नेताओं का षट् राग

सियासत में जारी है सतत
दो और तीन का गुणा भाग

पर देश और प्रदेश के हिस्से
में बस नेताओं का षट् राग

दल बदलुओं की ही तो
मौज बता रहे हैं हालात

जनता खड़ी यूं ही ठगी
सी मल रही दोनों हाथ

नेता कोई भी बने बदलेंगे
नहीं सामाजिक परिदृश्य

हर नेता को बस अपनी फिक्र
तो कैसे बदले क्षेत्र का भविष्य

खाने मौज उड़ाने तक ही सब
माननीयों के सपनों की उड़ान

उनके कुकर्मों का ही फल भोग
रहा है आज समूचा हिंदुस्तान

-उमेश शुक्ल
वरिष्ठ पत्रकार एवं शिक्षक, झांसी, 6392349117

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