ऑक्सीजन कंसंट्रेटर क्या हैं, यह कोरोना मरीजों के लिए किस तरह हैं उपयोगी

कब करना चाहिए ऑक्सीजन कंसंट्रेटर का उपयोग, यह किस तरह करते हैं काम, जानें सभी सवालों के जवाब

senani.in, डिजिटल डेस्क

प्रतीकात्मक तस्वीर

कोरोना की दूसरी लहर में पहले के मुकाबले ज्यादा लोग संक्रमित हो रहे हैं। इस बार खतरनाक ढंग से कोरोना पीड़ितों का ऑक्सीजन लेवल गिर रहा है। इसके चलते ऑक्सीजन की मांग उत्पादन से ज्यादा हो गई है। ऐसे में आप रोजाना समाचार पत्रों और टीवी न्यूज में सुन रहे होंगे कि मित्र देश भारत की मदद के लिए कंसंट्रेटर भेज रहे हैं। खुद भारत सरकार ने भी एक लाख ऑक्सीजन कंसंट्रेटर खरीदने का फैसला किया है। आप सोचते होंगे कि आखिर ये ऑक्सीजन कंसंट्रेटर क्या है? इसकी उपयोगिता क्या है और ये कैसे काम करता है? तो आइए, हम आपको ऑक्सीजन कंसंट्रेटर के बारे में वो सभी जानकारी दे रहे हैं, जो आप जानना चाहते हैं।

जीवित रहने के लिए हमें ऑक्सीजन की लगातार आपूर्ति की आवश्यकता होती है, जो हमारे फेफड़ों से शरीर की विभिन्न कोशिकाओं में प्रवाहित होती है। कोविड-19 एक श्वसन रोग है, जो हमारे फेफड़ों को प्रभावित करता है और जिससे शरीर में ऑक्सीजन की मात्रा खतरनाक स्तर तक गिर सकती है। ऐसी स्थिति में शरीर में ऑक्सीजन के स्तर को बढ़ाने के लिए हमें ऑक्सीजन का उपयोग कर चिकित्सकीय ऑक्सीजन थेरेपी देने की जरूरत पड़ती है।

शरीर में ऑक्सीजन का स्तर ‘ऑक्सीजन सेचूरेशन’ के रूप में मापा जाता है, जिसे संक्षेप में ‘एसपीओ-टू’ कहते हैं। यह रक्त में ऑक्सीजन ले जाने वाले हीमोग्लोबिन की मात्रा का माप है। सामान्य फेफड़ों वाले एक स्वस्थ व्यक्ति की धमनी में ऑक्सीजन सेचूरेशन 95% – 100% का होता है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन के पल्स ऑक्सीमीट्री पर बनाए गए प्रशिक्षण मैनुअल के अनुसार यदि ऑक्सीजन सेचूरेशन 94% या उससे कम हो तो रोगी को जल्द इलाज की जरूरत होती है। यदि सेचूरेशन 90% से कम हो जाए तो वह चिकित्सकीय ​​आपात स्थिति मानी जाती है।

स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा कोविड-19 के वयस्क रोगियों के प्रबंधन के लिए नवीनतम चिकित्सकीय मार्गदर्शन के अनुसार कमरे की हवा पर 93% या उससे कम ऑक्सीजन सेचूरेशन हो तो मरीज को अस्पताल में भर्ती करने की आवश्यकता होती है, जबकि 90% से कम सेचूरेशन की हालत में मरीज को आईसीयू में रखा जाना लाजिमी है। ऐसे में महामारी की दूसरी लहर के कारण पैदा हुए हालात को देखते हुए, हमें क्लिनिकल प्रबंधन प्रोटोकॉल के अनुसार अस्पताल में प्रवेश में देरी या असमर्थता की स्थिति में मरीज के ऑक्सीजन स्तर को बनाए रखने के लिए जो कुछ भी हमसे सर्वश्रेष्ठ हो सकता है, वह करना चाहिए।

ऑक्सीजन कंसंट्रेटर कैसे काम करता है

हम जानते हैं कि वायुमंडल की हवा में लगभग 78% नाइट्रोजन और 21% ऑक्सीजन होती है। ऑक्सीजन कंसंट्रेटर एक सरल उपकरण है, जो ठीक वही करता है, जो इसके नाम से व्यक्त होता है। ये उपकरण वायुमंडल से वायु को लेता है और उसमें से नाइट्रोजन को छानकर फेंक देता है तथा ऑक्सीजन को घना करके बढ़ा देता है।

ये ऑक्सीजन कंसंट्रेटर शरीर के लिए जरूरी ऑक्सीजन की आपूर्ति उसी तरह करते हैं, जैसे ऑक्सीजन टैंक या सिलेंडर। एक केन्युला (प्रवेशनी), ऑक्सीजन मास्क या नाक में लगाने वाली ट्यूबों के जरिये। अंतर यह है कि सिलेंडरों को बार-बार भरने (रिफिल) की जरूरत पड़ती है, जबकि ऑक्सीजन कंसंट्रेटर चौबीसों घंटे सातों दिन काम कर सकता है और आपके लिए ऑक्सीजन बना सकता है।

ऑक्सीजन कंसंट्रेटर का उपयोग कौन कर सकता है, और कब

क्या इसका मतलब यह है कि जो भी अपने ऑक्सीजन के स्तर को स्वीकार्य स्तर से नीचे पाता है, वह एक कंसंट्रेटर का उपयोग कर सकता है और खुद की मदद कर सकता है? जवाब है, बिलकुल नहीं।

कंसंट्रेटर के सही उपयोग पर पीआईबी से बात करते हुए, बीजे मेडिकल कॉलेज, पुणे के एनेस्थीसिया विभाग के प्रोफेसर और विभागाध्यक्ष प्रो. संयोगिता नाइक ने कहा कि ऑक्सीजन कंसंट्रेटर का उपयोग केवल कोविड-19 के सीमित मामलों में किया जा सकता है। वह भी तब जब रोगी ऑक्सीजन के स्तर में गिरावट का अनुभव करता है और उसकी बाहर से ऑक्सीजन लेने की आवश्यकता अधिकतम पांच लीटर प्रति मिनट होती है।

उन्होंने कहा कि ऑक्सीजन कंसंट्रेटर पोस्ट-कोविड जटिलताओं का सामना करने वाले रोगियों के लिए भी बहुत उपयोगी होते हैं, जिन्हें ऑक्सीजन थेरेपी की आवश्यकता होती है।

क्या कंसंट्रेटर का हम अपने आप इस्तेमाल कर सकते हैं?

बिलकुल नहीं। 30 अप्रैल को एक वेबिनार में सेंट जॉन मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल, बेंगलुरु के कोविड को-ऑर्डिनेटर डॉ. चैतन्य एच. बालाकृष्णन ने स्पष्ट किया कि बिना चिकित्सीय मार्गदर्शन के ऑक्सीजन कंसंट्रेटर का उपयोग करना अत्यंत हानिकारक हो सकता है। कोविड-19 से पैदा हुए न्यूमोनिया में 94 प्रतिशत से कम ऑक्सीजन सेचूरेशन वाले रोगियों को ऑक्सीजन कंसंट्रेटर से पूरक ऑक्सीजन दिए जाने से लाभ हो सकता है। मगर, तभी तक जब तक कि वे अस्पताल में नहीं भर्ती हो जाते। हालांकि, बिना उपयुक्त चिकित्सकीय सलाह के इसका इस्तेमाल करने वाले मरीजों के लिए ऐसा करना हानिकारक हो सकता है।

डॉ. चैतन्य ने कहा, जब तक आपको अस्पताल में बेड नहीं मिलता, तब तक ऑक्सीजन कंसंट्रेटर फायदेमंद हो सकता है, लेकिन निश्चित रूप से वक्ष चिकित्सक या आंतरिक चिकित्सा विशेषज्ञ से मार्गदर्शन के बिना नहीं। यह इस बात पर भी निर्भर करता है कि मरीज के फेफड़ों की हालत पहले से कैसी है?

प्रो. संयोगिता का भी यह कहना है कि कंसंट्रेटर की खरीद और उपयोग दोनों ही एक मेडिकल डॉक्टर के पर्चे के आधार पर किए जाने चाहिए। क्षमता के आधार पर, ऑक्सीजन कॉन्सेंट्रेटर की कीमत 30 हजार रुपये से ऊपर होती है।

भारत में ऑक्सीजन कंसंट्रेटर का बाजार

कोरोना की दूसरी लहर में भारत में ऑक्सीजन कंसंट्रेटरों के निर्माण और बिक्री में बड़ा उछाल देखा गया है। बहुराष्ट्रीय ब्रांडों के अलावा विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के ‘सेंटर फॉर ऑगमेंटिंग वॉर विद कोविद-19 हेल्थ क्राइसिस’ कार्यक्रम के तहत वित्त पोषित कई भारतीय स्टार्ट-अप ने भी कुशल और लागत प्रभावी ऑक्सीजन कंसंट्रेटर विकसित किए हैं।

कोविड महामारी की दूसरी लहर के दौरान उपयोगिता को देखते हुए पीएम केयर्स फंड के जरिये एक लाख ऑक्सीजन कंसंट्रेटर खरीदे जा रहे हैं।

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