Navratri 2021 : डोली पर आगमन और हाथी होगा मां दुर्गा का प्रस्थान

सात अक्टूबर दिन गुरुवार को नवरात्र का शुभारंभ और 15 अक्टूबर शुक्रवार को विजयादशमी के साथ होगा मां दुर्गा का प्रस्थान

senani.in || डिजिटल डेस्क

शारदीय नवरात्र, 2021 इस बार सात अक्टूबर यानी गुरुवार को शुरू हो रही है। विजयादशमी 15 अक्टूबर को शुक्रवार के दिन पड़ रही है। इस हिसाब से माता का आगमन डोली पर और प्रस्थान हाथी पर हो रहा है। आइए, जानते हैं, शास्त्रों में माता के आगमन और प्रस्थान के वाहन का क्या महत्व है और इसका क्या असर होता है?

प्रतीकात्मक तस्वीर

सनातन धर्म में नवरात्र में मां दुर्गा के आगमन और प्रस्थान के वाहन का विशेष महत्व है। माता के वाहन से ही हम लोग आगामी वर्ष कैसा रहेगा, इसका निर्धारण करते हैं। दरअसल, दिन के हिसाब से मां के आगमन और प्रस्थान वाहन का निर्धारण होता है। जिस दिन कलश स्थापना होती है, उसी दिन को मां के आगमन वाहन का आधार माना जाता है।

जमशेदपुर में निवास कर रहे ज्योतिषाचार्य डॉ. सुधानंद झा के अनुसार चूंकि, इस बार सात अक्टूबर गुरुवार को कलश स्थापना है। इसलिए मां का आगमन डोली पर हो रहा है, जो रोगों को बढ़ाने वाला सिद्ध होगा। आचार्य के अनुसार मां का आगमन डोली पर होने के कारण मार्च 2022 तक स्वास्थ्य के क्षेत्र में उथल-पुथल रहेगी। यही नहीं, रोग आदि का दुष्ट प्रभाव सालोंभर रहेगा। इसलिए अपने परिवार, समाज, राष्ट्र एवं विश्व कल्याण के लिए माताजी की आराधना श्रद्धा से करें।
विजयादशमी शुक्रवार को है। इसलिए मां का प्रस्थान हाथी पर होगा, जो मंगलमय जीवन की वर्षा करने वाला सिद्ध होगा।

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माता के आगमन वाहन का ऐसे होता है निर्धारण

आचार्य डॉ. सुधानंद झा के अनुसार शास्त्रों में कहा गया है कि यदि माता दुर्गा का आगमन रविवार या सोमवार को होता है, अर्थात नवरात्र में माता की कलश स्थापना रविवार या सोमवार को होती है तो उनका आगमन वाहन हाथी होता है। अर्थात माता हाथी पर आती हैं। शनिवार या मंगलवार को माता का आगमन होता है तो वह अश्व यानी घोड़े पर आती हैं। बृहस्पतिवार और शुक्रवार को माता जी डोली पर आती हैं। बुधवार को अगर माता जी का आगमन होता है तो वे नाव पर आती हैं। चूंकि, इस बार माता का आगमन गुरुवार को हो रहा है, इसलिए वह डोली पर आ रही हैं। चूंकि, डोली हिलती डुलती रहती है, इसलिए मान्यता है कि माता का डोली में आगमन होना स्वास्थ्य के लिए अच्छा नहीं होता।

प्रतीकात्मक तस्वीर

माता के गमन का फल

आचार्य डॉ. सुधानंद झा के अनुसार रविवार और सोमवार को यदि माता जी का प्रस्थान होता है तो माता का प्रस्थान भैंसे यानी महिष पर होता है। मान्यता है कि माता के भैंसे पर गमन से शोक फैलता है। शनिवार और मंगलवार को माता जी का प्रस्थान होता है और उस दिन विजयादशमी होती है तो उस दिन समाज को विजय प्राप्त होती है। लेकिन, समाज में एक-दूसरे के प्रति विद्वेष भी बढ़ता है। मनुष्य बीमार पड़ता है और उसका मन बेचैन होता है। बुधवार और शुक्रवार को माता जी का प्रस्थान होता है तो वह हाथी पर जाती हैं। यह शुभ होता है। समाज में आरोग्य की प्राप्ति होती है। अन्न उपजता है। माता जी का प्रस्थान अगर गुरुवार को होता है तो डोली पर उनका प्रस्थान होता है। माता का डोली पर आगमन तो ठीक नहीं माना जाता, लेकिन प्रस्थान शुभ माना जाता है।

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