नवरात्र में क्या हो व्रतियों का आहार, जिससे बनी रहे भक्ति के लिए शक्ति

सात अक्टूबर से शुरू हो रही नवरात्र, आयुर्वेदाचार्य डॉ. शैलेश त्रिपाठी के अनुसार व्रतियों को एक-दो दिन पहले से ही अपने आहार में शुरू कर देना चाहिए परिवर्तन

senani.in || डिजिटल डेस्क

नवरात्र सात अक्टूबर से शुरू हो रही है। 15 अक्टूबर को विजयादशमी के साथ महापर्व का समापन होगा। नवरात्र में कुछ व्रती एक समय फलाहार लेते हैं तो कुछ बिना फलाहार लिए पूरे नौ दिन का व्रत रखने का संकल्प लेते हैं। व्रत निभाने के लिए शरीर में ऊर्जा होनी भी जरूरी है। इसके मद्देनजर आयुर्वेदाचार्य डॉ. शैलेश त्रिपाठी व्रतियों के लिए कुछ आहार सुझाव लेकर आए हैं।

आयुर्वेदाचार्य डॉ. शैलेश त्रिपाठी

ऐसे करना है परहेज

यह तो व्रती को मालूम होता है, लेकिन आहार में क्या-क्या शामिल करना है? किस समय, क्या खाएं कि भक्ति के लिए शक्ति बनी रहे, इसकी जानकारी सामान्य तौर पर नहीं होती।

पूरे नौ दिन का व्रत रखने वालों के लिए

कुछ व्रती एक दिन में सिर्फ एक चीज का सेवन करने का संकल्प लेते हैं। ऐसे लोग नवरात्र शुरू होने के एक-दो दिन पहले से ही भोजन में धीमा परिवर्तन कर सकते हैं। अपने भोजन में दूध या इसके खाद्य पदार्थ जैसे दही, पनीर लें। फल, जूस, लस्सी, नारियल पानी, सूप, सूखे मेवे, खाएं। गेहूं की रोटी की जगह रागी, ज्वार या बाजरा के आटे की रोटी खाएं। इसके अलावा नारियल, अनन्नास, पिंड खजूर लें। शक्कर की जगह गुड़ या शहद का इस्तेमाल करें। हाइड्रेटेड रहने के लिए नींबू पानी पीएं। सभी मौसमी फलों का सेवन करें। इन्हें आहार में शामिल करने से कैल्शियम और पोषक तत्व शरीर में बने रहेंगे।

दिन में एक बार फलाहार लेने वालों के लिए

कुछ व्रती पूरे दिन में सिर्फ एक बार फलाहार लेते हैं। ऐसे में पूर्ण आहार ग्रहण करें। पूर्ण आहार यानी जिसमें दूध से बने खाद्य पदार्थ, सब्जियां, फल, मेवा आदि शामिल रहे। राजगीरा भी ले सकते हैं। ये प्रोटीन, आयरन, मैग्नीशियम, फॉस्फोरस, पोटेशियम, एंटी-ऑक्सीडेंट, विटामिन-ई और विटामिन-सी से भरपूर हैं। इसमें अधिक फाइबर और आयरन होता है। दूध या अन्य अनाज के मुकाबले दोगुना कैल्शियम होता है। वहीं, नट्स में मूंगफली लें। फलाहार में दही या दूध शामिल करें। पनीर, मावा, अलग-अलग तरह और रंग के फल, पत्तेदार हरी सब्जियां लें। मीठे में अखरोट का हलवा, रसगुल्ला, संदेश, रबड़ी आदि लें।

रात के बजाय दिन में आहार लेना बेहतर

कुछ व्रती दिनभर व्रत रखते हैं और रात में अन्न ग्रहण करते हैं। अगर संकल्प सिर्फ एक समय अन्न ग्रहण करने का है तो रात के बजाय दिन में भोजन करें। दिनभर कुछ नहीं खाने के बाद रात में भोजन करने से शरीर उसे पचा नहीं पाता है। इससे शरीर को पोषण भी नहीं मिल पाता है। व्रत खोलने के लिए पराठे ले सकते हैं। रोटी या पराठे का आटा दूध से गूंथ सकते हैं। भोजन में सभी दालें, अनाज, हरी पत्तेदार सब्जियों का सेवन करें। साथ में एक पूरी-सब्जी जरूर लें। इनके साथ छाछ और नारियल या मावे की मिठाई लें।

ऐसे खोलें व्रत

अमूमन लोग पूरे नौ दिन व्रत रखने के बाद जब व्रत खोलते हैं तो एक साथ अधिक मात्रा में भोजन ग्रहण कर लेते हैं। ये तरीका गलत है। व्रत के बाद तीन-चार दिन में धीरे-धीरे भोजन की मात्रा बढ़ानी चाहिए।

साबूदाना और आलू से परहेज करें व्रती

फलाहार में ज्यादातर लोग आलू, चिप्स, साबूदाना के बड़े या खिचड़ी खाते हैं। आलू में कैलोरी ज्यादा होती है। इसलिए आलू का सेवन न करें। साबूदाना में भी कैलोरी अधिक होती है। इससे परहेज करें। इसकी जगह मोरधन ले सकते हैं। साबूदाना अगर खाना ही है तो इसमें आलू की जगह कई तरह की सब्जियां डाल सकते हैं। व्रत के दौरान मक्खन या घी-तेल का अधिक सेवन न करें।

आहार का ऐसे करें निर्धारण

सुबह नाश्ते में दूध, फल, सूखा मेवा या इनका शेक ले सकते हैं।

दोपहर के भोजन में राजगीरे के आटे या मोरधन की रोटी, सब्जियां, दही, फल ले सकते हैं।

शाम के आहार में लस्सी, मूंगफली के दाने, रोस्टेड मखाने, सूखे मेवे लें या कोकोनट क्रश ले सकते हैं।

रात का आहार

रात के आहार में राजगीरे का उपमा, दो तरह के फल, सूखे मेवे लें। ये हल्के होने के साथ-साथ पौष्टिक भी होते हैं। हायड्रेटेड रहने के लिए मिश्री-नींबू का पानी, ग्लूकोज या नारियल पानी का सिप बीच-बीच में लेते रहें।

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