शराब के धंधेबाज

यह कहानी एक सत्य घटना पर आधारित है, इसका दूसरा अंक शीघ्र ही आएगा

@ शैलेश त्रिपाठी ‘शैल’

शैलेश त्रिपाठी ‘शैल’

उजियारी रात थी। दद्दा साइकिल का हैंडल पकड़े हाथ में टॉर्च लिए लपके चले जा रहे थे। इस समय आवारा जानवरों का झुंड आम के गुच्छे की तरह संगठित होकर खेत पर धावा बोलता था।

अगहन-पौष का समय था । काकी झोले में कुछ रोटियां और भुनी हुई प्याज के साथ धनिया-नमक बांधकर खाना लगा देती थीं, जो प्रायः दद्दा खेत में ही खाया करता। घर में कुल चार सदस्य थे। घर में बुड्ढा, बुढ़िया के अलावा बहू और बेटा भी थे। बहू गर्भवती थी और लड़का उसी की देखभाल पर रहता था। खेती दद्दा ही देखते थे और यही इस घर की जीविका का आधार थी।

चंद्रमा दो घड़ी उतर गया था। दद्दा साइकिल नीचे खड़ी कर मचान पर बैठे थे। दूर से मंद-मंद रोशनी दिखाई दी। शायद कुछ लोग उस तरफ आ रहे थे। वो कुछ कह रहे थे और खेत की ओर लपके चले आ रहे थे। दद्दा को फौरन आभास हुआ कि ये लोग कोन हैं? कुछ दिन पहले ही गांव में आग की तरह खबर फैली थी कि कच्ची शराब बनाकर चुनकबा आस-पास के खेतों में छिपा देता था और रात को बेचना उसका अंधेरी रात के समान काला धंधा था।

प्रतीकात्मक तस्वीर

दद्दा ने पहचाना, वो चुनकबा ही था। शायद साथ में जीतुआ भी था। दो लोग दोहरान से भी थे। सारे शराबी थे। गांव के कोटवार को खबर मिल चुकी थी। रात में वो चुपके से गश्त करता रहता था। लेकिन, अभी तक ये लोग पकड़ में ना आए थे। आज दद्दा ने सभी को देख लिया था। इसलिए वृद्ध घबरा गया था कि कहीं ये उसको मार न डालें। मीलों तक कोई सुनने वाला भी ना था। बुड्ढा पुआल में रातभर दुबका रहा। लेकिन, शैतान अपने पकड़ जाने का कोई निशान नहीं छोड़ना चाहते थे। उन्होंने मचान में आग लगा दी। दद्दा ऊपर से ही कूद गया और डरकर भागा। मेड़ बारी लांघते हुए जान बचाकर वृद्ध भागा जा रहा था।

किस्मत अच्छी थी कि वो नशे में ज्यादा दूर तक दद्दा का पीछा नहीं कर पाए। प्रातः काल गांव में पंचायत जुटी थी। बाबूलाल, जगदीश सभी को बुलाया गया। इससे पहले कि चुनकबा
को सौंपने की बात आती, ले देकर मामला शांत कराया गया।

दद्दा अब और भयभीत था। एक तरफ खेती थी, दूसरी तरफ प्राणों का भय। संयोगवश दोनों ही प्यारे थे। कई दिन भयवश गुजर गए। अब गांव में शराब का जोरों पर कारोबार हो रहा था। कोतवाल भी मिला हुआ था। ये बात दद्दा को पता नहीं थी और दरखास लेकर वो थाना पहुंच गए। अर्जी दी और धंधे में शामिल लोगों के नाम बताए। कोतवाल सुबह गांव पहुंचा। पंचायत बैठी। कोतवाल पलट गया। सारा दारोमदार दद्दा के ऊपर आ गया। बेचारे पहले गरीबी से परेशान थे, अब साजिशों से परेशान हो गए।

परेशान होकर दद्दा ने जहर खा लिया। घर में हाय-तौबा मच गई। कोई कहीं गिर रहा था, कोई कहीं।

…जारी

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