भारत में भी बच्चों को लगेगी कोरोना की वैक्सीन, जानिए-बिहार के किस संस्थान में होगा परीक्षण

डीसीजीआई ने दो से 18 वर्ष आयु वर्ग के लिए भारत बायोटेक द्वारा निर्मित स्वदेशी वैक्सीन कोवैक्सीन के दूसरे और तीसरे चरण के परीक्षण को दी मंजूरी

निर्माता कंपनी भारत बायोटेक 525 स्वस्थ स्वयंसेवियों पर करेगी वैक्सीन का परीक्षण

senani.in || डिजिटल डेस्क

प्रतीकात्मक तस्वीर

देश में अभी 18 वर्ष और इससे ऊपर के लोगों को कोरोना से बचाने के लिए टीकाकरण जोरों पर चल रहा है। इससे कम उम्र के किशोर और बच्चे वैक्सीन से वंचित हैं। इसके विपरीत कनाडा, अमेरिका और यूरोप समेत कई देशों में बच्चों को भी अगले हफ्ते से वैक्सीन लगाने की तैयारी है। लेकिन, अब भारत ने भी बच्चों तथा किशोरों को कोरोना वैक्सीन लगाने की दिशा में कदम बढ़ा दिए हैं।

इसके तहत सब कुछ ठीक रहा तो अगले छह महीनों में भारत में भी दो से 18 वर्ष तक के बच्चों और किशोरों को वैक्सीन की डोज लगने लगेगी।

12 मई को भारत बायोटेक के प्रस्ताव को मिली मंजूरी

देश की नियामक संस्था ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (डीसीजीआई) ने पड़ताल के बाद विशेषज्ञ समिति (एसईसी) की सिफारिशें मानते हुए दो से 18 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों तथा किशोरों के लिए कोवैक्सीन के दूसरे और तीसरे चरण के परीक्षण को मंजूरी दे दी है। यह अनुमति कोवैक्सीन निर्माता कंपनी भारत बायोटेक लिमिटेड को 12 मई, 2021 को प्रदान की गई।

वैक्सीन की दो डोज लगेंगी, दूसरी डोज लगेगी 28वें दिन पर

मेसर्स भारत बायोटेक इंटरनेशनल लिमिटेड, हैदराबाद (बीबीआईएल) ने दो से 18 वर्ष आयु वर्ग वालों पर कोवैक्सीन के दूसरे और तीसरे चरण के परीक्षण का प्रस्ताव दिया था। यह परीक्षण 525 स्वस्थ स्वयंसेवियों पर किया जाएगा। परीक्षण के दौरान वैक्सीन की डोज मांसपेशियों के जरिये (इंट्रामस्कुलर) दी जाएगी। स्वयंसेवियों को वैक्सीन की दो खुराक दी जाएगी। दूसरी खुराक, पहली खुराक के 28वें दिन पर दी जाएगी। इस प्रस्ताव पर तेजी से अमल करते हुए प्रस्ताव को 11 मई, 2021 को विशेषज्ञ समिति को भेज दिया गया था। समिति ने विस्तृत विमर्श के बाद कुछ शर्तों के साथ प्रस्तावित दूसरे और तीसरे चरण के परीक्षण को अनुमति देने की सिफारिश कर दी थी।

पहले चरण के परीक्षण की इसलिए नहीं है जरूरत

चूंकि, यह वैक्सीन (को-वैक्सीन) पहले ही वयस्कों में सभी परीक्षण पूरे कर चुकी है। इसलिए बच्चों में इसके पहले चरण के परीक्षण की जरूरत नहीं पड़ेगी। पहले इस वैक्सीन के पांच से 18 वर्ष की आयु वालों पर परीक्षण का विचार चल रहा था, लेकिन दायरा बढ़ाते हुए अब इसमें दो से 18 वर्ष की आयु वालों को शामिल करने का फैसला लिया गया है। कंपनी द्वारा इस वैक्सीन का परीक्षण दिल्ली और पटना के एम्स तथा नागपुर के मेडिट्रीना मेडिकल साइंस इंस्टिट्यूट में करने की तैयारी है।

कोवैक्सीन की विशेषता

कोवैक्सीन को इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) और भारत बायोटेक ने मिलकर तैयार किया है। कोवैक्सीन की प्रभाविकता 78 फीसदी है। एक शोध में ये भी बताया गया है कि यह वैक्सीन घातक संक्रमण और मृत्यु दर के जोखिम को सौ फीसदी तक कम कर सकती है। हाल में हुए शोध में दावा किया गया है कि कोवैक्सीन कोरोना के सभी वेरिएंट के खिलाफ कारगर है। इसे केवल दो से आठ डिग्री सेल्सियस पर स्टोर किया जा सकता है।

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