Nalanda News : तीन वर्षों से फरार आरोपी अवैध शराब के साथ गिरफ्तार

दीपनगर पुलिस ने तीन वर्षों से फरार बिहार मद्य निषेध अधिनियम में वांछित एक अभियुक्त को 35 लीटर अवैध देसी शराब के साथ गिरफ्तार किया है।

सूर्य के कोरोना से निकलने वाले पदार्थ से प्रभावित होते हैं मौसम के पूर्वानुमान

हाल के एक अध्ययन से पता चला है कि कैसे सौर वातावरण में सूर्य के किरीट (कोरोना) से उत्सर्जित होने वाले पदार्थ (कोरोनल मास इजेक्शन) जैसी स्थितियां और घटनाएं अंतरिक्ष के मौसम पूर्वानुमानों की उस सटीकता को प्रभावित करती हैं, जो हमारे उपग्रहों के स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण हैं। यह अध्ययन भारत के पहले सौर मिशन आगामी आदित्य-एल1 से प्राप्त होने वाले आंकड़ों (डेटा) की व्याख्या में सहायता करेगी। अंतरिक्ष का मौसम सौर वायु और पृथ्वी के निकट के अंतरिक्ष की उन स्थितियों को संदर्भित करता है, जिनसे अंतरिक्ष में भेजी गई और भूमि पर स्थापित तकनीकी प्रणालियों के प्रदर्शन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

आंखों के इलाज के लिए आईआईटी हैदराबाद की क्रांतिकारी खोज

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी), हैदराबाद की एक खोज आफ्थमालजी यानी नेत्र विज्ञान के क्षेत्र में अत्यंत उपयोगी सिद्ध हो सकती है। संस्थान के बायो-मेडिकल इंजीनियरिंग विभाग में एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. फाल्गुनी पाटी के नेतृत्व शोधकर्ताओं ने एक विशेष हाइड्रोजेल बनाया है, जिसे आंख के कार्निया में चोट लगने के तत्काल बाद उपयोग किया जा सकता है। नेत्र चिकित्सा के क्षेत्र में यह खोज क्रांतिकारी मानी जा रही है।

बृहस्पति के लाल धब्बे में तेज हो रही तूफान की गति

नासा के हबल स्पेस टेलीस्कोप ने बृहस्पति ग्रह के विशालकाय लाल धब्बे (Great Red Spot) में रहस्यमय परिवर्तनों का पता लगाया है। अंतरिक्ष से प्राप्त तस्वीरों के विश्लेषण से वैज्ञानिकों को पता चला है कि बृहस्पति के इस विशालकाय लाल धब्बे वाले क्षेत्र में हवाओं की गति में वृद्धि हो रही है। नासा द्वारा इस संबंध में जारी एक वक्तव्य में कहा गया है कि एक आगे बढ़ने वाले रेसिंग कार चालक की गति की तरह, बृहस्पति के ग्रेट रेड स्पॉट की सबसे बाहरी लेन में हवाएं तेज हो रही हैं। इसमें स्पष्ट किया गया है कि यह खोज नासा के हबल स्पेस टेलिस्कोप द्वारा ही संभव है, जिसने एक दशक से अधिक समय तक ग्रह की निगरानी की है।

ताज की फीकी पड़ती चमक के पीछे प्रदूषित यमुना

धात्विक एवं अधात्विक संरचनाओं का क्षरण काफी हद तक उनके आसपास के वातावरण से नियंत्रित होता है। सत्रहवीं शताब्दी में आगरा में बना ताजमहल, एक यूनेस्को (संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक संगठन) विश्व धरोहर है, जो अपने रूप-सौंदर्य के लिए विश्व प्रसिद्ध है। सफेद पत्थरों से बना यह स्मारक धीरे-धीरे काला और पीला पड़ता जा रहा है, जो चिंता का विषय है। यदि इसे नियंत्रित नहीं किया गया, तो यह विश्व धरोहर संरचना अपनी चमक और सुंदरता खो सकती है।

जैसलमेर के रेगिस्तान में मिले शार्क के जुरासिक युगीन दांत

भारतीय शोधकर्ताओं को एक विलुप्त शार्क समूह, जिसे हायबोडोंट कहा जाता है, की एक प्रजाति के प्रमाण राजस्थान के जैसलमेर के रेगिस्तान से मिले हैं। शोधकर्ताओं को शार्क प्रजातियों के दांत प्राचीन चट्टानों में मिले हैं, जिनकी आयु 160 से 168 मिलियन वर्ष आंकी गई है।

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