जानिए, क्यों गिर रहा कोरोना मरीजों का ऑक्सीजन लेवल

कोरोना हमसे मनोवैज्ञानिक लड़ाई लड़ रहा है। मरीज चिंता के मारे खाना-पीना छोड़ रहे हैं। इससे शरीर कमजोर हो रहा है। ऑक्सीजन की कमी इसी के चलते ही हो रही है। आप ठान लें कि कोरोना कुछ भी नहीं है तो आधी लड़ाई आप ऐसे ही जीत जाएंगे।

Senani.in || डिजिटल डेस्क

शैलेश त्रिपाठी

कोरोना यानी कोविड-19 से देश-दुनिया में हर कोई परेशान है। इसने पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था की रफ्तार धीमी कर दी है। भारत में तो स्थिति दिनोंदिन बदतर होती जा रही है। हर मरीज का ऑक्सीजन लेवल गिर रहा है। देश के विभिन्न हिस्सों से अस्पतालों में ऑक्सीजन की कमी से मरीजों की मौत की खबरें आ रही हैं।

ऐसे में मरीजों में ऑक्सीजन की कमी क्यों हो रही है? हमें इसका कारण ढूंढना होगा।

भोपाल के पंडित खुशीलाल शर्मा गवर्नमेंट आयुर्वेद कॉलेज एंड इंस्टीट्यूट के बैचलर स्टूडेंट शैलेश त्रिपाठी के अनुसार कोरोना हमसे मनोवैज्ञानिक लड़ाई लड़ रहा है। उनका कहना है कि कोरोना की दूसरी लहर में पहले की तरह खांसी, बुखार ही लक्षण नहीं हैं। इस बार अधिकांश लोगों में कोई लक्षण नहीं दिख रहा है। सिर दर्द और शरीर दर्द भी जांच में कोरोना निकल जा रहा है। इसलिए इस बार चुनौती बहुत बड़ी है। चूंकि, पिछली बार के मुकाबले जांच बहुत ज्यादा हो रही है, इसलिए मरीजों की संख्या भी ज्यादा निकल रही है।

खैर, हम इसके मनोवैज्ञानिक पहलू पर बात शुरू करते हैं। हम एक उदाहरण लेते हैं।

एक युवक को हल्का बुखार, सिर दर्द और बदन दर्द होता है। उसके घरवाले भागे-भागे अपने परिचित केमिस्ट के यहां जाते हैं। केमिस्ट लक्षण सुनने के बाद कोरोना की आशंका जताता है। साथ ही कोरोना के प्राथमिक इलाज में काम आने वाली एक हफ्ते की दवाइयां थमा देता है। चूंकि, शहर के अधिकांश निजी डॉक्टरों की क्लीनिक कोरोना के कारण बंद हैं। सरकारी अस्पताल कोविड अस्पताल में तब्दील हो चुके हैं। आम मरीजों की इनमें भर्ती बंद है। इसलिए इस मरीज के घरवाले भी मजबूर हैं। दवाई लेकर मायूस मन से घर आ जाते हैं।

यह भारत के दो से तीन करोड़ लोगों की कहानी है। इसमें न तो केमिस्ट गलत है और न ही घरवाले और मरीज। लेकिन, समस्या यह है कि जिसमें कोरोना की पुष्टि हो रही है, वह भी और जिनका मामला सस्पेक्टेड यानी संदिग्ध है, वह भी कोरोना की चिंता में धीरे-धीरे खाना-पीना कम करते जा रहे हैं। समस्या यहीं से शुरू होती है।

खाना कम होने के कारण धीरे-धीरे मरीज कमजोर होते जाते हैं। दस-बारह दिन बाद एक समय ऐसा आता है, जब मरीज का शरीर बेहद कमजोर हो जाता है। इसके चलते मरीज सांस भी भरपूर नहीं ले पाता है। इस कारण धीरे-धीरे उसका ऑक्सीजन लेवल कम होने लगता है। एक समय ऐसा आता है, जब उसका ऑक्सीजन लेवल मानक से भी कम हो जाता है और उसके घरवाले ऑक्सीजन की तलाश में भटकने लगते हैं। कई बार ऑक्सीजन की कमी से मरीज की मौत भी हो जाती है। लेकिन, इस अप्रिय स्थिति से बचा जा सकता है।

कोरोना इसलिए है भयावह

प्रतीकात्मक तस्वीर

-कोरोना के बारे में अब भी लोगों को बहुत कम जानकारी है। किसी भी लक्षण को कोरोना से जोड़ दिया जा रहा है

-लोगों में यह धारणा है कि मौतों का आंकड़ा केवल कोरोना से है, जबकि ऐसा बिल्कुल नहीं है। हर मौत का कारण कोरोना नहीं है

-बच्चे, बूढ़े, जवान, अमीर और गरीब सभी इसकी चपेट में नहीं आ रहे, बल्कि केवल फ्लू की चपेट में हैं।

-अगर फ्लू और कोरोना को अलग-अलग देखा जाए तो 60 प्रतिशत तक लोग ये पाएंगे कि वह फ्लू की चपेट में थे, न कि कोरोना के

-सर्दी, खांसी, जुकाम पहले भी होता था। आगे भी होगा। इससे घबराने की जरूरत नहीं है। हर खांसी-जुकाम को कोरोना बना देना चिंता का विषय है

जीवन शैली में अचानक न करें बदलाव

आप जैसी जीवनशैली में थे, उसी में रहिए। अचानक किसी बदलाव की आवश्यकता नहीं है। अगर फ्लू होना होगा तो वो आपको होगा। तीन से चार दिन के लक्षण के बाद खुद चला जाएगा

-लेकिन, लोग इस पीरियड में इतना परेशान हो जाते हैं कि बेसिक के बजाय बड़े ट्रीटमेंट की ओर चले जाते हैं। यहीं से फ्लू बिगड़ता है और मरीज धीरे-धीरे कोरोना पेशेंट बन जाता है

-ऐसी किसी भी चीज के सेवन से परहेज करें जो शरीर को गर्म कर देती हो या लूजमोशन ला देती हो। ऐसा इसलिए क्योंकि गरम तासीर वाली चीजें गर्मी के मौसम में डिहाइड्रेशन का कारण भी बन सकती हैं

-बिना वजह इम्यूनिटी बूस्टर के नाम पर अनाप-शानप दवाइयां न खाएं

कुछ घरेलू उपचार

-सोने से पहले अदरक और गुड़ का सेवन करें

-चाय में नियमित रूप से इलायची, काली मिर्च और तुलसी डालें

-त्रिकटु चूर्ण का काढ़ा (दुकान में उपलब्ध) और आरोग्य काशायम (दुकान में उपलब्ध) का सेवन भी कर सकते हैं

कोरोना हो जाए तो क्या करें

प्रतीकात्मक तस्वीर

-कोरोना हो जाने पर घबराएं नहीं। सबसे पहले अपने दिमाग को शांत करें। मन में प्रण लें कि इस बीमारी से भी हम जीतेंगे। कोरोना का डर मन में हावी नहीं होने देंगे तो आधी लड़ाई ऐसे ही जीत लेंगे

-कोरोना होने पर डॉक्टर से सलाह लें। उसके द्वारा दी जा रही दवाई का सेवन करें। सुबह-शाम लहसुन की चार से पांच कच्ची कलियां चबाकर खाएं

-अगर लहसून का स्वाद ठीक न लग रहा हो तो जामुन के सिरके में लहसून की कलियों को डालकर रख दें। खाना खाते समय या सुबह-शाम जब भी सुविधाजनक हो इन्हें खाएं। जामुन स्वयं कई बीमरियों से बचाता है। इसमें लहसून डालने पर स्वाद अच्छा हो जाएगा

-लहसुन भूख नहीं मरने देता। भूख बरकरार रहेगी तो शरीर कमजोर नहीं होगा और ऑक्सीजन लेवल मेंटेन रहेगा

-सुबह-शाम कोशिश करें, अकेले छत पर या खुले में टहलें

-आप जब भी बिस्तर पर जाएं पीठ के बल लेटकर हाथ-पैर बिल्कुल ढीले कर लंबी-लंबी सांस लें। यह प्रक्रिया पांच-पांच मिनट दिन में कई बार दोहराएं। इससे ऑक्सीजन का स्तर मेंटेन रहेगा

-मन में नकारात्मक विचार बिल्कुल न आने दें

-संभव हो तो नारियल पानी पीएं। अगर खांसी न हो तो मुसम्मी, संतरे या विटामिन सी वाले फलों का भी जूस पीएं

-रोजाना तीन से चार लीटर गुनगुना पानी पीएं

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