कोरोना वैक्सीन : महाराष्ट्र की सरकारी कंपनी हैफकाइन बायोफार्मा बनाएगी कोवैक्सिन की 22.8 करोड़ डोज

वैक्सीन का घरेलू उत्पादन बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार ने उठाए कदम

भारत बायोटेक के साथ प्रौद्योगिकी हस्तांतरण व्यवस्था के तहत हैफकाइन बायोफार्मा करेगी कोवैक्सिन की खुराक का उत्पादन

senani.in || डिजिटल डेस्क

देश की 130 करोड़ की आबादी को जल्द से जल्द कोरोना वैक्सीन उपलब्ध कराने के लिए केंद्र सरकार युद्ध स्तर पर काम कर रही है। इसी क्रम में केंद्र सरकार ने महाराष्ट्र की सरकारी कंपनी हैफकाइन बायोफार्मा को प्रौद्योगिकी हस्तांतरण कराकर स्वदेशी कोरोना वैक्सीन कोवैक्सिन की 22.8 करोड़ डोज तैयार कराने का फैसला किया है।

कोरोना की स्वदेशी वैक्सीन कोवैक्सिन का उत्पादन बढ़ाने के लिए केंद्र का जैव प्रौद्योगिकी विभाग आत्मनिर्भर भारत 3.0 मिशन कोविड सुरक्षा के तहत तीन सार्वजनिक उद्यमों को मदद कर रहा है। ये उद्यम हैं-

  1. हैफकाइन बायोफर्मास्यूटिकल कॉर्पोरेशन लिमिटेड, मुंबई,
  2. इंडियन इम्यूनोलॉजिकल लिमिटेड, हैदराबाद
  3. भारत इम्यूनोलॉजिकल एंड बायोलॉजिकल लिमिटेड, बुलंदशहर, उत्तर प्रदेश

परेल स्थित काम्प्लेक्स में बनेगा टीका

कंपनी का परिसर फोटो क्रेडिट : पीआइबी हिंदी

हैफकाइन बायोफार्मा, 122 साल पुराने हैफकाइन इंस्टीट्यूट की एक शाखा के रूप में महाराष्ट्र राज्य का सार्वजनिक संस्थान है। यह भारत बायोटेक लिमिटेड, हैदराबाद के साथ प्रौद्योगिकी हस्तांतरण व्यवस्था के तहत कोरोना का स्वदेशी टीका कोवैक्सिन बनाने के लिए तैयारी कर रहा है। टीके का उत्पादन कंपनी के परेल स्थित कॉम्प्लेक्स में होगा।

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केंद्र और महाराष्ट्र सरकार ने दी आर्थिक मदद

कंपनी की योजना के बारे में जानकारी देते अधिकारी। फोटो क्रेडिट : पीआइबी हिंदी

हैफकाइन बायोफार्मा के प्रबंध निदेशक डॉ. संदीप राठौड़ ने कहा कि कंपनी का एक साल में कोवैक्सिन की 22.8 करोड़ खुराक उत्पादन करने का प्रस्ताव है। उन्होंने बताया कि कोवैक्सिन के उत्पादन के लिए हैफकाइन बायोफार्मा को केंद्र द्वारा 65 करोड़ रुपये और महाराष्ट्र सरकार द्वारा 94 करोड़ रुपये का अनुदान मिला है।

युद्ध स्तर पर चल रही तैयारी

डॉ. संदीप राठौड़ ने कहा कि हमें आठ महीने का समय दिया गया है। इसलिए काम को युद्ध स्तर पर अंजाम दिया जा रहा है। चिकित्सक से आइएएस बने राठौड़ ने बताया कि वैक्सीन उत्पादन प्रक्रिया में दो चरण शामिल हैं। दवा का पदार्थ बनाना और इसके बाद दवा उत्पादन। दवा का पदार्थ बनाने के लिए हमें बायो सेफ्टी लेवल 3 (बीएसएल 3) सुविधा बनाने की जरूरत है, जबकि हैफकाइन में पहले से ही फिल फिनिश की सुविधा उपलब्ध है। बीएसएल 3 एक सुरक्षा मानक है, जो ऐसी सुविधाओं पर लागू होता है, जहां काम में रोगाणु शामिल होते हैं और जो श्वसन मार्ग से शरीर में प्रवेश कर गंभीर बीमारी का कारण बन सकते हैं।

कंपनी के पास हैं आधुनिक संसाधन फोटो क्रेडिट : पीआइबी हिंदी

टीकों की उत्पादन क्षमता में होगी वृद्धि

बायोटेक्नोलॉजी विभाग की सचिव तथा बायोटेक्नोलॉजी इंडस्ट्री रिसर्च असिस्टेंस काउन्सिल की अध्यक्ष डॉ. रेणू स्वरूप कहती हैं कि सार्वजनिक क्षेत्र की संपत्ति का उपयोग कर वैक्सीन उत्पादन की क्षमता बढ़ाने से हमारे देश में बड़े पैमाने पर टीकाकरण अभियान के लिए टीकों की उत्पादन क्षमता वृद्धि का एक लंबा रास्ता तय होगा।

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