समय चक्र

समय चक्र चलता रहता
है एक गति से लगातार

कोई प्रलय हो या सृजन
सदा रहे एक सी रफ्तार

जन्म और मृत्यु के क्रम से
भी रहता सदा अविचलित

क्रूर निर्मम रवैया इसका
जग में उक्ति यह प्रचलित

समय के साथ जो कोई भी
बैठा सका उचित तालमेल

जीवन पथ पर अग्रसर रही
उसकी सफलताओं की रेल

रेत सा फिसलता समय बता
गए हैं साधु संत और संन्यासी

समय संग जो कदम ताल करे
वो पाए दुनिया की शाबाशी

-उमेश शुक्ल
वरिष्ठ पत्रकार एवं शिक्षक, झांसी, 6392349117

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