कोरोना क्या चीज है, इस पेड़ के पत्तों का सात दिन काढ़ा पीजिए, पास नहीं फटकेगा कोई भी बुखार

वायरल बुखार समाप्त करने का अचूक घरेलू उपाय, जो कोरोना जैसी बीमारी में भी है लाभदायक

हरसिंगार यानी हारसिंगार के पत्ते का काढ़ा किसी भी प्रकार के कठिन से कठिन बुखार को कर देता है जड़ से समाप्त, रात की रानी भी कहते हैं इसे

जमशेदपुर में निवास कर रहे देश के प्रसिद्ध ज्योतिषी आचार्य डॉ. सुधानंद झा बता रहे हैं हरसिंगार यानी हारसिंगार के पत्तों का काढ़ा बनाने की विधि और इसके फायदे

senani.in

डिजिटल डेस्क

देश के प्रसिद्ध ज्योतिषी आचार्य डॉ. सुधानंद झा

बिहार का चमकी बुखार हो या डेंगू या जापानी बुखार, टायफाइड हो या निमोनिया, चिकनगुनिया हो या कोई भी वायरल बुखार, हारसिंगार (हरसिंगार) के पेड़ के पत्ते घर ले आइए और काढ़ा बनाइए। इसे प्राजक्ता, शेफाली, शिउली आदि नामों से भी जाना जाता है। इसका वृक्ष 10 से 15 फीट ऊंचा होता है।

हां, तो इसके सात या ग्यारह पत्तों को शुद्ध पानी में उबालिए। जब पानी थोड़ा बच जाए, उसमें काला नमक, काली मिर्च और अदरक डालकर उबालें और उस पानी को छानकर बुखार से पीड़ित व्यक्ति को पिला दीजिए। ऐसा आपको सात दिनों तक करना है।

कोरोना में भी लाभदायक

यह काढ़ा कोरोना संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने पर या कोरोना होने पर पीने से बहुत लाभ होता है।

मां दुर्गा को प्रिय हैं इसके फूल

सात दिनों के अंदर चाहे कैसा भी बुखार हो, जड़ से समाप्त हो जाता है। हारसिंगार के फूल भोर में अपने आप पेड़ से गिरते हैं। इसलिए इसे रात की रानी भी कहा जाता है। लोग इस फूल को चुनकर नवरात्रि में श्री दुर्गा महारानी जी को बड़ी श्रद्धा से चढ़ाते हैं।

हर प्रान्त में अलग नाम

सितंबर-अक्टूबर में यह फूल अधिक होता है, किन्तु पत्ते तो पूरे साल मिलते हैं। हारसिंगार के पेड़ का नाम अलग-अलग हो सकता है। लेकिन, यह पेड़ पूरे भारत और उसके आसपास के देशों में आसानी से मिल जाता है।

सूजन और जोड़ों के दर्द में भी लाभदायक

हारसिंगार के पत्तों का काढ़ा शरीर के सूजन, जांघ, घुटने कमर आदि के दर्द को भी समाप्त कर देता है। हल्दी, अदरक आदि नहीं भी तो केवल हारसिंगार के पत्तों को ही अच्छी तरह उबालकर काढ़ा पीजिए। यह पेट संबंधी बीमारियों में विशेषकर खाली पेट लाभकारी होता है।

पश्चिम बंगाल का राजकीय पुष्प

इसका वानस्पतिक नाम ‘निक्टेन्थिस आर्बोर्ट्रिस्टिस’ है। यह पश्चिम बंगाल का राजकीय पुष्प है। यह हलका, रूखा, तिक्त, कटु, गर्म, वात-कफनाशक, ज्वार नाशक, मृदु विरेचक, शामक, उष्णीय और रक्तशोधक होता है। सायटिका रोग को दूर करने का इसमें विशेष गुण है।

रासायनिक संघटन

इसके फूलों में सुगंधित तेल होता है। रंगीन पुष्प नलिका में निक्टैन्थीन नामक रंग द्रव्य ग्लूकोसाइड के रूप में 0.1% होता है, जो केसर में स्थित ए-क्रोसेटिन के सदृश्य होता है। बीज मज्जा से 12-16% पीले भूरे रंग का स्थिर तेल निकलता है। पत्तों में टैनिक एसिड, मेथिलसेलिसिलेट, एक ग्लाइकोसाइड (1%), मैनिटाल (1.3%), एक राल (1.2%), कुछ उड़नशील तेल, विटामिन सी और ए पाया जाता है। छाल में एक ग्लाइकोसाइड और दो क्षाराभ होते हैं।


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