर टोक्यो ओलंपिक में भारत को पहला पदक दिलाया। उन्होंने स्नैच में 87 किलोग्राम और क्लीन एंड जर्क में 115 किलोग्राम सहित कुल 202 किग्रा भार उठाया। मणिपुर की 26 वर्षीय चानू, 2018 में पीठ की चोट के बाद सावधानी से उबरते हुए, देश की पहचान बन गईं।

कोरोना की चौथी वैक्सीन ‘जायकोव-डी’ को आपातकालीन मंजूरी जल्द

कोरोना संक्रमण की संभावित तीसरी लहर से निपटने के लिए देश में युद्ध स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं। इन प्रयासों में ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत किया जा रहा है तो वहीं, दूसरी तरफ यह प्रयास भी किए जा रहे हैं कि अधिक से अधिक लोगों को वैक्सीन लगाई जा सके। ऐसा इसलिए क्योंकि वैक्सीन ही एकमात्र ऐसा हथियार है, जो कोरोना वायरस के प्रभाव को कम कर सकता है।

अंगूरफल के पोषण तत्वों को 28 दिन तक रखा जा सकेगा सुरक्षित

अंगूरफल के पोषण को अब 28 दिनों तक सुरक्षित रखा जा सकेगा। वैज्ञानिकों ने अंगूरफल को फंगल संक्रमण से बचाने लिए नई पद्धति विकसित की है। संतरे (C.sinensis) और चकोतरे (C.maxima) के मेल से बना नींबूवंशीय (सिट्रस) संकर प्रजाति का अंगूरफल या ग्रेपफ्रूट (Citrus×paradisi), अपने खट्टे से लेकर खट्टे-मीठे और कुछ-कुछ कड़वे स्वाद वाले फल के रूप में जाना जाता है। अंगूर की तरह गुच्छों में विकसित होकर पेड़ से लटकने के कारण इसे अंगूरफल का नाम दिया गया है।

दिल्ली में प्रदूषण पराली से बढ़ा या उद्योगों से, मिलेगी सटीक जानकारी

सर्दियों के दौरान उत्तर-पश्चिम भारत और विशेषकर राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली केवल ठंड से ठिठुरन की चपेट में ही नहीं आती, बल्कि इस दौरान बढ़े वायु-प्रदूषण की समस्या भी इन इलाकों को खासा परेशान करती है। यहां तक कि अदालतें भी सर्दियों के दौरान दिल्ली-एनसीआर की आबोहवा की तुलना गैस चैंबर से कर चुकी हैं।सर्दियों के साथ आने वाली इस चुनौती से निपटने के लिए मौसम वैज्ञानिकों ने एक डिसिजन सपोर्ट सिस्टम (डीएसएस) विकसित किया है। इससे न केवल दिल्ली और अन्य शहरों के प्रदूषण के स्रोतों को लेकर सटीक जानकारी उपलब्ध हो सकेगी, बल्कि सर्दियों के लिए एक व्यावहारिक परिदृश्य का अनुमान लगाना भी आसान होगा। सिस्टम यह भी बताएगा कि प्रदूषण का कारण पंजाब और हरियाणा में जलाई जाने वाली पराली है या उद्योग और वाहनों से निकलने वाला धुआं।

फेफड़ों के कैंसर पर अब हो सकेगा सटीक प्रहार

हाल में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) कानपुर और संजय गांधी पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेस (एसपीजीआईएमएस), लखनऊ के वैज्ञानिकों ने मिलकर एक ऐसा उपकरण विकसित किया है, जिसकी मदद से फेफड़ों के कैंसर से जूझ रहे मरीजों के उपचार में मदद मिल सकती है। इस उपकरण को ‘3डी रोबोटिक मोशन फैंटम’ नाम दिया गया है। इसके माध्यम से फेफड़ों के कैंसर के मरीजों को सटीक और कम मात्रा में भी अधिक प्रभावी रेडिएशन थेरेपी दी जा सकती सकेगी।

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