नालंदा : कोरोना के मामलों में रिकॉर्ड कमी, 15 से घटकर 3.4 प्रतिशत पर आया संक्रमण

स्वास्थ्य विभाग ने कहा, संक्रमण से उबरे व्यक्तियों को भी सतर्क रहने की जरूरत, हमेशा करें प्रोटोकॉल का पालन

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अविनाश पांडेय/बिहारशरीफ

प्रशासन के प्रयास और जनता का सहयोग आखिर में रंग दिखा रहा है। नालंदा जिले में कोरोना का कहर अब कम होता नजर आ रहा है।

जिला अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. राजेन्द्र कुमार राजेश ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि जिले में अप्रैल माह की तुलना में संक्रमण के नए मामलों में काफी गिरावट दर्ज की गई है। आंकड़ों के अनुसार जहां अप्रैल माह में संक्रमण दर 15-16 प्रतिशत थी, वहीं मई के अंत तक यह कम होकर 3.4 प्रतिशत हो गई है। जो संक्रमित मरीज थे, उनमें से भी अधिकांश ठीक हो चुके हैं और कुछ ठीक होने की दिशा में हैं। जो मरीज होम आइसोलेशन में हैं, उन पर भी विभाग की तरफ से कड़ी निगरानी की जा रही है। जिला स्वास्थ्य विभाग अपनी सारी ताकत लगाकर टीकाकरण अभियान को सफल बनाने के प्रयास में लगा है। लेकिन, यह राहत केवल विभाग के प्रयास का नहीं, बल्कि उसके साथ समुदाय के सहयोग का भी नतीजा है।

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लोगों से सतर्क रहने की अपील

डॉ. राजेश ने बताया कि जब तक संक्रमण पूरी तरह ठीक नहीं होता, तब तक संक्रमित होने की आशंका बरकरार रहेगी। यह ठीक हो चुके मरीजों पर भी लागू होती है। इसलिए यदि आप एक बार संक्रमित होकर स्वस्थ हो चुके हैं तो इसका मतलब यह नहीं कि आप दुबारा संक्रमित नहीं होंगे। इसलिए सतर्क रहें, तभी सुरक्षित रह पाएंगे।

लक्षणों के प्रति न हों असावधान

कोरोना आम सर्दी-जुकाम की तरह नहीं, जो एक दवा लेने या केवल गरम पानी पीने या गरारे से ठीक हो जाता हो। इसलिए अब भी इसके लक्षणों की अनदेखी न करें और किसी में यदि लक्षण दिखें तो तत्काल जांच कराएं। जिले की सभी सरकारी, गैर सरकारी स्वास्थ्य संस्थाओं में इसकी जांच की व्यवस्था है। इसके अलावा भी बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन और बाद में पंचायत तक इसकी व्यवस्था कर दी गई है। जांच में अगर रिपोर्ट पॉजिटिव आती है तो बिलकुल न घबराएं और अपना इलाज शुरू कर दें। अब तो घर-घर जाकर भी लोगों का इलाज किया जा रहा है।

टीकाकरण से ही बढ़ेगी सुरक्षा की भावना

एसीएमओ डॉ. राजेश ने बताया अभी तक के शोध से यह प्रमाणित हुआ है कि पूर्ण टीकाकरण से संक्रमण की संभावना कम होती है। अब भी बहुत से लोग यदि पहले टीके के बाद दूसरा टीका नहीं लगवा रहे हैं तो शरीर में बनने वाला सुरक्षा चक्र अपूर्ण ही रह जाता है। इसलिए यदि सुरक्षित रहना है तो टीके के दोनों डोज लें। हालांकि, पहले की अपेक्षा संक्रमण दर में काफी कमी आई है और लोग भी काफी जागरूक और सतर्क हो चुके हैं। लेकिन, संक्रमण का खतरा बरकरार है। इसलिए लोगों को अपने स्तर से किसी प्रकार की लापरवाही से परहेज करना चाहिए। उन्होंने जिलावासियों से कोरोना संबंधी गाइड लाइन का शत-प्रतिशत अनुपालन सुनिश्चित कराने का अनुरोध किया।

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