कोरोना का साथ पाकर खतरनाक हुआ ब्लैक फंगस

महाराष्ट्र और गुजरात में बड़ी संख्या में लोग चपेट में, उत्तर प्रदेश में भी दस्तक

सोनाली सिंह || लखनऊ

कोविड-19 की दूसरी लहर के बीच म्यूकरमाइकोसिस नाम की एक अन्य बीमारी, जिसे ब्लैक फंगस भी कहा जाता है, ने रौद्र रूप ले लिया है। ये इन्फेक्शन कोरोना मरीजों के लिए अधिक घातक साबित हो रहा है। कोरोना मरीज इस बीमारी का शिकार जल्दी हो रहे हैं।

ब्लैक फंगस नाम का यह फंगल इन्फेक्शन किसी व्यक्ति की प्रतिरोधक क्षमता कम होने पर होता है। ऐसे लोगों को ही यह जल्दी चपेट में ले रहा है। कोरोना के दौरान या फिर ठीक हो चुके मरीजों का इम्यून सिस्टम बहुत कमजोर होता है। इसलिए वे आसानी से इसकी चपेट में आ रहे है।

हर उम्र के लोग आ रहे चपेट में

डॉक्टरों का कहना है कि यह बीमारी किसी भी उम्र के लोगों में हो सकती है। यह बीमारी भारत में बड़ी संख्या में लोगों को अब तक अपनी चपेट में ले चुकी है। कई लोगों की इससे मौत भी हो चुकी है। सबसे पहले गुजरात के अहमदाबाद में इसके मामले आए। पिछले दो हफ्तों से रोजाना 15 से 20 केस अकेले गुजरात में ही आ रहे हैं। महाराष्ट्र में इसके दो सौ से अधिक मामले आ चुके हैं। इनमें से आठ से अधिक लोगों ने अपनी जान भी गंवाई है।

क्या है म्यूकरमाइकोसिस (ब्लैक फंगस)

इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर ) द्वारा जारी एडवाइजरी के अनुसार म्यूकरमाइकोसिस एक फंगल इन्फेक्शन है, जो शरीर में बहुत तेजी से फैलता है। ये संक्रमण म्यूकर नामक कवक से होता होता है, जोकि हमारे वातावरण में मौजूद रहते हैं। इस बीमारी के संक्रमण से कई प्रकार की दिक्कतें सामने आई हैं। नाक और आंख से होता हुआ यह संक्रमण दिमाग तक पहुंच जाता है। इस कारण लोगों को नाक में उलझन महसूस हो रही है। आंखों में सूजन और काले धब्बे भी देखने को मिल रहे हैं। कमजोर इम्युनिटी वाले मरीजों को ये जल्दी अपनी चपेट में लेता है। मधुमेह और डायबिटीज के मरीजों और कमजोर इम्युनिटी वालों पर इसका ज्यादा खतरा देखा गया है। शुगर लेवल बढ़ जाने पर उनमें म्यूकरमाइकोसिस खतरनाक रूप ले सकता है।

जा सकती है आंखों की रोशनी

इस बीमारी से लोगों की आंखों की रोशनी भी चली जा रही है। वहीं, कुछ मरीजों के जबड़े और नाक की हड्डी भी गल जाती है। इस तरह के मामले बढ़ते ही जा रहे हैं।

ब्लैक फंगस के लक्षण

-नाक में सूजन आना, नाक या जबड़े में दर्द होना

-आंखों के सामने धुंधलापन,
सीने में दर्द, बुखार, सिर दर्द, खासी, सांस लेने में दिक्कत, खून की उल्टियां होना। इन सभी का असर दिमाग पर भी देखा जा रहा है।

ब्लैक फंगस से ऐसे करें बचाव

-किसी निर्माणाधीन जगह पर जाने से पहले मास्क पहनें

-बगीचे में जाएं तो फुल आस्तीन की शर्ट, पैंट व ग्लब्स पहनें

-ब्लड में ग्लूकोज का स्तर नापते रहें और इसे नियंत्रित रखें

-ब्लैक फंगस उत्तर प्रदेश के कई शहरों को भी अपनी चपेट में ले चुका है। कानपुर में 20 और लखनऊ में इस बीमारी के आठ मामले सामने आए हैं। इस बीमारी की रफ्तार को देखते हुए इसके आगे बढ़ने की आशंका और बढ़ती जा रही है। इसकी रोकथाम के लिए हमें अपनी इम्युनिटी को मजबूत बनाए रखना है और अपनी सेहत का खास ख्याल रखना होगा। ये छोटी-छोटी सावधानी आपकी और हम सबकी जान बचा सकती है।

राज्यों को दवा उपलब्ध कराएगी केंद्र सरकार

ब्लैक फंगस बढ़ने के कारण कुछ राज्यों में इसकी दवा एम्फोटेरिसिन बी की मांग में वृद्धि देखी गई है। इसलिए केंद्र सरकार इस दवा के उत्पादन को बढ़ाने के लिए निर्माताओं से बातचीत कर रही है। इस दवा के अतिरिक्त आयात और घरेलू स्तर पर इसके उत्पादन में वृद्धि के साथ आपूर्ति की स्थिति में सुधार होने की उम्मीद है। केंद्र के औषध विभाग ने निर्माताओं/आयातकों के साथ स्टॉक की स्थिति की समीक्षा की। इसके बाद एम्फोटेरिसिन बी दवा राज्यों को आवंटित की गई है, जिसकी खेप 31 मई तक सभी जगह पहुंचा दी जाएगी। राज्यों से सरकारी और निजी अस्पतालों एवं स्वास्थ्य सेवा एजेंसियों के बीच आपूर्ति के समान वितरण के लिए एक व्यवस्था लागू करने का भी अनुरोध किया गया है। राज्यों से यह भी अनुरोध किया गया है कि वे इस आवंटन से दवा प्राप्त करने के लिए राज्य में निजी और सरकारी अस्पतालों के लिए ‘संपर्क बिंदु’ का प्रचार करें। इसके अलावा, राज्यों से अनुरोध किया गया है कि पहले से आपूर्ति किए जा चुके स्टॉक और साथ ही आवंटित किए गए स्टॉक का विवेकपूर्ण तरीके से इस्तेमाल किया जाए। राष्ट्रीय औषध मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (एनपीपीए) आपूर्ति व्यवस्था की निगरानी करेगा।

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