26 मई को लगेगा साल का पहला चंद्रग्रहण, भारत में इसलिए नहीं लगेगा सूतक

यह चंद्रग्रहण दोपहर करीब सवा तीन बजे शुरू होकर शाम सात बजकर 19 मिनट तक रहेगा, भारत के कुछ हिस्सों में 18 मिनट रहेगा, लेकिन इस दौरान दिन रहने से नहीं लगेगा सूतक

सोनाली सिंह || लखनऊ

चंद्रग्रहण हो या सूर्यग्रहण, भारत में हर किसी की अलग-अलग मान्यताएं हैं। लेकिन, सबके मन में ये सवाल जरूर होता है कि सूतक लग रहा है या नहीं? और लग भी रहा है तो कब और कहां? मान्यता है कि जब तक सूतक लगा हो, तब तक कुछ खाते-पीते नहीं हैं और सूतक खत्म होने के बाद स्नान कर प्रभु को याद करना चाहिए।

साल 2021 का पहला चंद्रग्रहण वैशाख पूर्णिमा यानी 26 मई 2021 को लगने जा रहा है। यह पूर्ण चंद्रग्रहण होगा, जो विश्व के कई देशों में देखा जाएगा।

जिन हिस्सों में दिखेगा चंद्रग्रहण, वहां रहेगा दिन

जमशेदपुर निवासी प्रसिद्ध ज्योतिषी आचार्य डॉ. सुधानंद झा के अनुसार चंद्रग्रहण 26 मई 2021, दिन बुधवार को वृश्चिक राशि और अनुराधा नक्षत्र में लगेगा। चंद्रमा पर आंशिक ग्रहण दोपहर करीब सवा तीन बजे शुरू होगा और शाम को सात बजकर 19 मिनट तक रहेगा। पूर्वी एशिया, जापान, रूस, कनाडा, कोरिया, प्रशांत महासागर, उत्तरी और दक्षिण अमेरिका के ज्यादातर हिस्सों में और ऑस्ट्रेलिया में ये पूर्ण चंद्रग्रहण दिखाई देगा। ये सभी देश चंद्रग्रहण के सूतक से प्रभावित रहेंगे। भारत के अधिकांश हिस्सों में पूर्ण ग्रहण के दौरान चन्द्रमा पूर्वी क्षितिज से नीचे होगा। इसलिए देश के लोग पूर्ण चंद्रग्रहण नहीं देख पाएंगे। जब चंद्रमा पूर्वी आसमान के करीब से निकल रहा होगा, तब पूर्वी भारत के कुछ हिस्सों के लोग आंशिक चंद्रग्रहण के आखिरी हिस्से को देख सकेंगे। उस शाम कोलकाता में चंद्रमा शाम छह बजे निकलेगा और छह बजकर 22 मिनट पर समाप्त हो जाएगा। पश्चिम बंगाल और आसाम आदि क्षेत्रों में मात्र 18 मिनट के लिए चंद्रमा दिखाई देगा। चूंकि, उस समय इन इलाकों में दिन ही रहेगा। इसलिए यहां के लोगों को भी सूतक नहीं लगेगा। इसलिए यहां के लोगों को खान-पान छोड़ने की आवश्यकता नहीं है। कोलकाता में आखिरी पूर्ण चंद्रग्रहण दस साल पहले, 10 दिसंबर 2011 को देखा गया था।

इसलिए लगता है चंद्रग्रहण

वैज्ञानिकों के अनुसार चांद धरती के चक्कर लगाता है और धरती सूरज के चक्कर लगाती है। जब धरती सीधे सूरज और चांद के बीच में आ जाती है तो वह चांद पर पड़ रही रोशनी को रोक देती है। इससे धरती की परछाई चांद पर पड़ती है और यही चंद्रग्रहण कहलाता है।

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