दिल्ली में प्रदूषण पराली से बढ़ा या उद्योगों से, मिलेगी सटीक जानकारी

सर्दियों के दौरान उत्तर-पश्चिम भारत और विशेषकर राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली केवल ठंड से ठिठुरन की चपेट में ही नहीं आती, बल्कि इस दौरान बढ़े वायु-प्रदूषण की समस्या भी इन इलाकों को खासा परेशान करती है। यहां तक कि अदालतें भी सर्दियों के दौरान दिल्ली-एनसीआर की आबोहवा की तुलना गैस चैंबर से कर चुकी हैं।सर्दियों के साथ आने वाली इस चुनौती से निपटने के लिए मौसम वैज्ञानिकों ने एक डिसिजन सपोर्ट सिस्टम (डीएसएस) विकसित किया है। इससे न केवल दिल्ली और अन्य शहरों के प्रदूषण के स्रोतों को लेकर सटीक जानकारी उपलब्ध हो सकेगी, बल्कि सर्दियों के लिए एक व्यावहारिक परिदृश्य का अनुमान लगाना भी आसान होगा। सिस्टम यह भी बताएगा कि प्रदूषण का कारण पंजाब और हरियाणा में जलाई जाने वाली पराली है या उद्योग और वाहनों से निकलने वाला धुआं।

यूपी, दिल्ली और हरियाणा वालों को झमाझम बारिश के लिए 10 जुलाई तक करना होगा इंतजार

भीषण गर्मी और धूप से बेहाल उत्तर प्रदेश और पड़ोसी राज्यों के लोगों को आठ जुलाई से मौसम बदलने से कुछ राहत मिलने के आसार हैं। मौसम विभाग के अनुसार दस जुलाई से इन राज्यों में मानसून पूरी तरह सक्रिय हो जाएगा। मौसम से जुड़े पूर्वानुमान मॉडल पर आधारित भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) द्वारा जारी किए गए ताजा अनुमान के अनुसार दक्षिण-पश्चिम मानसून आठ जुलाई से पश्चिमी तटों और मध्‍य भारत के पूर्वी भागों सहित दक्षिण प्रायद्वीप भारत में धीरे-धीरे प्रभावी हो सकता है।

ग्लेशियरों के पिघलने से प्रभावित हो सकते हैं सौ करोड़ लोग

समूचे विश्व के लिए आज जलवायु परिवर्तन एक चुनौती है। जलवायु परिवर्तन के कारण ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं। इस कारण नदियों-सागरों के जलस्तर में वृद्धि हो रही है, जो भविष्य में विकराल रूप ले सकती है। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) इंदौर द्वारा किए गए अध्ययन में यह बात सामने आई है कि जलवायु परिवर्तन के कारण हिमालय पर्वत श्रृंखलाओं में बर्फ और ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं। इस कारण हिमालय से निकलने वाली सिंधु, गंगा और ब्रह्मपुत्र जैसी नदियों के जलस्तर में वृद्धि देखने को मिली है।

पूरे देश में मानसूनी गतिविधियां सक्रिय, गरज-चमक के साथ होगी बारिश

पूरे भारत में मानसूनी और प्री मानसूनी गतिविधियां सक्रिय हो चुकी हैं। इसके चलते उत्तर प्रदेश, बिहार समेत कई राज्यों में अगले कुछ घंटों में न सिर्फ तेज हवाएं चलेंगी, बल्कि गरज, चमक के साथ मध्यम से भारी बारिश भी होगी। इसके साथ ही लोगों को गर्मी से भी राहत मिलेगी। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार अगले कुछ घंटों में उत्तराखंड, पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़ और दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, तेलंगाना और जम्मू व कश्मीर, लद्दाख, गिलगित-बाल्टिस्तान और मुजफ्फराबाद, हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश, विदर्भ, छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल और सिक्किम, ओडिशा, अंडमान व निकोबार द्वीपसमूह, अरुणाचल प्रदेश, असम और मेघालय, नगालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा, मध्य महाराष्ट्र, मराठवाड़ा, तटीय आंध्र प्रदेश और यनम, तटीय कर्नाटक और केरल तथा माहे में एक-दो स्थानों पर बादलों की गर्जना और बिजली कड़कने की घटनाएं हो सकती हैं। इन भागों में 30-40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं भी चल सकती हैं।

खाली कराए जा रहे बंगाल और ओडिशा के तटवर्ती इलाके, आ रहा चक्रवाती तूफान यास

चक्रवाती तूफान तौकते से देश अभी उबरा भी नहीं था कि बंगाल की खाड़ी में चक्रवाती तूफानी यास दस्तक देने की तैयारी में है। भयावहता के मामले में यह तौकते से कम नहीं होगा। ऐसी आशंका विशेषज्ञ जता रहे हैं। यास के 26 मई की शाम तक पश्चिम बंगाल और ओडिशा के तटवर्ती इलाकों से टकराने की आशंका है। इस दौरान 165 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलेंगी। इसके मद्देनजर तटवर्ती इलाकों को खाली कराने का काम जोरों पर है। साथ ही राहत एवं बचाव कार्य को लेकर एनडीआरएफ की तैनाती शुरू हो गई है। जहाजों और नावों को भी तट पर आ जाने के लिए कहा गया है। केंद्र और संबंधित राज्यों के बीच लगातार बैठकें हो रही हैं।

जाते-जाते राजस्थान और पश्चिमी उत्तर प्रदेश को भिगोएगा चक्रवाती तूफान तौकते

संभावना है कि अगले 12 घंटों के दौरान चक्रवाती तूफान तौकते उत्तर-पूर्वी दिशा में मुड़ जाएगा और धीरे-धीरे कमजोर पड़ेगा। निश्चित स्थान पर कम दबाव का क्षेत्र बनेगा। इससे अगले दो दिनों के दौरान वहां से उत्तर-पूर्व दिशा में बढ़ सकता है तथा पूरे राजस्थान और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में इसका बचा-खुचा असर दिखेगा। इन इलाकों में बारिश के साथ तेज हवाएं चलेंगी।

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