फलों और फूलों के स्वाद-सुगंध पर खतरा, जानिए कैसे

फलों और फूलों के स्वाद तथा सुगंध पर संकट मंडरा रहा है। ऐसा इसलिए क्योंकि फूलों के फल में रूपांतरण के लिए जरूरी तितलियों का अस्तित्व संकट में है। स्वयं केंद्र सरकार ने संसद में बताया है कि देश में तितलियों की 35 प्रजातियों के अस्तित्व पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है।

अंगूरफल के पोषण तत्वों को 28 दिन तक रखा जा सकेगा सुरक्षित

अंगूरफल के पोषण को अब 28 दिनों तक सुरक्षित रखा जा सकेगा। वैज्ञानिकों ने अंगूरफल को फंगल संक्रमण से बचाने लिए नई पद्धति विकसित की है। संतरे (C.sinensis) और चकोतरे (C.maxima) के मेल से बना नींबूवंशीय (सिट्रस) संकर प्रजाति का अंगूरफल या ग्रेपफ्रूट (Citrus×paradisi), अपने खट्टे से लेकर खट्टे-मीठे और कुछ-कुछ कड़वे स्वाद वाले फल के रूप में जाना जाता है। अंगूर की तरह गुच्छों में विकसित होकर पेड़ से लटकने के कारण इसे अंगूरफल का नाम दिया गया है।

दिल्ली में प्रदूषण पराली से बढ़ा या उद्योगों से, मिलेगी सटीक जानकारी

सर्दियों के दौरान उत्तर-पश्चिम भारत और विशेषकर राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली केवल ठंड से ठिठुरन की चपेट में ही नहीं आती, बल्कि इस दौरान बढ़े वायु-प्रदूषण की समस्या भी इन इलाकों को खासा परेशान करती है। यहां तक कि अदालतें भी सर्दियों के दौरान दिल्ली-एनसीआर की आबोहवा की तुलना गैस चैंबर से कर चुकी हैं।सर्दियों के साथ आने वाली इस चुनौती से निपटने के लिए मौसम वैज्ञानिकों ने एक डिसिजन सपोर्ट सिस्टम (डीएसएस) विकसित किया है। इससे न केवल दिल्ली और अन्य शहरों के प्रदूषण के स्रोतों को लेकर सटीक जानकारी उपलब्ध हो सकेगी, बल्कि सर्दियों के लिए एक व्यावहारिक परिदृश्य का अनुमान लगाना भी आसान होगा। सिस्टम यह भी बताएगा कि प्रदूषण का कारण पंजाब और हरियाणा में जलाई जाने वाली पराली है या उद्योग और वाहनों से निकलने वाला धुआं।

पोषक तत्व खो रहे गेहूं और चावल

माना जाता है कि चावल की खेती करीब 10 हजार वर्ष पहले शुरू हुई थी, जो अब दुनिया के तीन अरब से अधिक लोगों के भोजन का एक अभिन्न हिस्सा बन चुका है। लेकिन, कृषि वैज्ञानिकों ने पाया है कि चावल में आवश्यक पोषक तत्वों का घनत्व अब उतना नहीं है, जितना कि 50 साल पहले खेती से प्राप्त चावल में होता था। शोधकर्ताओं ने पाया है कि भारत में उपजाए जाने वाले चावल और गेहूं में जस्ता एवं लोहे के घनत्व में कमी आई है।

पश्चिम बंगाल से नेपाल को 24 मीट्रिक टन मूंगफली का निर्यात

पश्चिम बंगाल से नेपाल को 24 मीट्रिक टन (एमटी) मूंगफली का निर्यात किया गया है। पश्चिम बंगाल के मिदनापुर जिले के किसानों से यह मूंगफली खरीदी गई और उसे केंद्र सरकार की संस्था कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपेडा) में पंजीकृत लाडूराम प्रोमोटर्स प्रा.लि. कोलकाता ने निर्यात किया।

हर्बल गुलाल ने राजस्थान की जनजातियों के जीवन में भरे रंग

जंगल के उत्पादों को जमा करने वाली जनजातियों के लिए वनधन जनजातीय स्टार्ट-अप की पहल वरदान साबित हो रही है। लघु वनोत्पाद (एमएफपी) पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) प्रणाली से इन जनजातियों को उनके उत्पादों की बिक्री में काफी सहूलियत हुई है। ये पहल ट्राइफेड द्वारा की जा रही है।

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