आईवीएफ तकनीक से भारत में पहली बार भैंस के बछड़े का जन्म

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की प्रेरणा से गुजरात के वैज्ञानिकों ने कृत्रिम गर्भाधान की आईवीएफ तकनीक से बन्नी नस्ल की भैंस के बछड़े का कराया जन्म

senani.in || डिजिटल डेस्क

कृत्रिम गर्भाधान की आईवीएफ तकनीक से भारत में पहली बार भैंस का गर्भाधान किया गया और बछड़े ने जन्म लिया। यह भैंस बन्नी नस्ल की है। इसके साथ ही भारत में ओपीयू-आईवीएफ तकनीक अगले स्तर पर पहुंच गई है। पहला आईवीएफ बछड़ा बन्नी नस्ल की भैंस के छह बार आईवीएफ गर्भाधान के बाद पैदा हुआ। यह प्रक्रिया सुशीला एग्रो फार्म्स के किसान विनय एल. वाला के घर जाकर पूरी की गई। यह फार्म गुजरात के सोमनाथ जिले के धनेज गांव में स्थित है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जब 15 दिसंबर, 2020 को गुजरात के कच्छ इलाके का दौरा किया था, तब उस समय उन्होंने बन्नी भैंस की नस्ल के बारे में चर्चा की थी। उसके अगले ही दिन, यानी 16 दिसंबर, 2020 को बन्नी भैंसों के अंडाणु निकालने (ओपीयू) और उन्हें विकसित करके भैंस के गर्भशय में स्थापित करने (इन-विट्रो फर्टिलाइजेशन-आईवीएफ) की प्रक्रिया शुरू करने की योजना बनाई गई।

ऐसे मिली सफलता

वैज्ञानिकों ने विनय एल. वाला के गुजरात के सोमनाथ जिले के धनेज स्थित सुशीला एग्रो फार्म्स की बन्नी नस्ल की तीन भैंसों को गर्भाधान के लिए तैयार किया। वैज्ञानिकों ने भैंस के अंडाशय से डिम्ब निकालने के उपकरण (इंट्रावैजिनल कल्चर डिवाइस-आईवीसी) द्वारा 20 अंडाणु निकाले। तीनों में से एक भैंस के कुल 20 अंडाणुओं को आईवीसी प्रक्रिया से निकाला गया।

वास्तव में एक डोनर से निकाले जाने वाले 20 अंडाणुओं में से 11 भ्रूण बन गए। नौ भ्रूणों को स्थापित किया गया, जिनसे तीन आईवीएफ गर्भाधान वजूद में आए। दूसरे डोनर से पांच अंडाणु निकाले गए, जिनसे पांच भ्रूण (शत प्रतिशत) तैयार हुए। पांच में से चार भ्रूणों को स्थापित करने के लिए चुना गया और इस प्रक्रिया से दो गर्भाधान हुए। तीसरे डोनर से चार अंडाणु निकाले गए। दो भ्रूणों को विकसित किया गया और उन्हें स्थापित करके एक गर्भाधान हुआ।

29 अंडाणुओं से विकसित हुए 18 भ्रूण

कुल मिलाकर 29 अंडाणुओं से 18 भ्रूण विकसित हुए। इसकी बीएल दर 62 प्रतिशत रही। पंद्रह भ्रूणों को स्थापित किया गया और उनसे छह गर्भाधान हुए। गर्भाधान दर 40 प्रतिशत रही। इन छह गर्भाधानों में से 23 अक्टूबर, 2021 को पहला आईवीएफ बछड़ा पैदा हुआ। यह देश का पहला बन्नी बछड़ा है, जो कृत्रिम गर्भाधान की आईवीएफ तकनीक से पैदा हुआ है।

पशुधन में होगा सुधार

सरकार और वैज्ञानिक समुदाय को भैंसों की आईवीएफ प्रक्रिया में अपार संभावना नजर आ रही है और वे देश के पशुधन में सुधार लाने के लिए प्रयासरत हैं।

बन्नी भैंसों की विशेषता

गुजरात के भुज के कच्छ में एक जगह है बन्नी। यहीं पर बन्नी भैंसों की ये नस्ल पाई जाती है। यहां लगभग पौने चार हजार वर्ग किलोमीटर में फैले बन्नी वन क्षेत्र में पाई जाने वाली विशिष्ट घास को चरकर से ये भैंसें दूसरी प्रजातियों के मुकाबले काफी हृष्ट-पुष्ट होती हैं। साथ ही रोजाना दस से पंद्रह लीटर दूध देती हैं। एक अनुमान के मुताबिक गुजरात मे बन्नी नस्ल की लगभग पांच लाख भैंसें हैं।

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