सेनेटरी पैड का इस्तेमाल करेगा संक्रमण से सुरक्षा

विश्व माहवारी स्वच्छता दिवस (28 मई) पर विशेष : माहवारी के दौरान स्वच्छता का ध्यान रखना जरूरी

‘वी नीड टू स्टेप अप, एक्शन एंड इन्वेस्टमेंट इन मेंस्ट्रुअल हेल्थ एंड हाईजीन नाऊ’ है इस वर्ष का थीम

अविनाश पांडेय/बिहारशरीफ

देश निरंतर विकास के पथ पर अग्रसर है। स्वास्थ्य के क्षेत्र में नित्य नए प्रयोगों के माध्यम से लोगों को स्वस्थ रखने की कोशिश की जा रही है। लेकिन, इन सबके बीच लोगों में अब भी माहवारी स्वच्छता पर चुप्पी कायम है। इस दिशा में माहवारी स्वच्छता दिवस पर खुलकर बात करने और लोगों को इसके बारे में जागरूक करने के लिए प्रत्येक वर्ष 28 मई को विश्व माहवारी स्वच्छता दिवस मनाया जाता है। साथ ही माहवारी स्वच्छता सुनिश्चित करने के लिए किशोरियों एवं महिलाओं को सेनेटरी पैड इस्तेमाल करने की जरूरत पर बल दिया जाता है। ‘वी नीड टू स्टेप अप, एक्शन एंड इन्वेस्टमेंट इन मेंस्ट्रुअल हेल्थ एंड हाईजीन नाउ’ को इस वर्ष के थीम के रूप में चुना गया है।

प्रजनन एवं यौन संक्रमण से बचाव जरूरी

नालंदा के जिला अपर मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. राजेन्द्र कुमार राजेश ने बताया कि विश्व मासिक धर्म स्वच्छता दिवस का मकसद समाज को संदेश देना है कि हमारी मां, बहनें व बेटियां मासिक धर्म के दौरान कैसे स्वच्छ और स्वस्थ रहें। मासिक धर्म के दौरान स्वच्छता बहुत जरूरी होती है। इससे प्रजनन एवं यौन संक्रमण की रोकथाम में मदद मिलती है। माहवारी के दौरान यदि लम्बे समय तक स्वच्छता पर ध्यान नहीं दिया जाए तो बच्चेदानी में संक्रमण पहुंच जाता है। इससे गर्भधारण बाधित या खत्म भी हो सकती है।
डॉ. राजेंद्र ने बताया कि किशोरावस्था में शरीर और मस्तिष्क का विकास तेजी से होता है। इन बदलावों को समझने और उसे सकारात्मक रूप से लेने के लिए किशोरों को सही सलाह की बहुत जरूरत होती है। 11 से 12 साल की किशोरियों में मासिक चक्र की शुरुआत होने लगती है। बहुत सारी किशोरियों को माहवारी के दौरान सेनेटरी पैड की जरूरत और महत्व के बारे में सटीक जानकारी नहीं होती है। साथ ही संकोचवश वह इस पर अन्य लोगों से चर्चा भी नहीं कर पाती हैं। यही समय है, जब लड़कियों को इस संबंध में उचित सलाह देकर जागरूक किया जाए। इसको लेकर आशा, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं एएनएम सामुदायिक स्तर पर किशोरियों एवं महिलाओं को निरंतर जागरूक कर रही हैं। साथ ही माहवारी के दौरान असुरक्षित साधनों के इस्तेमाल की जगह सुरक्षित साधन जैसे सेनेटरी पैड के शत-प्रतिशत इस्तेमाल को सुनिश्चित कर रही हैं।

नालंदा जिले में मात्र 64 प्रतिशत महिलाएं करती हैं सेनेटरी पैड का इस्तेमाल

राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-5 के आंकड़ों के अनुसार नालंदा जिले की महिलाएं सेनेटरी पैड के इस्तेमाल के मामले में उदासीन हैं। जिले की मात्र 64.4 प्रतिशत 15 से 24 आयुवर्ग की महिलाएं ही माहवारी के दौरान सेनेटरी पैड का इस्तेमाल करती हैं।

इन बातों का रखें ख्याल

-मासिक धर्म स्वच्छता पर संकोच न करें और इस पर खुलकर बात करें
-सेनेटरी पैड की जगह अन्य कोई असुरक्षित साधन इस्तेमाल न करें
-माताएं किशोरियों को इसके बारे में जानकारी दें
-माहवारी के दौरान असुरक्षित साधन इस्तेमाल स्वास्थ्य के लिए हो सकता है हानिकारक

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