Nalanda News : शराब मुक्त समाज के लिए गांव-गांव घूम रहा बिहार का यह थानाध्यक्ष

नालंदा जिले के दीपनगर थानाध्यक्ष मुश्ताक अहमद शराब माफिया के खिलाफ अभियान चलाने के साथ ग्रामीणों को भी कर रहे जागरूक

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अविनाश पांडेय || बिहारशरीफ

बिहार के नालंदा जिले के दीपनगर इंस्पेक्टर सह थानाध्यक्ष मुश्ताक अहमद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नशामुक्त राज्य के सपने को साकार करने में दिन-रात जुटे हुए हैं। वह न केवल शराब माफिया के ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी कर उसकी जड़ें उखाड़ रहे हैं, बल्कि गांव-गांव जाकर लोगों को इस बुराई के प्रति जागरूक भी कर रहे हैं। साथ ही लोगों को शराब छोड़ने की शपथ भी दिला रहे हैं।

इसी कड़ी में रविवार को दीपनगर थानाध्यक्ष मुश्ताक अहमद चकदिलाबर गांव पहुंचे। यहां उन्होंने ग्रामीणों के साथ बैठक की। इसमें लगभग तीन सौ लोग कोविड प्रोटोकॉल का पालन करते हुए शामिल हुए। शराबबंदी से होने वाले फायदों पर केंद्रित इस बैठक में सभी ने थानाध्यक्ष की पूरी बात सुनी और संकल्प लिया कि वे शराब को हाथ नहीं लगाएंगे। साथ ही दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित और जागरूक करेंगे। उन्होंने थानाध्यक्ष को विश्वास दिलाया कि वे अपने गांव को पूरे बिहार का रोल मॉडल बनाएंगे।

आत्मा और शरीर, दोनों का नाश करती है शराब

नालंदा के चकदिलाबर गांव में लोगों के साथ बैठक करते दीपनगर के थानाध्यक्ष मुश्ताक अहमद। फोटो : senani.in

बैठक में मुश्ताक अहमद ने कहा कि हमें मिल-जुलकर नशा मुक्त समाज बनाना है। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने भी संदेश दिया था कि शराब आत्मा और शरीर दोनों का नाश करती है। उन्होंने लोगों से अपील की कि सभी लोग राज्य सरकार के शराबबंदी कानून का सख्ती से पालन करें, जिससे हमारा, हमारे समाज व परिवार का सर्वांगीण विकास हो सके। उन्होंने इसके लिए खासतौर पर महिलाओं से आगे आने की अपील की। कहा कि घर-परिवार की बागडोर महिलाओं के हाथ में होती है। महिलाएं अगर जागरूक हो जाएं तो पूरा घर नशे की गिरफ्त से बाहर आ सकता है। कहा कि नशा समाज में फैला अभिशाप है। हम लोगों को इस अभिशाप को जड़ से मिटाना होगा।

युवाओं को बचाना होगा नशे से

थानाध्यक्ष मुश्ताक अहमद ने कहा कि शराब का सबसे बड़ा शिकार आज युवा वर्ग हो रहा है, जो हमारे देश और समाज की सबसे बड़ी शक्ति है। इस शक्ति में आज नशा घुल रहा है। इसलिए नशे की आदतों से दूर रहना चाहिए। नशे से हमें कुछ भी हासिल नहीं होता। यह हमारे स्वास्थ्य को धीरे-धीरे बीमारियों की ओर ले जाता है। छोटी-मोटी बीमारियां नहीं, बल्कि कैंसर जैसी घातक बीमारी भी शराब से होती हैं। नशा करने से शारीरिक, मानसिक व आर्थिक हानि होती है। समाज की भलाई के लिए नशा रोकना आवश्यक है। इस अवसर पर उन्होंने ग्रामीणों को राज्य सरकार की पुनर्वास योजना के बारे में विस्तार से बताया और इसका लाभ उठाने की अपील की।

जागरूकता के लिए कमेटी का गठन, महिलाओं को बागडोर

मुश्ताक अहमद ने इस अवसर पर शराब के खिलाफ जागरूकता के लिए गांव में एक कमेटी का भी गठन किया। इसमें महिलाओं को भी शामिल किया गया। थानाध्यक्ष ने बताया कि यह कमेटी गांव में घूम-घूमकर ग्रामीणों को नशामुक्ति का संदेश देगी। शराब के सेवन से होने वाले नुकसान के बारे में जानकारी देगी। इसके अलावा यह कमेटी जागरूकता अभियान चलाकर अपने गांव को नशामुक्त बनाने के लिए निरंतर जुटी रहेगी। स्थानीय ग्रामीणों ने खासकर महिलाओं ने दीपनगर थानाध्यक्ष मुश्ताक अहमद को इस बेहतर कार्य के लिए धन्यवाद दिया। साथ ही नशे के नाश का संकल्प दोहराया।

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बिहार में शराब रखना और पीना दोनों प्रतिबंधित

बिहार की नीतीश सरकार ने राज्य में शराब रखने या पीने पर पूरी तरह रोक लगा रखी है। सरकार के बिहार मद्यनिषेध एवं उत्पाद कानून के अनुसार अगर कोई व्यक्ति अपने घर या परिसर में किसी को नशे की अनुमति देता है या कहीं कोई नशे में पाया जाता है, किसी जगह शराब या किसी अन्य मादक पदार्थ का सेवन करते मिला तो ऐसी स्थिति में पकड़े जाने पर पांच से सात साल की सजा होगी। साथ ही दस लाख रुपये तक जुर्माने का भी प्रावधान है। यही नहीं, शराब पीकर उपद्रव करने पर आजीवन कारावास की सजा तक संभव है। इसी प्रतिबंध का फायदा उठाने और मोटा मुनाफा कमाने में देशभर के शराब माफिया लगे रहते हैं। ऐसे में दीपनगर थानाध्यक्ष मुश्ताक अहमद ने यह अभियान चला रखा है।

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