COVID 19 : जानें, मित्र देशों ने कोरोना से लड़ने के लिए भारत को अब तक कितनी और क्या राहत सामग्री भेजी

अभी तक विदेश से प्राप्त 11,000 से अधिक ऑक्सीजन कंसन्ट्रेटर, लगभग 13,500 ऑक्सीजन सिलेंडर, 19 ऑक्सीजन जनरेशन प्लांट, 7,500 से अधिक वेंटिलेटर/ बीआई पीएपी और करीब 5.3 लाख रेमडेसिविर इंजेक्शन राज्यों को किए गए वितरित

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सद्भावना और एकजुटता की भावना के तहत अंतरराष्ट्रीय समुदाय कोविड-19 के खिलाफ जारी लड़ाई में भारत को समर्थन दे रहा है। विभिन्न देशों और संगठनों से 27 अप्रैल, 2021 से अंतरराष्ट्रीय अनुदान और कोविड-19 राहत चिकित्सा सामग्री व उपकरण प्राप्त हो रहे हैं। ये सामग्री केंद्र सरकार राज्यों को तत्काल वितरित कर रही है, जिससे वहां के निवासियों को मदद मिल सके।

मित्र राष्ट्रों से 27 अप्रैल, 2021 से 15 मई, 2021 तक मिले कुल 11,058 ऑक्सीजन कंसन्ट्रेटर, 13,496 ऑक्सीजन सिलेंडर, 19 ऑक्सीजन जनरेशन प्लांट, 7,365 वेंटिलेटर्स/बीआई पीएपी, करीब 5.3 लाख रेमडेसिविर इंजेक्शन सड़क और हवाई माध्यम से विभिन्न राज्यों को भेजे जा चुके हैं।

14-15 मई को कहां क्या आई राहत सामग्री

मित्र देशों से मिले सहयोग का ब्योरा स्रोत पीआईबी हिंदी

14/15 मई, 2021 को कजाकस्तान, जापान, स्विट्जरलैंड, ओंटारियो (कनाडा), यूएसए, इजिप्ट और ब्रिटिश ऑक्सीजन कंपनी (यूके) से बड़े पैमाने पर राहत सामग्री मिली। इसका विवरण निम्न है-

ऑक्सीजन कंसन्ट्रेटर : 100
वेंटिलेटर/बीआईपीएपी/सीपीएपी : 500
ऑक्सीजन सिलेंडर : 300
रेमडेसिविर : 40,000
मास्क और प्रोटेक्टिव सूट। इन्हें भी राज्यों को वितरित कर दिया गया है। हिमाचल प्रदेश के राज्य निगरानी अधिकारी डॉ. रमेश चंद ने राज्य में मरीजों की सहायता के लिए विदेशी सहायता के तहत कोविड-19 उपकरण प्राप्त होने पर केंद्र का आभार जताया है।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय कर रहा निगरानी

मित्र देशों से मदद मिलने का सिलसिला है जारी। फोटो साभार : पीआईबी हिंदी

केंद्र सरकार द्वारा राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों और संस्थानों तक इस राहत सामग्री को प्रभावशाली तरीके से शीघ्र आवंटित और वितरित करना एक नियमित प्रक्रिया है। केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय नियमित रूप से इसकी निगरानी कर रहा है। विदेश से अनुदान, सहायता और दान के रूप में आने वाली कोविड राहत सामग्री की प्राप्ति और आवंटन के बेहतर प्रबंधन के लिए केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय में एक समर्पित समन्वय प्रकोष्ठ का गठन किया गया है। इस प्रकोष्ठ ने 26 अप्रैल, 2021 से काम करना शुरू किया था। केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने इस संबंध में 2 मई, 2021 को एक मानक संचालन प्रक्रिया तैयार कर उसे लागू कर दिया है।

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