10 जून को लग रहा साल का पहला सूर्यग्रहण, जानें भारत में क्या होगा असर

पंद्रह दिन के भीतर लगने जा रहा दूसरा ग्रहण, इससे पहले 26 मई को लगा था चंद्रग्रहण

senani.in

सोनाली सिंह || लखनऊ

साल 2021 का दूसरा ग्रहण सूर्यग्रहण होगा, जो 10 जून को लग रहा है। भारत में इसका आंशिक असर केवल मिजोरम और अरुणाचल प्रदेश में देखने को मिलेगा, लेकिन सूतक यहां भी नहीं लगेगा। इस तरह से देखा जाए तो इस ग्रहण का भारत पर कोई असर नहीं पड़ेगा। इससे पहले साल का पहला ग्रहण चंद्रग्रहण था, जो 26 मई को लगा था, लेकिन यह चूंकि भारत में नहीं दिखा था, इसलिए इसका भी सूतक नहीं लगा था।

ज्योतिषाचार्य डॉ. सुधानंद झा कहते हैं कि इस साल कुल चार ग्रहण लगने हैं। इनमें दो सूर्यग्रहण और दो चंद्रग्रहण शामिल हैं। पहला चंद्रग्रहण 26 मई को लगा था। दूसरा चंद्रग्रहण 19 नवंबर 2021 को लगेगा। इसी तरह पहला सूर्यग्रहण 10 जून और दूसरा सूर्यग्रहण चार दिसंबर 2021 को लगेगा।

सूर्यग्रहण की प्रतीकात्मक तस्वीर

भारत में इसलिए नहीं होगा असर

ज्योतिषाचार्य डॉ. सुधानंद झा कहते हैं कि 10 जून को लगने जा रहे सूर्यग्रहण का सूतक भारत में नहीं लगेगा। आचार्य के अनुसार यह साल का पहला सूर्यग्रहण है। यह अरुणाचल और मिजोरम के कुछ हिस्सों में दिखाई देगा। लेकिन, सूतक इन दोनों राज्यों में भी नहीं लगेगा।

वट सावित्री और शनि जन्मोत्सव की पूजा पर नहीं पड़ेगा असर

आचार्य का कहना है कि सूर्यग्रहण का असर न होने और सूतक काल न माने जाने की वजह से 10 जून के दिन पड़ने वाले दो त्योहारों वट सावित्री और शनि जन्मोत्सव को मानाने पर भी कोई रोक नहीं होगी। इस दिन पूजा-पाठ पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

इन देशों में दिखेगा सूर्यग्रहण

10 जून को लगने वाला सूर्यग्रहण दोपहर एक बजकर 42 मिनट पर शुरू होकर, शाम 6 बजकर 41 मिनट पर खत्म होगा। ये ग्रहण मुख्य रूप से उत्तरी अमेरिका, यूरोप और एशिया में आंशिक तथा उत्तरी कनाडा, ग्रीनलैंड और रूस में पूर्ण रूप से दिखाई देगा। ये एक वलयाकार सूर्यग्रहण होगा। इसलिए इन देशों में सूर्यग्रहण का सूतक लगेगा।

26 मई को लगेगा साल का पहला चंद्रग्रहण, भारत में इसलिए नहीं लगेगा सूतक

भारत में नहीं करना होगा सूतक के नियमों का पालन

शास्त्रों के अनुसार ग्रहण की प्रक्रिया को शुभ नहीं माना जाता है। पूर्ण ग्रहण लगने पर सूतक के नियमों का पालन किया जाता है। इस दौरान मंदिरों के कपाट बंद कर दिए जाते हैं। साथ ही इस समय में कोई शुभ कार्य नहीं किया जाता है। इस दौरान पूजा-पाठ भी नहीं किया जाता। गर्भवती स्त्रियों को शास्त्रों के अनुसार सूतक काल में विशेष सतर्कता बरतनी पड़ती है। ग्रहण का जब किसी देश में आंशिक असर होता है और उसका सूतक नहीं लगता तो उसे उपच्छाया कहते हैं। इस साल लगने वाले चारों ग्रहण का भारत में सूतक नहीं लगेगा। यानी, भारत के लिए साल के चारों ग्रहण उपच्छाया होंगे। इन चारों ग्रहण में सूतक के नियमों का पालन नहीं करना होगा।

सूर्यग्रहण की प्रतीकात्मक तस्वीर

इसलिए लगते हैं सूर्य और चंद्रग्रहण

वैज्ञानिकों के अनुसार जब चंद्रमा, पृथ्वी और सूर्य के बीच आ जाता है तो चंद्रमा के पीछे सूर्य का बिम्ब कुछ समय के लिए ढंक जाता है। इस खगोलीय घटना को
सूर्यग्रहण कहते हैं। इसी तरह जब सूर्य और चांद के बीच पृथ्वी आ जाती है और चांद पर प्रकाश पड़ना बंद हो जाता है तो चंद्रग्रहण लगता है।

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