पीपीई किट और मास्क का बार-बार किया जा सकेगा उपयोग

मुम्बई की एक स्टार्टअप कंपनी इंद्र जल (वाटर) ने विकसित की वज्र कवच नाम की विसंक्रमण (डिसइनफैक्शन) मशीन

पीपीई किट व मास्क पर आए कोरोना वायरस और बैक्टीरिया को पूरी तरह खत्म कर बार-बार इस्तेमाल लायक बनाती है यह मशीन

senani.in || डिजिटल डेस्क

अस्पतालों को अब पीपीई किट और मास्क की कमी से नहीं जूझना पड़ेगा। न ही उन्हें इस मद में भारी-भरकम राशि खर्च करनी पड़ेगी। इससे कोरोना मरीजों को भी बिल में कुछ राहत मिलेगी क्योंकि अस्पताल हर मरीज से पीपीई किट और मास्क के लिए अलग से राशि वसूलते हैं।

यह संभव हो पाया है मुम्बई की एक स्टार्टअप कंपनी इंद्र जल (वाटर) द्वारा विकसित एन95 मास्क/पीपीई विसंक्रमण प्रणाली (मशीन) से।

महाराष्ट्र और तेलंगाना के अस्पतालों में भारी मांग

वज्र कवच नाम की यह विसंक्रमण (डिसइनफैक्शन) मशीन पीपीई किट, मास्क और अन्य चिकित्सकीय और गैर चिकित्सकीय किट को पूरी तरह विसंक्रमित यानी उनमें मौजूद कोरोना वायरस को खत्म कर दोबारा इस्तेमाल लायक बना देती है। इस मशीन से बार-बार पीपीई किट और मास्क को विसंक्रमित किया जा सकता है। यह मशीन महाराष्ट्र और तेलंगाना राज्य के कई अस्पतालों में लगाई जा चुकी है। अन्य राज्यों में भी इसकी भारी मांग है।

कोरोना से लड़ने की लागत कम करेगी मशीन

कंपनी के अधिकारी अभिजीत के अनुसार इस मशीन की सहायता से पीपीई किट को विसंक्रमित करने से कोविड महामारी से लड़ने की लागत को काफी कम किया जा सकता है। साथ ही स्वास्थ्यकर्मियों समेत अन्य लोगों को कोरोना संक्रमण से भी बचाया जा सकता है। इससे पर्यावरण स्वच्छ रखने में भी सहायता मिलेगी।

अल्ट्रावायलट किरणों से कोरोना वायरस और अन्य बैक्टीरिया को खत्म करती है मशीन

यह मशीन पीपीई किट में विद्यमान हो जाने वाले कोरोना वायरस व अन्य बैक्टीरिया को यूवी (अल्ट्रा वायलट)–सी प्रकाश स्पेक्ट्रम के माध्यम से 99.999 प्रतिशत तक खत्म कर देती है।

हर महीने 25 मशीनों की आपूर्ति

स्टार्ट-अप इंद्र वाटर को जल क्षेत्र में नए आविष्कार और प्रयोग करने के लिए एसआईएनई- आईआईटी बम्बई के माध्यम से विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग की निधि-प्रयास अनुदान सहायता से शुरू किया गया था। इसने कोविड-19 संक्रमण के विरुद्ध संघर्ष में अपनी प्रौद्योगिकी को संशोधित और परिष्कृत करने के लिए भारत सरकार के विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग की अनुदान सहायता का प्रयोग कोविड-19 संकट के विरुद्ध युद्ध में तेजी लाने के केंद्र (सीएडब्ल्यूएसीएच) का प्रयोग किया। एसआईएनई-आईआईटी बम्बई की सहायता से इस स्टार्टअप ने हर महीने 25 विसंक्रमण मशीनें बनाकर उनकी आपूर्ति करने के लिए अपने आपको तैयार किया है।

सीएसआईआर–एनईईआरआई समेत सभी दिग्गज संस्थानों ने दी मंजूरी

इस प्रणाली को भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान बम्बई (मुम्बई) के जैवविज्ञान एवं जैव अभियांत्रिकी विभाग में परीक्षण के बाद सत्यापित किया जा चुका है। साथ ही इसे विषाणुओं और जीवाणुओं को निष्क्रिय करने में 5 एलओजी (99.999 प्रतिशत) से अधिक प्रभावपूर्ण पाया गया है। इसे सीएसआईआर –एनईईआरआई से भी स्वीकृति मिल चुकी है और यह आईपी55 प्रमाणित भी है। इस प्रणाली को अब सम्पूर्ण भारत में कोविड-19 संक्रमित रोगियों का उपचार करने वाले चिकित्सालयों में स्थापित किया जा रहा है।

अभी एक ही बार होता है पीपीई किट का उपयोग

कोविड अस्पतालों में काम करने वाले डॉक्टरों तथा स्वास्थ्य कर्मियों को खुद को कोरोना वायरस से बचाने के लिए पीपीई किट, मास्क समेत अन्य परिधानों का इस्तेमाल करना पड़ता है। अभी यह पीपीई किट और मास्क एक बार ही इस्तेमाल हो पाते हैं। इसके चलते इन्हें बार-बार खरीदने पर अस्पतालों को भारी-भरकम राशि खर्च करनी पड़ती है, जिसकी वसूली मरीजों से ही की जाती है। अक्सर अस्पतालों के बाहर ये पीपीई किट और मास्क फेंक दिए जाते हैं। इससे वहां से गुजरने वाले लोगों के भी कोरोना संक्रमित होने का खतरा होता है। साथ ही पर्यावरण को भी नुकसान होता है। यह मशीन इन सब परेशानियों से लोगों को बचाएगी। साथ ही कोरोना से लड़ाई में गेम चेंजर साबित होगी।

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