कोरोना वैक्सीन लेने के 14 दिन बाद कर सकते हैं रक्तदान

नेशनल ब्लड ट्रांसफ्यून कांउसिल की नई गाइडलाइन के मुताबिक कोविड टीकाकरण के पहले या दोनों डोज लेने के 14 दिनों के बाद किया जा सकता है रक्तदान

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अविनाश पांडेय/बिहारशरीफ

कोविड आपदा के दौरान रक्तदान में आई कमी के कारण ब्लड बैंक प्रभावित हुए हैं। ऐसे में कई अन्य घातक बीमारियों के उपचार में समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। इनमें ऐसे रोग भी शामिल हैं, जिनके इलाज के लिए मरीज को खून की हमेशा जरूरत होती रहती है। इसको देखते हुए विशेषज्ञों ने वैक्सीनेशन से पहले या वैक्सीन की पहली या दोनों डोज लगने के 14 दिन बाद रक्तदान की सलाह दी है।

इस संकटकाल में रक्तदान करने वालों की संख्या में कमी को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग सहित विभिन्न संस्थाओं द्वारा रक्तदान करने के प्रति जागरूकता लाई जा रही है।

ये हैं दिशा-निर्देश

इस दिशा में बिहार की स्टेट रिसोर्स यूनिट की मेटरनल हेल्थ इकाई के टीम लीडर डॉ. प्रमोद ने लोगों से कोरोना वैक्सीनेशन से पूर्व रक्तदान की अपील की है। उन्होंने कहा कि कोरोना संक्रमण की रोकथाम के लिए बड़े पैमाने पर 18 वर्ष या इससे से अधिक आयु वर्ग के लोगों को टीका लगाया जा रहा है। ऐसे में वैक्सीनेशन के साथ-साथ जरूरतमंदों के लिए रक्त की मांग को पूरा करने के लिए रक्तदान भी आवश्यक है। उनका कहना है कि कोविड संक्रमण काल में भी सुरक्षित रहकर रक्तदान किया जा सकता है। नेशनल ब्लड ट्रांसफ्यून कांउसिल की नई गाइडलाइन के मुताबिक कोविड टीकाकरण के पहले या दोनों डोज लेने के 14 दिनों के बाद रक्तदान किया जा सकता है।

रक्तदान के बाद शरीर में बनता है नया खून

रक्तदान का कोविड संक्रमण से कोई संबंध नहीं है। रक्तदान के कई फायदे भी हैं। यह शरीर में नई रक्त कोशिकाओं का निर्माण करता है और आपको स्वस्थ रखता है। रक्तदान से ह्रदयाघात की आशंका कम हो जाती है। कोविड काल में रक्तदान करने से पूर्व ब्लड बैंक में संक्रमण से बचाव जैसे मास्क लगाना, सैनिटाइजर या साबुन पानी से हाथों की नियमित धुलाई, शारीरिक दूरी जैसे मानकों का पालन कर रक्तदान किया जा सकता है।

रक्त विकार संंबंधी रोगियों को होती है खून की जरूरत

रक्त विकार की समस्याओं जैसे थैलेसिमिया, हीमोफीलिया व ब्लड कैंसर से प्रभावित लोगों को रक्त की हमेशा जरूरत होती है। एनीमिया प्रभावित गर्भवती महिलाओं के प्रसव संबंधी जोखिम को कम करने के लिए भी रक्त की जरूरत होती है। अत्यधिक रक्तस्राव से प्रसूता की जान भी जा सकती है। वहीं, अन्य प्रकार की सर्जरी के दौरान भी रक्त की जरूरत लोगों को होती है। ऐसे समय के लिए अधिकतर लोग ब्लड बैंक पर ही निर्भर होते हैं। खून की आवश्यकता की पूर्ति तभी संभव है, जब ब्लड बैंक में पर्याप्त खून का भंडारण किया गया हो। ऐसे में एक स्वस्थ व्यक्ति द्वारा रक्तदान किया जाना महादान माना जाता है। कई अन्य घातक बीमारियों के उपचार में भी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।।

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