विश्व जनसंख्या दिवस पर विशेष : जागरूकता की कमी से बढ़ रही आबादी

‘अधिकार और चयन है उत्तर : चाहे जनसंख्या विस्फोट हो या न हो, प्रजनन स्वास्थ्य और अधिकार से आएगी प्रजनन दर में कमी’ है इस वर्ष की थीम

बिहार के नालंदा जिले में 72.3 प्रतिशत विवाहित महिलाएं ही करती हैं गर्भनिरोधक साधनों का इस्तेमाल

अविनाश पांडेय || बिहारशरीफ

कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामलों ने अन्य स्वास्थ्य सेवाओं के साथ देश की आर्थिक एवं सामाजिक विकास की कई योजनाओं को बाधित किया है। इनके बीच देश की बढ़ती आबादी भी एक बड़ी चुनौती है। इसके प्रति आम लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से प्रत्येक वर्ष 11 जुलाई को विश्व जनसंख्या दिवस मनाया जाता है।

कोरोना के मद्देनजर इस वर्ष ‘अधिकार और चयन है उत्तर : चाहे जनसंख्या विस्फोट हो या न हो, प्रजनन स्वास्थ्य और अधिकार से आएगी प्रजनन दर में कमी’ को थीम बनाया गया है, ताकि कोरोना के बीच परिवार नियोजन सेवाओं की अनदेखी नहीं हो सके।

31 जुलाई तक जनसंख्या स्थिरता पखवाड़ा

नालंदा के सिविल सर्जन डॉ. सुनील कुमार ने बताया कि समुदाय में गर्भ निरोधक साधनों के इस्तेमाल से जुड़ी भ्रांतियों को दूर करने की जरूरत है। स्वास्थ्य विभाग अपने स्तर से समय-समय पर गर्भनिरोधकों के इस्तेमाल के फायदों को जनमानस तक पहुंचाने के लिए जागरूकता अभियान चला रहा है। स्वास्थ्य विभाग के चिकित्सक और कर्मचारी अपने स्तर से समुदाय में जागरूकता फैलाने का हर संभव प्रयास कर रहे हैं। कोविड-19 महामारी के बीच प्रजनन व मातृ स्वास्थ्य का ध्यान रखने के उद्देश्य से नालंदा जिले में 11 जुलाई से 31 जुलाई तक जनसंख्या स्थिरता पखवाड़े का आयोजन किया जाना है। इस दौरान चिन्हित किए गए लाभार्थियों को परिवार नियोजन की सुविधाएं मुहैया करायी जाएंगी। प्रजनन एवं मातृ स्वास्थ्य को प्रभावित करने वाले वजहों की जानकारी लोगों तक पहुंचाने के लिए जनसंख्या स्थिरता पखवाड़े का महत्व बढ़ जाता है।

अब भी महिलाओं पर ही निर्भर है जनसंख्या नियंत्रण

प्रतीकात्मक तस्वीर

राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे 5 के मुताबिक नालंदा जिले में 15 से 49 वर्ष की 72.3 प्रतिशत विवाहित महिलाएं ही गर्भनिरोधक साधनों का इस्तेमाल करती हैं। जबकि, गर्भनिरोध के आधुनिक तरीकों का इस्तेमाल 52.4 प्रतिशत महिलाओं तक ही है। जिले में महिला बंध्याकरण का प्रतिशत 37.8 है, जबकि पुरुष नसबंदी का प्रतिशत 0.2 है। पुरुष बंध्याकरण को स्वास्थ्य विभाग योजनाओं के माध्यम से बढ़ावा दे रहा है। कॉपर टी का इस्तेमाल करने वाली महिलाएं 0.6 प्रतिशत हैं। जबकि, गर्भनिरोधक गोलियों का इस्तेमाल 2.5 प्रतिशत महिलाएं ही करती हैं। एक प्रतिशत से भी कम पुरुष ही कंडोम का इस्तेमाल करते हैं। कुल मिलाकर, जनसंख्या नियंत्रण महिलाओं पर ही निर्भर है।

बास्केट ऑफ च्वाइस की ले सकते हैं मदद

आपदा काल में भी परिवार नियोजन की चाहत रखने वाले लोग सरकारी योजनाओं का लाभ ले सकते हैं। मिशन परिवार विकास के तहत परिवार नियोजन की तमाम सुविधाएं मौजूद होती हैं। गर्भनिरोधकों के बॉस्केट ऑफ च्वाइस की मदद से स्वास्थ्यकर्मी लाभार्थियों को परामर्श देते हैं। इस बॉस्केट ऑफ च्वाइस में इच्छुक दंपति कंडोम, छाया व माला एन गर्भनिरोधक गोली, कॉपर टी, अंतरा इंजेक्शन आदि की जानकारी लेकर उसे अपना सकते हैं। साथ ही स्वास्थ्य केंद्रों पर पुरुषों व महिलाओं के लिए नसबंदी व बंध्याकरण की सेवा निशुल्क मुहैया कराई जाती है।

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