जंगली जड़ी-बूटियों से तैयार उत्पाद बदल रहे जनजातीयों की तकदीर

ट्राइफेड की पहल पर 25 राज्यों के 50 लाख जनजातीय लोगों की चेन बनी, तैयार हर्बल उत्पाद को ट्राइब्स इंडिया के नेटवर्क के जरिये मिल रहा बाजार

senani.in || डिजिटल डेस्क

जनजातीय कार्य मंत्रालय के अधीन कार्यरत संस्था ट्राइफेड ने वन क्षेत्रों में रहने वाले जनजातीय लोगों के जीवन स्तर में सुधार के लिए अभियान शुरू किया है। इसके सुखद परिणाम देखने को मिल रहे हैं।

इसके तहत वनोत्पाद को इकट्ठा करने वाली जनजातियों को उनके उत्पाद का न्यूनतम समर्थन मूल्य उपलब्ध कराया जा रहा है। इनसे तैयार उत्पादों की बिक्री भी जनजातीय समूहों द्वारा ही की जाती है। इसमें ट्राइफेड उनकी मदद करता है और बाजार उपलब्ध कराता है।

मिल रहा उद्यम का अवसर

एक समूह द्वारा तैयार हर्बल उत्पाद फोटो क्रेडिट : पीआईबी हिंदी

ट्राइफेड की इस पहल से 23 राज्यों और दो केंद्र शासित प्रदेशों के जंगलों में उत्पाद जमा करने वाली जनजातियों के लाखों लोगों को उद्यम का अवसर मिल रहा है। ट्राइफेड के अनुसार उसके द्वारा शुरू किए गए वन-धन स्टार्ट-अप कार्यक्रम से 50 लाख जनजातीय लोग लाभान्वित हुए हैं।

कर्नाटक में 11 हजार से ज्यादा लोग लाभान्वित

ट्राइफेड ने एक अप्रैल, 2021 से ‘संकल्प से सिद्धि’–गांव एवं डिजिटल संपर्क अभियान की शुरुआत की है। इस दौरान टीमों ने गांवों का दौरा किया। इसमें पता चला कि विभिन्न राज्यों में जनजातीय टीमों ने अपार सफलता हासिल की है। इसमें कर्नाटक का भी समूह है। कर्नाटक में ट्राइफेड की योजनाओं से लगभग 11,400 जनजातीय लाभार्थियों को मदद मिल रही है।

ये है तैयारी

कर्नाटक के संजीवनी प्रधानमंत्री विकास केंद्र पाकशिराजपुरा, हुनसुरु, मैसूर जिले में एक वन-धन विकास केंद्र में जनजातीय लोग जो उत्पाद तैयार कर रहे हैं, उनमें जड़ी-बूटियों से बना बालों में लगाने वाला तेल (हर्बल ऑयल), मलाबार इमली और शहद शामिल हैं। दिग्गज उद्यमी नीमा श्रीनिवास के नेतृत्व में जनजातियों ने डिब्बाबंद हर्बल ऑयल ट्राइफेड के अधिकारियों को सौंपा दिया है। इस उत्पाद को ट्राइफेड के ट्राइब्स इंडिया के विस्तृत नेटवर्क और tribesindia.com के जरिये बाजार में उतारा जाएगा।

शुद्ध शहद भी तैयार

कर्नाटक की ही वनश्री प्रधानमंत्री वनधन विकास केंद्र समूह, कोटे, मैसूर को अभी हाल में शुरू किया गया है। इसके जरिये जंगल में पैदा शहद का प्रसंस्करण कर उसे कांच की बोतलों में पैक करने की प्रक्रिया चल रही है। ट्राइफेड के जरिये इसे भी जल्द बाजार में उतारा जाएगा।

ये उत्पाद भी बना रहे समूह

एक केंद्र पर तैयार किया जा रहा उत्पाद फोटो साभार : पीआईबी हिंदी

प्रधानमंत्री चैतन्य वनधन विकास केंद्र समूह में जनजातीय सदस्य फूल की झाड़ू का उत्पादन कर रहे हैं। विभिन्न केंद्रों के सदस्य अन्य वस्तुओं का भी उत्पाद कर रहे हैं, जिनमें शहद, दालचीनी, शीकाकाई और अडिके की पत्तियों से बनी प्लेट शामिल हैं। इन सभी उत्पादों को मई 2021 में ट्राइफेड द्वारा खरीदकर बाजार में उतारे जाने की संभावना है।

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