वह दिन दूर नहीं जब यूपी-बिहार में भी लहलहाएंगे सेब के बाग

हिमाचल के बिलासपुर जिले के किसान हरिमन शर्मा द्वारा विकसित कम ठंडक (लो-चिलिंग) की जरूरत वाली सेब की नई किस्म एचआरएमएन-99 ने गर्म जलवायु वाले 23 राज्यों में भी फल देना शुरू किया

senani.in || डिजिटल डेस्क

मीठे व रसीले सेब की खेती अब हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और उत्तराखंड के अत्यधिक ठंडे इलाकों तक ही सीमित नहीं रहेगी। अगले कुछ वर्षों में यूपी, बिहार, पश्चिम बंगाल जैसे गर्म जलवायु वाले राज्यों में भी सेब के बाग लहलहाएंगे। इसकी शुरुआत हो चुकी है। यूपी, बिहार समेत 23 राज्यों में प्रारंभिक परीक्षण में उत्साहजनक नतीजे आए हैं। इनमें से कुछ राज्यों में तो सेब की व्यवसायिक खेती भी शुरू हो गई है।

हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिले के पनियाला गांव के प्रगतिशील किसान हरिमन शर्मा ने सेब की नई किस्म एचआरएमएन-99 विकसित की है। सेब की इस नई किस्म में फूल आने और फल लगने के लिए लंबी अवधि तक ठंडक (एक हजार चिलिंग ऑवर) की जरूरत नहीं होती। इस किस्म का प्रसार भारत के विभिन्न मैदानी, उष्णकटिबंधीय और उपोष्णकटिबंधीय इलाकों में हो गया है, जहां गर्मी के मौसम में तापमान 40-45 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है।

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कर्नाटक, छत्तीसगढ़ और तेलंगाना में शुरू हो चुकी व्यावसायिक खेती

सेब की इस किस्म की व्यावसायिक खेती मणिपुर, जम्मू, हिमाचल प्रदेश के निचले इलाकों, कर्नाटक, छत्तीसगढ़ और तेलंगाना में शुरू की गई है। साथ ही अब तक कुल 23 राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों में सेब की इस नई किस्म के पौधों में फल लगने लगे हैं। इससे न केवल इन राज्यों के हजारों किसानों, बल्कि हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर और निचले पहाड़ी जिलों, जहां के लोग पहले कभी सेब उगाने का सपना नहीं देख सकते थे, वहां के बागवानों के लिए भी हरिमन शर्मा प्रेरणा स्रोत बन गए हैं।

एक ही बाग में आम और सेब की खेती

बचपन में ही अनाथ हो चुके हरिमन शर्मा को उनके चाचा ने गोद लिया और उनका पालन-पोषण किया। उन्होंने दसवीं कक्षा तक पढ़ाई की। उसके बाद खुद को खेती के लिए समर्पित कर दिया, जोकि उनकी आय का मुख्य स्रोत है। बागवानी में उनकी रुचि ने उन्हें सेब, आम, अनार, कीवी, बेर, खुबानी, आड़ू और यहां तक कि कॉफी जैसे विभिन्न फल उगाने के लिए प्रेरित किया। उनकी खेती का सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि वो एक ही खेत में आम के साथ सेब भी उगा सकते हैं। उनका मानना है कि किसान हिमाचल प्रदेश की निचली घाटियों और अन्य जगहों पर भी सेब के बाग लगाना शुरू कर सकते हैं।

प्रतीकात्मक तस्वीर

सेब की नई किस्म का हरिमन शर्मा ने ऐसे किया आविष्कार

वर्ष 1998 में हरिमन शर्मा ने बिलासपुर के घुमारवीं गांव से खाने के लिए कुछ सेब खरीदे थे। सेब खाने के बाद उसके बीज को उन्होंने अपने घर के पिछवाड़े में फेंक दिया था। अगले साल वर्ष 1999 में उन्होंने अपने घर के पिछवाड़े में एक सेब का अंकुर देखा, जोकि पिछले वर्ष उनके द्वारा फेंके गए बीजों से विकसित हुआ था। बागवानी में गहरी रुचि रखने वाले एक प्रयोगधर्मी किसान होने के नाते, उन्होंने यह समझ लिया कि समुद्र तल से 18 सौ फीट की दूरी पर स्थित पनियाला जैसे गर्म स्थान पर उगने वाला सेब का यह पौधा असाधारण है। एक साल बाद वह पौधा खिलना शुरू हो गया और उन्होंने वर्ष 2001 में उसमें फल लगा देखा। उन्होंने इस पौधे को ‘मदर प्लांट’ के रूप में संरक्षित किया और इसके कलम (युवा कली) को ग्राफ्ट कर प्रयोग करना शुरू किया। वर्ष 2005 तक सेब के पेड़ों का एक छोटा बाग बनाया, जिनमें फल लगना अब भी जारी है।

एनआईएफ ने जताया भरोसा

वर्ष 2007 से 2012 तक, हरिमन ने हिमाचल प्रदेश में घूम-घूमकर लोगों को यह विश्वास दिलाया कि कम ठंडक (लो–चिलिंग) वाली परिस्थितियों में भी सेब उगाना अब असंभव नहीं है। हालांकि, उस समय सेब की इस किस्म के बारे में अनुसंधान और प्रसार में ज्यादा दिलचस्पी नहीं दिखाई गई। आखिरकार, नेशनल इनोवेशन फाउंडेशन (एनआईएफ), जोकि भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) की एक स्वायत्त निकाय है, ने सेब की इस नई किस्म को ढूंढा। एनआईएफ ने इसकी शुरुआत करने वाले किसान के दावों की पुष्टि की और आण्विक एवं विविधता विश्लेषण अध्ययन तथा फलों की गुणवत्ता परीक्षण के जरिये सेब की इस किस्म की विशिष्टता और क्षमता का मूल्यांकन किया।

सेब के बाग की प्रतीकात्मक तस्वीर

…और बढ़ता गया कारवां

एनआईएफ ने पौध किस्म संरक्षण और किसान अधिकार अधिनियम, 2001 के तहत सेब की इस किस्म के पंजीकरण में सहायता के अलावा इसकी नर्सरी की स्थापना और इसके प्रसार के लिए वित्तीय और तकनीकी सहायता भी प्रदान की। वर्ष 2014-2019 के दौरान दो हजार से अधिक किसानों के खेतों और राष्ट्रपति भवन सहित 30 राज्यों के 25 संस्थानों में 20 हजार से अधिक पौधे रोपकर एनआईएफ द्वारा देशभर के कम ठंडक वाले इलाकों में सेब की इस किस्म का बहु-स्थान परीक्षण किया गया। अब तक 23 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से इन पौधों में फल लगने के बारे में सूचना मिली है।

इन राज्यों में सेब के पौधों में आए हैं फल

बिहार, झारखंड, मणिपुर, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात, दादरा एवं नगर हवेली, कर्नाटक, हरियाणा, राजस्थान, जम्मू एवं कश्मीर, पंजाब, केरल, उत्तराखंड, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, पश्चिम बंगाल, उड़ीसा, पुदुच्चेरी, हिमाचल प्रदेश और दिल्ली।

हर पौधे से 75 किलो तक फल का उत्पादन

आगे के विश्लेषण और शोध के दौरान, यह पाया गया कि एचआरएमएन-99 के तीन से आठ साल की उम्र के पौधों ने हिमाचल प्रदेश, सिरसा (हरियाणा) और मणिपुर के चार जिलों में प्रति वर्ष प्रति पौधा पांच से 75 किलोग्राम फल का उत्पादन किया। सेब की अन्य किस्मों की तुलना में यह आकार में बड़ा होता है तथा परिपक्वता के दौरान बहुत नरम, मीठा और रसदार गूदा वाला होता है। सेब की इस किस्म में पीले रंग की त्वचा पर लाल रंग की धारी होती है।

मणिपुर के किसान सबसे आगे

प्रतीकात्मक तस्वीर

एनआईएफ द्वारा अन्य संस्थानों के साथ मिलकर वर्ष 2015 में मणिपुर के बिष्णुपुर, सेनापति, काकचिंग जिलों के आठ अलग-अलग स्थानों पर छब्बीस किसानों के खेतों में इस किस्म की व्यावसायिक खेती शुरू की गई, जिसके लिए किसानों को सेब की सफल खेती के लिए प्रशिक्षण प्रदान किया गया। मणिपुर के एक किसान को एचआरएमएन-99 सेब की खेती को अपनाने के क्रम में उसके उत्कृष्ट कार्य के लिए विभिन्न मंचों पर पहचान मिली है। मणिपुर में चल रही सफलता का लाभ उठाते हुए दो सौ और किसानों ने व्यावसायिक रूप से इस किस्म को अपनाया है। इसके साथ ही राज्य में एचआरएमएन-99 सेब की किस्म के 20 हजार से अधिक पौधे उगाए जा रहे हैं। जम्मू, हिमाचल प्रदेश के निचले इलाकों, कर्नाटक, छत्तीसगढ़ और तेलंगाना में भी इस किस्म को व्यावसायिक रूप से अपनाने की शुरुआत की गई है।

नॉर्थ ईस्टर्न काउंसिल से समझौता

नॉर्थ ईस्टर्न काउंसिल (एनईसी), डोनर मंत्रालय, भारत सरकार के तहत नॉर्थ ईस्टर्न रीजन कम्युनिटी रिसोर्स मैनेजमेंट प्रोजेक्ट (एनईआरसीओआरएमपी) और एनआईएफ ने नवंबर 2020 में एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किया। इसके पहले चरण में, जनवरी 2021 के दौरान सेब की इस किस्म के 15 हजार कलम अरुणाचल प्रदेश, असम, मणिपुर और मेघालय में प्रत्यारोपित किए गए हैं।

हरिमन शर्मा को राष्ट्रपति कर चुके पुरस्कृत

नौवें राष्ट्रीय द्विवार्षिक ग्रासरूट इनोवेशन एंड आउटस्टैंडिंग ट्रेडिशनल नॉलेज अवार्ड्स के दौरान वर्ष 2017 में हरिमन शर्मा को तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी द्वारा राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रीय पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया।

अभी एक हजार चिलिंग ऑवर जरूरी

प्रतीकात्मक तस्वीर

अभी तक सेब की खेती हिमाचल प्रदेश, जम्मू कश्मीर और उत्तराखंड के अत्यधिक ऊंचाई वाले उन इलाकों, जहां बर्फबारी होती है, में ही होती है। हिमाचल में शिमला और उससे ऊपर के इलाकों में जहां दिसंबर से मार्च तक बर्फबारी होती है, वहीं सेब की खेती होती है। इन इलाकों में एक हजार घंटे चिलिंग ऑवर (घंटे), यानी एक हजार घंटे तक जहां तापमान तीन से सात डिग्री सेल्सियस रहता हो और बर्फबारी होती है, वहीं सेब की पैदावर अच्छी होती है। लेकिन, हरिमन शर्मा द्वारा विकसित सेब की नई किस्म एचआरएमएन-99 से 40 से 45 डिग्री सेल्सियस तापमान पर भी अच्छी पैदावार हो रही है। अभी तक यूपी-बिहार और इनसे सटे राज्यों में इतना चिलिंग ऑवर न होने के कारण ही सेब की खेती नहीं होती थी। अब यह समस्या दूर हो चुकी है।

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