2020 : जानिए! अगस्त से अक्टूबर के बीच आ रहे हैं कौन-कौन से प्रमुख पर्व-त्योहार

हरितालिका तीज व्रत 21 और गणेश चतुर्थी व्रत 22 अगस्त को, शारदीय नवरात्र 17 अक्टूबर से

senani.in

डिजिटल डेस्क

रक्षाबंधन और स्वतंत्रता संग्राम हमने कोरोना के बावजूद उत्साह के साथ मना लिया है।

अब आचार्य डॉ. सुधानंद झा बता रहे हैं अगले दो महीनों में कौन-कौन से प्रमुख व्रत-त्योहार पड़ेंगे, ताकि कोरोना में भाग-दौड़ के बगैर धीरे-धीरे तैयारी की जा सके।

भादव मास कृष्ण पक्ष

प्रदोष चतुर्दशी व्रत एवं संक्रांति : 17 अगस्त

प्रदोष त्रयोदशी व्रत : सोमवार, 16 अगस्त

कुशोत्पाटिनी अमावस्या

कुशी अमावस्या काशी पंचांग के अनुसार 18 अगस्त को सुबह साढ़े नौ बजे के बाद। किंतु, मिथिला, बांग्ला आदि पंचांग के अनुसार 19 अगस्त को सुबह सवा आठ बजे तक। चूंकि, कुश सूर्योदय से पहले ही उखाड़ लेना चाहिए, इसलिए 19 अगस्त को ही अधिक उचित। वैसे जो जिस पंचांग को मानते हैं, उसी के अनुसार कुश उखाड़िये।

भादव मास शुक्ल पक्ष

सुहागन स्त्रियों का हरितालिका तीज व्रत : 21 अगस्त

मिथिला, नेपा, बंगाल, आसाम, उड़ीसा आदि क्षेत्रों में प्रसिद्ध चतुर्थी चंद्र चौरचन पूजा और महाराष्ट्र आदि संपूर्ण देश में प्रसिद्ध श्री गणेश चतुर्थी पूजा 22 अगस्त, शनिवार को

ऋषि पंचमी व्रत : 23 अगस्त को, दक्षिण और पश्चिम भारत में प्रसिद्ध लोलार्क षष्ठी व्रत चौबीस अगस्त को

संतान सप्तमी व्रत एवं एक महीने तक चलने वाला महालक्ष्मी व्रत आरंभ, 25 अगस्त को

श्री राधाष्टमी व्रत : 26 अगस्त को

महानन्दा नवमी : 27 अगस्त को

कर्मा-धर्मा एकादशी (श्री विष्णु भगवान के पार्श्व परिवर्तिनी एकादशी) 29 अगस्त को और एकादशी व्रत का पारण 30 अगस्त को सुबह साढ़े आठ बजे तक

इन्द्र पूजा आरंभ, वामनावतार द्वादशी, तीस अगस्त को

श्री अनन्त पूजा

अनंत पूजा काशी पंचांग के अनुसार 31 अगस्त को सुबह साढ़े आठ बजे के बाद, किंतु मिथिला, बांग्ला, आसाम, उड़ीसा, आदि पंचांग के अनुसार अनन्त पूजा एक सितंबर को उदयातिथि को मानकर दिनभर।

व्रत की पूर्णिमा एक सितंबर को और स्नान दान की दो सितंबर को

पितृपक्ष तर्पण से पूर्व ऋषि अगस्त्य मुनि का तर्पण

दो सितंबर को साथ ही साथ पितृपक्ष की प्रतिपदा तिथि का पार्वण श्राद्ध दो सितंबर को

आश्विन मास पितृपक्ष आरंभ तीन सितंबर से 17 सितंबर तक। इसके बाद अठारह सितंबर से सोलह अक्टूबर तक आश्विन मास का मलमास और राजगीर मेला।

जीमूतवाहन/जीउतिया/जितिया व्रत

काशी, मिथिला एवं सभी पंचांग के अनुसार 10 सितंबर को

मातृनवमी 11 सितंबर को

17 अक्टूबर से 26 अक्टूबर तक आश्विन मास शारदीय नवरात्र व्रत

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