शास्त्रों में इसलिए वर्जित है एक गोत्र में और घर के आसपास विवाह

सनातन धर्म में विवाह के लिए जो नियम सदियों पूर्व बनाए और बताए गए थे, वह आज भी प्रासंगिक हैं क्योंकि यह नियम गहन अध्ययन, अनुभव और शोध पर आधारित हैं

senani.in || डिजिटल डेस्क

सनातन धर्म में विवाह एक महत्वपूर्ण संस्कार है। विवाह दरअसल केवल वर-कन्या का ही नहीं, बल्कि दो परिवारों या यूं कहें कि दो खानदानों का मिलन होता है। इसलिए शादी-विवाह से पहले वर और वधू दोनों ही पक्ष कई सारी जांच-पड़ताल और औपचारिकताएं पूरी करते हैं। इनमें कुंडली मिलान के साथ ही एक-दूसरे का फैमिली बैकग्राउंड और गोत्र भी बहुत मायने रखता है। आज भी एक ही गोत्र में शादी से लोग परहेज करते हैं। अब तो मेडिकल साइंस ने भी प्रमाणित किया है कि एक ही गोत्र में शादी से उत्पन्न होने वाली संतान में जेनेटिक बीमारियों का खतरा रहता है। साथ ही प्राचीन समय में घर के आसपास यानी एक गांव या मुहल्ले में शादी से भी परहेज किया जाता था। शास्त्रों में कहा गया है-

दुहिता दुर्हिता दूरे हिता भवतीति||

प्रतीकात्मक तस्वीर

शास्त्रों के अनुसार दुहिता अर्थात कन्या का विवाह दूर होना ही हितकर है। शास्त्रों के अनुसार जो कन्या माता के कुल की छह पीढ़ियों से न हो और पिता के गोत्र की न हो, लड़के का उस कन्या से विवाह करना उचित है। इसका कारण यह बताया गया है कि जो आकर्षण दूर की और बिन देखी वस्तु में होता है, वह पास की वस्तु में नहीं होता। किसी परोक्ष (दूर की) वस्तु की प्रशंसा सुनकर उससे मिलने या देखने की जैसी इच्छा उत्पन्न होती है, वैसी नजदीक की वस्तु में नहीं होती। इसलिए दूरस्थ अर्थात जो अपने गोत्र व माता-पिता के कुल में निकट संबंध की न हो, उसी कन्या से वर का विवाह करना चाहिए।

शास्त्रों के अनुसार

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👍जो लड़का या लड़की बाल्यावस्था से एक-दूसरे के घर के निकट रहते हैं, वह एक साथ खेलते हैं, लड़ाई-झगड़ा करते हैं, एक-दूसरे के गुण-दोष और स्वभाव को जानते हैं। इसलिए इनका आपस में विवाह होने से इनमें प्रेम नहीं हो सकता।

👍जैसे पानी में पानी मिलाने से विलक्षण गुण नहीं बनता, उसी तरह एक गोत्र, पितृ, मातृ कुल में लड़का-लड़की का विवाह होने से धातुओं के ‘दल-बदल’ नहीं होने से संतान या दंपति की अपेक्षित उन्नति नहीं होती।

👍जैसे दूध मिश्री और औषधियों के योग से उत्तम बनता है, वैसे ही अलग गोत्र, मात्र-पितृ कुल से पृथक स्त्री-पुरुष का विवाह होना उत्तम होता है।

👍जैसे किसी मरीज को हवा-पानी बदलने के लिए डॉक्टर द्वारा कुछ दिन दूसरी जगह जाने की सलाह दी जाती है, वैसे ही घर से कुछ दूर की कन्या से विवाह करना ही उत्तम होता है।

👍निकट संबंधों में विवाह होने से लड़ाई-झगड़ा और तरक्की की स्थिति में सुख-दुख का ज्यादा भान और विरोध होना भी संभव है। इसके विपरीत दूर-दराज विवाह करने से प्रेम की डोर लंबी हो जाती है। इसलिए भी आसपास विवाह नहीं करना चाहिए।

👍दांपत्य जीवन में मन मुटाव और झगड़ा होना स्वाभाविक है। ऐसे में घर अगर नजदीक होगा तो कन्या बार-बार अपने घर जाएगी। दाम्पत्य जीवन में इससे अनावश्यक तनाव उत्पन्न होगा।

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यह भी जानें

मनुस्मृति के अनुसार एक ही गोत्र में शादी का नकारात्मक प्रभाव होता है। माना जाता है कि एक ही गोत्र से होने के कारण लड़का और लड़की भाई-बहन होते हैं क्योंकि उनके पूर्वज एक ही वंश के होते हैं। इन सभी कारणों से ही पिता के गोत्र में और माता की छह पीढ़ियों में विवाह करने से शास्त्रों में मना किया गया है।

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