नालंदा में कोविड टीकाकरण : पहले से कोविन पोर्टल पर रजिस्टर्ड लाभार्थियों को मिलेगी प्राथमिकता

नालंदा जिले में वैश्विक महामारी से बचाव के लिए टीकाकरण किया जा रहा है। टीकाकरण अभियान को गति देने के उद्देश्य से अहम निर्णय भी लिए जा रहे है। इसी के तहत फैसला लिया गया है कि अब पूर्व पंजीकृत लाभार्थियों का प्राथमिकता के आधार पर वैक्सीनेशन करना है।

नालंदा : गुरुवार से शहरी क्षेत्रों में चलेगा टीकाकरण एक्सप्रेस

नालंदा में 45 वर्ष से अधिक आयु वर्ग के लोगों के शत-प्रतिशत कोविड-19 टीकाकरण के उद्देश्य से स्वास्थ्य विभाग एवं नगर विकास एवं आवास विभाग द्वारा संयुक्त रूप से गुरुवार से शहरी क्षेत्रों में टीकाकरण एक्सप्रेस चलाने का निर्णय लिया गया है।इस अभियान के क्रियान्वयन को लेकर पहले ही सभी नगर निकायों के साथ विभागीय स्तर पर बैठक की जा चुकी है। इस अभियान के तहत सभी नगर निकायों के वार्डों में चिन्हित सार्वजनिक स्थल/भवन में टीकाकरण एक्सप्रेस के माध्यम से 45 वर्ष से अधिक आयु वर्ग समूह के लोगों को कोविड-19 टीका ऑन द स्पॉट निबंधन के माध्यम से लगाया जाएगा।

तंबाकू सेवन से नहीं रखें कोई वास्ता, कोरोना को हराने का यही है रास्ता

तम्बाकू सेवन के प्रति आम लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से प्रत्येक साल 31 मई को विश्व तम्बाकू निषेध दिवस मनाया जाता है। इस वर्ष ‘कमिट टू क्विट’ तम्बाकू निषेध दिवस का थीम रखा गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि कोरोना संकट काल में किसी भी प्रकार के तम्बाकू उत्पादों का इस्तेमाल लोगों के लिए स्वास्थ्य चुनौतियों को बढ़ा सकता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार तंबाकू सेवन से विश्वभर में प्रति वर्ष 80 लाख लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ती है। वहीं, देशभर में लगभग 13 लाख लोगों की मौत तंबाकू उत्पादों के सेवन करने से होती है।

अब नमक पानी के गरारे से हो सकेगी कोरोना की आरटीपीसीआर जांच

कोरोना की आरटीपीसीआर जांच अब नमक पानी के गरारे से भी हो सकेगी। राष्ट्रीय पर्यावरण अभियांत्रिकी अनुसंधान संस्थान (एनईईआरआई) के नागपुर के वैज्ञानिकों ने यह तकनीक विकसित की है। इसमें जांच के नतीजे भी तीन घंटे में आ जाएंगे।

पीपीई किट और मास्क का बार-बार किया जा सकेगा उपयोग

अस्पतालों को अब पीपीई किट और मास्क की कमी से नहीं जूझना पड़ेगा। न ही उन्हें इस मद में भारी-भरकम राशि खर्च करनी पड़ेगी। इससे कोरोना मरीजों को भी बिल में कुछ राहत मिलेगी क्योंकि अस्पताल हर मरीज से पीपीई किट और मास्क के लिए अलग से राशि वसूलते हैं। यह संभव हो पाया है मुम्बई की एक स्टार्टअप कंपनी इंद्र जल (वाटर) द्वारा विकसित एन95 मास्क/पीपीई विसंक्रमण प्रणाली (मशीन) से।

ब्लैक फंगस के मामूली लक्षणों को भी न करें नजर अंदाज

म्यूकोरमायकोसिस, जिसे ब्लैक फंगस भी कहा जाता है, कोई नई बीमारी नहीं है। इस तरह के संक्रमण महामारी से पहले भी सामने आए थे। हालांकि, इनका प्रसार बहुत कम था। लेकिन, अब कोविड -19 के कारण, इस दुर्लभ लेकिन घातक कवकीय (फंगल) संक्रमण के मामले बड़ी संख्या में सामने आ रहे हैं। यह रोग उन लोगों में ज्यादा पाया जा रहा है, जो कोरोना से उबर चुके हैं।

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