बिहार से ब्रिटेन भेजी गई जीआई प्रमाणित शाही लीची की पहली खेप

केंद्रीय एजेंसी एपीडा की एक और उपलब्धि, इससे पहले एपीडा की पहल एवं निगरानी में त्रिपुरा से कटहल लंदन किया गया था निर्यात

senani.in || डिजिटल डेस्क

बिहार से शाही लीची की इस मौसम की पहली खेप सोमवार को हवाई मार्ग से ब्रिटेन भेजी गई। निर्यात में यह सफलता एपीडा (Agricultural and processed food products export development authority #APEDA) के प्रयासों से मिली है।

शाही लीची के निर्यात के लिए जीआई प्रमाणन पटना में नव स्थापित प्रमाणन सुविधा केंद्र से जारी किया गया। सिरा इंटप्राइजेज नामक कंपनी ने बिहार के मुजफ्फरपुर के बागवानों से प्राप्त कर इस लीची का निर्यात किया। वहीं, लीची का आयात लंदन के एचएंडजे वेज नामक कंपनी कर रहा है। शाही लीची के निर्यात के लिए एपीडा ने बिहार के कृषि विभाग सहित किसानों, निर्यातकों और आयातकों जैसे अन्य हितधारकों के साथ सहभागिता की है।

त्रिपुरा से कटहल की पहली खेप भेजी गई लंदन

निर्यात के अवसरों का पता लगाने की जरूरत

शाही लीची के निर्यात के उपलक्ष्य में आयोजित कार्यक्रम में एपीडा के अध्यक्ष डॉ. एम. अंगमुथु और बिहार के कृषि विभाग के मुख्य सचिव एन. सरवण कुमार सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने हिस्सा लिया। इस अवसर पर अधिकारियों ने कहा कि लीची की जीवन अवधि कम होने से प्रसंस्कृत और मूल्य-वर्धित उत्पादों के लिए निर्यात के अवसरों का पता लगाने की जरूरत है।

लीची बिहार का चौथा उत्पाद, जिसे मिला जीआई प्रमाणन

ऐसी आकर्षक पैकिंग में ब्रिटेन भेजी गई लीची। फोटो साभार : एपीडा का ट्वीटर हैंडल

जरदालू आम, कतरनी चावल और मगही पान के बाद साल 2018 में जीआई प्रमाणन प्राप्त करने वाला शाही लीची बिहार से चौथा कृषि उत्पाद था। शाही लीची के लिए जीआई पंजीकरण मुजफ्फरपुर स्थित लीची ग्रोअर्स एसोसिएशन ऑफ बिहार को दिया गया है।

इन इलाकों की जलवायु, लीची के अनुकूल

बिहार के मुजफ्फरपुर, वैशाली, समस्तीपुर, चंपारण, बेगूसराय जिले और आसपास के क्षेत्रों में शाही लीची की बागवानी के लिए अनुकूल जलवायु है।

चीन के बाद लीची उत्पादन में भारत का दूसरा स्थान

लीची निर्यात में अंतरराष्ट्रीय मानकों का हुआ पालन। फोटो साभार : एपीडा का ट्वीटर हैंडल

चीन के बाद भारत विश्व में लीची का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक है। लीची का पारदर्शी, स्वादिष्ट बीजचोल या खाने योग्य गुदा भारत में एक टेबल फ्रूट के रूप में लोकप्रिय है। वहीं, चीन और जापान में इसे सूखे या डिब्बाबंद रूप में पसंद किया जाता है। बिहार लीची के उत्पादन मामले में अव्वल है। राज्य कृषि-निर्यात योजना तैयार करने में एपीडा, बिहार सरकार को सुविधा प्रदान कर रहा है, जो राज्य से कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए रोड-मैप प्रदान करेगा। राज्य कृषि-निर्यात योजना को अंतिम रूप देने के बाद मखाना, आम, लीची और अन्य फलों एवं सब्जियों की निर्यात क्षमता का उपयोग भी किया जा सकता है। बिहार सरकार एपीडा और अन्य एजेंसियों के सहयोग से सीमा शुल्क निकासी सुविधा, प्रयोगशाला परीक्षण सुविधा, पैक-हाउस और प्री-कूलिंग सुविधाएं, जैसे आवश्यक बुनियादी ढांचे के निर्माण के लिए प्रयास कर रही है, जो राज्य की कृषि निर्यात क्षमता का उपयोग करेगा और इसे बढ़ावा देगा।

22 मई को त्रिपुरा से कटहल की पहली खेप भेजी गई थी लंदन

त्रिपुरा से लंदन भेजे गए कटहल। फोटो साभार : एपीडा का ट्वीटर हैंडल

विभिन्न राज्यों के किसानों को उनके उत्पादों का बेहतर मूल्य दिलाने और उन्हें अंतरराष्ट्रीय बाजार उपलब्ध कराने के लिए केंद्र सरकार ने एपीडा का गठन किया है। यह एजेंसी अपने लक्ष्य में लगातार सफल हो रही है। लीची से पहले 22 मई को एपीडा की पहल पर 1.2 मीट्रिक टन (एमटी) ताजे कटहल की खेप त्रिपुरा से लंदन निर्यात की गई थी।

निर्यात को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास

एपीडा खाद्य उत्पादों के निर्यात, मार्केटिंग रणनीतियों को विकसित करने, मार्केटिंग इंटेलिजेंस, अंतर्राष्ट्रीय अवसर, कौशल विकास, क्षमता निर्माण और उच्च गुणवत्ता वाली पैकेजिंग के लिए लगातार काम कर रहा है। खरीदारों को किसानों से जोड़ने और कृषि उपज की पूरी आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने से उत्तर-पूर्वी क्षेत्र को अतिरिक्त फायदा मिलेगा।

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