Nalanda News : बिहारशरीफ शहर की यातायात व्यवस्था पर कांग्रेस जिलाध्यक्ष ने उठाए सवाल

कहा-यातायात व्यवस्था को दुरुस्त करने के बाद ही जनता से हर्जाना या जुर्माना ले सकते हैं अधिकारी

अविनाश पांडेय || बिहारशरीफ

कांग्रेस के जिला अध्यक्ष दिलीप कुमार ने हेलमेट, लाइसेंस और प्रदूषण सर्टिफिकेट के नाम पर वाहन चालकों से वसूली और चालान को अमानवीय बताया है।

यहां जारी बयान में दिलीप कुमार ने कहा कि इस कोरोना काल में जब जनता भोजन के लिए मोहताज है और बीमारी से त्रस्त है, नगर निगम बिहारशरीफ एवं जिला प्रशासन नालंदा द्वारा हेलमेट, ड्राइविंग लाइसेंस एवं प्रदूषण के नाम पर जांच कर दोपहिया वाहन वालों से करोड़ों रुपये की उगाही की गई है। जबकि, सबकी आंख के सामने बिहारशरीफ नगर निगम सीमा में चल रहे 25 फीसद ऑटो और ई रिक्शा में नंबर नहीं है। 50% ऑटो बिना फिटनेस के चल रहे हैं। 50% ऑटो ड्राइवर बिना लाइसेंस के सड़कों पर चल रहे हैं।

पहले इन कमियों को करें दूर

कांग्रेस जिलाध्यक्ष दिलीप कुमार ने कहा कि बिहारशरीफ नगर निगम की सड़कों पर रोक के बावजूद दिनभर बालू लदे ट्रैक्टर बिना नंबर प्लेट के चलते रहते हैं। उनसे कोई जुर्माना वसूला नहीं जाता है। जगह-जगह सड़क गड्ढे में तब्दील है। दर्जनों घटनाएं प्रतिदिन बिहार शरीफ की सड़कों पर घट रही हैं। ई रिक्शा चालक एवं ऑटो पलट जा रहे हैं। इस पर जिला प्रशासन का कोई ध्यान नहीं है। यातायात पुलिस एवं जिला प्रशासन को यह भी बताना चाहिए कि पूरे नगर निगम क्षेत्र में करीब करीब 32 चौराहे ऐसे हैं, जहां हमेशा जाम की स्थिति बनी रहती है। उन जगहों पर यातायात यानी ट्रैफिक पुलिस की वर्दी पहनकर कितने लोग ड्यूटी में रहते हैं? यदि नहीं तो क्या सिर्फ जुर्माना वसूलना ही यातायात थाने का काम है? आप अपनी यातायात व्यवस्था को दुरुस्त करने के बाद ही जनता से हर्जाना या जुर्माना ले सकते हैं।

व्यवस्था सुधारने के लिए कांग्रेस जिलाध्यक्ष के सुझाव

कांग्रेस जिलाध्यक्ष ने कहा कि शहर में 10 जुलाई से नो पार्किंग स्थल से चार चक्का एवं दो चक्का गाड़ियों को उठाकर थाने ले जाकर जबरन उनसे जुर्माना भरवाने का फैसला कहीं से भी उचित प्रतीत नहीं होता है। नगर निगम प्रशासन एवं जिला प्रशासन को सर्वप्रथम यह बताना चाहिए कि पूरे बिहार शरीफ में पार्किंग जोन यानी नगर निगम द्वारा पार्किंग स्थल कहां दिया गया है? अगर पार्किंग स्थल नहीं दिया गया है तो नो पार्किंग जोन का सवाल ही नहीं उठता है। नगर निगम प्रशासन और जिला प्रशासन का अगर पैसा वसूली का इरादा है तो सबसे पहले कलेक्ट्रेट के बाहर लगी दोनों साइड की गाड़ियों को उठाया जाए। किसी भी बैंक के पास अपना पार्किंग स्थल नहीं है। सभी बैंक के पास से सभी गाड़ियों को उठाया जाए। आम जनता के लिए पार्किंग जोन बनाया जाए। ठेले वालों के लिए वेंडर जोन बनाया जाए। ऑटो रिक्शा चालकों के लिए टेंपो स्टैंड बनवाया जाए। अलग से ई-रिक्शा चालकों के लिए भी उनके ठहराव का स्थान निर्धारित किया जाए। यह व्यवस्था जरूर करनी चाहिए कि आखिर गाड़ी के मालिक गाड़ी को कहां पार्क करें? कहीं न कहीं, इसकी व्यवस्था जिला प्रशासन और नगर निगम प्रशासन की बनती है।

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