छठ महापर्व 2021 : इस बार की छठ पूजा है बहुत खास, जानिए क्यों

नहाय-खाय के साथ महापर्व का हुआ शुभारंभ, हर दिन बन रहा विशिष्ट संयोग, अखंड साम्राज्य और अरिष्ट निवारण योग में हो रही छठ पूजा

छठ व्रत-2021 की प्रमुख तिथियां

आठ नवंबर : नहाय-खाय कद्दू भात
नौ नवंबर : खरना
दस नवंबर : सायंकालीन अर्घ्य
ग्यारह नवंबर : प्रातःकालीन अर्घ्य

senani.in || डिजिटल डेस्क

छठ महापर्व 2021 का नहाय-खाय के साथ सोमवार को शुभारंभ हो गया। इस बार की पूजा अखंड साम्राज्य और अरिष्ट निवारण योग में हो रही है। इसके अलावा भी कई शुभ संयोग इस अवसर पर पड़ रहे हैं। इसलिए यह पूजा करने वाली व्रतियों की सभी मनोकामनाएं पूरी होंगी।

प्रतीकात्मक तस्वीर : फेसबुक

जमशेदपुर में निवास कर रहे प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य डॉ. सुधानंद झा के अनुसार सोमवार को शुभ दिन में नहाय-खाय कद्दू भात के साथ छठ महापर्व की शुरुआत हो रही है। नहाय-खाय पर वंश वृद्धि एवं सर्व संपन्नता योग बन रहा है।

नौ नवंबर मंगलवार को छठ पर्व में जल में खड़े होकर श्री सूर्य षष्ठी छठ व्रत का संकल्प खरना पर्व मानेगा, जो व्रतधारियों के समस्त अमंगल को दूर करने वाला सिद्ध होगा।

दस नवंबर परम पवित्र बुधवार को श्री सूर्य षष्ठी छठ पर्व का प्रथम अर्थात सायंकालीन अर्घ्य है। इस अवसर पर डूबते हुए अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा। यह प्रथम अर्घ्य सर्व संपन्नता योग में संपन्न होगा, जो भक्तों के सभी प्रकार के मनोरथ को पूर्ण करने में समर्थ होगा।

प्रातःकालीन अर्घ्य 11 नवंबर बृहस्पतिवार को संपन्न होगा। इसमें उगते हुए यानी उदयगामी सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा। प्रातःकालीन अर्घ्य अखंड साम्राज्य योग और लक्ष्मी योग में संपन्न होगा। बृहस्पतिवार वैसे भी सबसे अधिक शुभ दिन होता है। इस दिन सौरमंडल के राजा सूर्य भगवान और ज्ञान विज्ञान के देवता मंत्री गुरु का महान संयोग होगा। इस प्रकार इस बार का छठ पर्व हर प्रकार से अपने भक्तों की मनोकामना पूर्ण करने में सहायक सिद्ध होगा।

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अर्घ्य के लिए मुहूर्त की आवश्यकता नहीं

अस्ताचलगामी और उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देने के लिए किसी मुहूर्त की जरूरत नहीं है। आचार्य डॉ. सुधानंद झा के अनुसार अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य देने के लिए अपने-अपने क्षेत्र में आप जहां भी छठ पर्व कर रहे हैं, वहां जैसे ही सूर्य अस्त होने लगें, दस मिनट पहले से ही अर्घ्य देना चाहिए। ठीक उसी प्रकार प्रातःकालीन अर्घ्य अपने-अपने क्षेत्र में उगते हुए सूर्य को दीजिए और प्रणाम कीजिए।

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