बिहार में लॉकडाउन लगाए सरकार : दिलीप

कांग्रेस नेता ने राज्यपाल और मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर की नालंदा मेडिकल कॉलेज में डॉक्टरों और कर्मचारियों की भर्ती की मांग

कहा, पूरे प्रदेश में ऑक्सीजन के लिए हाहाकार मचा हुआ है, जिला अस्पतालों में वेंटिलेटर तक नहीं

senani.in

अविनाश पांडेय || बिहारशरीफ

सरकार को लिखे गए पत्र के बारे में जानकारी देते कांग्रेस नेता दिलीप कुमार फोटो क्रेडिट : सेनानी.इन

जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष सह स्नातक अधिकार मंच के संयोजक दिलीप कुमार ने बयान जारी करते हुए कहा कि सरकार को बिहार में पूर्णतः लॉक डाउन करने में अब विलंब नहीं करना चाहिए। जिस तरह नालंदा जिला ही नहीं, पूरे राज्य में कोरोना संक्रमण अपना विकराल रूप दिखा रहा है। कहीं न कहीं जनहित में लॉकडाउन करने का वक्त आ गया है।

दिलीप कुमार ने कहा कि एक तरफ अस्पतालों में बेड नहीं हैं तो दूसरी तरफ पूरे प्रदेश में ऑक्सीजन के लिए हाहाकार मचा हुआ है। जिला अस्पतालों में वेंटिलेटर तक नहीं हैं। उन्होंने एक पत्र का हवाला देते हुए कहा कि नालंदा जिले में एकमात्र मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल, जिसका नाम वर्धमान इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज है, उसमें पूर्व से 500 बेड का अस्पताल है। इसमें से मात्र 100 बेड ही कोरोना संक्रमित मरीजों के लिए रखा गया है। वर्तमान में किसी भी सरकारी या निजी अस्पताल में सामान्य रोगियों की संख्या नहीं के बराबर है। इसके बावजूद अस्पतालों को पूर्णरूपेण कोविड अस्पताल नहीं बनाने के पीछे भी सरकार की कमी उजागर हो रही है।

इस आशय का पत्र दिलीप ने 26 अप्रैल को भी राज्यपाल को भेजा था। जिस पर संज्ञान लेते हुए स्वास्थ्य विभाग ने पावापुरी मेडिकल कॉलेज को पूर्णरूपेण कोविड अस्पताल का दर्जा तो दे दिया। लेकिन, कोविड-19 के गाइडलाइन के अनुरूप इस अस्पताल में कोई व्यवस्था नहीं की गई है।

कोविड अस्पताल बनाया, संसाधन नहीं मिले

पुनः 1 मई 2021 को दिलीप कुमार द्वारा राज्यपाल, मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री को एक पत्र भेजकर यह मांग की गई है कि तत्काल वर्धमान इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज के 500 बेड के अस्पताल में कोविड गाइडलाइन के अनुसार वार्ड बॉय, नर्सिंग स्टाफ एवं डॉक्टरों की नियुक्ति की जाए। जिस तरह पटना के एआईआईएमएस आईजीएमएस एवं पीएमसीएच में कोविड डॉक्टरों की सुविधा उपलब्ध है, वैसी ही व्यवस्था तत्काल यहां भी कराई जाए। क्योंकि यह मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल भी पांच जिलों के मरीजों को देखता है। उन्होंने कहा कि इस 500 बेड के अस्पताल के लिए मेडिसिन विभाग में मात्र 16 डॉक्टर ही उपलब्ध हैं। इनमें से भी आधे बीमार चल रहे हैं। ऐसे में आठ डॉक्टरों के भरोसे 24 घंटे का ड्यूटी कोविड वार्ड कैसे बनाया जा सकता है। साथ ही जब इस अस्पताल में 100 बेड का कोविड वार्ड बनाया गया था, उस समय भी यहां नर्सिंग स्टाफ डॉक्टर एवं वार्ड बॉय की कमी थी। अब उन्हीं कर्मियों के भरोसे 500 बेड का कोविड-19 अस्पताल नहीं चलाया जा सकता है। उन्होंने राज्यपाल से आग्रह करते हुए यह भी कहा है कि अभी जो वर्तमान में कोरोना संक्रमण अपने राज्य में कोहराम मचा रहा है। जिस तरह कम्युनिटी ट्रांसफर पूरे जोर पर है। इस अवस्था में हर हाल में बिहार में संपूर्ण लॉकडाउन लगाना चाहिए। साथ ही उन्होंने राज्यपाल से पटना के अस्पतालों की तरह अनुभवी डॉक्टरों की टीम पावापुरी भी भेजने का आग्रह किया है।

अस्पतालों में करें ऑक्सीजन की व्यवस्था

दिलीप कुमार ने मीडिया के माध्यम से राज्य सरकार से यह भी मांग की है कि सारे अस्पतालों में ऑक्सीजन की व्यवस्था सुनिश्चित कराई जाए। कुमार ने सरकार से यह भी मांग की है कि कोरोना का सही-सही आंकड़ा जनता के सामने लाइए, तब जनता वस्तु स्थिति से वाकिफ होकर अपने आप लॉकडाउन कर देगी। उन्होंने जनप्रतिनिधियों पर भी निशाना साधते हुए कहा कि चुनाव के वक्त सुख दुख में मदद का झांसा देने वाले सारे जनप्रतिनिधि आज जनता के बीच से गायब हैं। अभी किसी भी अस्पताल में जाने के बाद कोई बेड उपलब्ध नहीं है। तात्कालिक कोरोना अस्पताल हर जिले और प्रखंड में किसी न किसी मैदान में पंडाल लगाकर सारी व्यवस्था के साथ बनाया जाए। ताकि जो लोग बेड के इंतजार में दम तोड़ रहे हैं उनका इलाज सही से हो सके। लोग डरे हुए हैं। लोग ऑक्सीजन सिलेंडर खरीद-खरीदकर घर में रख रहे हैं। दवा की दुकानों पर लंबी कतारें हैं। लोगों में अफरा-तफरी का माहौल है। उन्होंने खुद भी अपने ऊपर सवाल जवाब करते हुए कहा कि आज तक कभी वह इतने बेबस और लाचार नहीं हुए थे। जितना इस बार हैं। प्रतिदिन सैकड़ों फोन आते हैं। लेकिन, चाह कर भी हम किसी की मदद नहीं कर पा रहे हैं। यह कैसी विडंबना है। उन्होंने नालंदा जिलावासियों सहित प्रदेश और देश के लोगों से आवाहन करते हुए कहा कि कोरोना के संक्रमण से बचने के मुख्यतः दो ही तरीके हैं। इनमें सर्वप्रथम मास्क लगाना अनिवार्य है। बिना मास्क पहने हुए किसी भी हाल में घर से बाहर न निकलें। दूसरा जिसे सोशल डिस्टेंसिंग कहते हैं, एक-दूसरे से दूरी बनाकर रखना है।

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