जन्माष्टमी 2020 : कान्हा संग उनकी बहन विंध्याचल देवी का भी जन्मोत्सव मनाएं आज, मिलेगा अभयदान

भगवान श्रीकृष्ण की बहन विंध्याचल भगवती का जन्म भी हुआ था आज ही के दिन

senani.in

डिजिटल डेस्क

आज ही विंध्यवासिनी मैया का भी जन्मदिन है। श्री दुर्गा सप्तशती में माता विंध्यवासिनी जगदंबा ने स्वयं कहा था-

नन्द गोप गृहे जाता यशोदा गर्भ सम्भवा।
ततस्तौ नाशयिष्यामि विंध्याचल निवासिनी।।

अर्थात श्रीकृष्ण के साथ-साथ मैं भी राक्षसों का संहार करने के लिए यशोदा के गर्भ से जन्म लूंगी और कंस के हाथों से छूटकर विंध्याचल पर्वत पर निवास करूंगी। साथ ही अपने भक्तों को अभयदान दिया करूंगी। इसलिए मेरा नाम विंध्यवासिनी भी होगा।

श्रीकृष्ण को बचाने के लिए लिया था जन्म

आचार्य डॉ सुधानंद झा के अनुसार अपने भाई श्रीकृष्ण भगवान को कंस के अत्याचार से बचाने के लिए स्वयं को कंस के हाथों में समर्पित होने वाली यशोदा मैया की पुत्री योगमाया विंध्याचल भगवती का जन्म आज भाद्रमास कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मध्यरात्रि में हुआ था।

यशोदा मैया के गर्भ से ग्रहण किया था जन्म

इधर, कंस के कारागार में देवकी के गर्भ से श्रीकृष्ण भगवान ने जन्म ग्रहण किया और उधर श्रीकृष्ण भगवान को बचाने के लिए योगमाया विंध्यवासिनी भगवती ने यशोदा मैया के गर्भ से जन्म ग्रहण किया।

नन्द बाबा ने वासुदेव को सौंपा था कलेजे का टुकड़ा

श्रीकृष्ण भगवान के परामर्श पर वसुदेव जी ने कान्हा को नन्द बाबा को सौंप दिया और नन्द बाबा एवं यशोदा मैया की बेटी योगमाया विंध्याचल देवी को बदले में जेल में ले आए। कंस ने जैसे ही इस दिव्य कन्या को पटककर मारना चाहा, वो दिव्य कन्या कंस के हाथों से छुटकर आकाश में दिव्य ज्योति के रूप में प्रकट हुई और कंस को बताया कि तुम्हारा संहार करने वाले ने भी आज ही जन्म लिया है। इतना कहने के बाद वो दिव्य कन्या योगमाया भगवती विंध्याचल पर्वत पर निवास करने चली गईं।

भाई श्रीकृष्ण को देती थीं योग शक्ति

यही हैं विंध्यवासिनी योगमाया भगवती, जो राक्षसों का संहार करने के समय अपने भाई श्रीकृष्ण को योगशक्ति प्रदान करती थीं और अपनी बहन योगमाया विंध्याचल भगवती की दिव्य शक्ति से श्रीकृष्ण भगवान राक्षसों का संहार बड़ी आसानी से कर दिया करते थे।

भूल जाते हैं विंध्यवासिनी भगवती का जन्मोत्सव

आचार्य डॉ सुधानंद झा कहते हैं कि आज श्रीकृष्ण भगवान के जन्मोत्सव के साथ ही योगमाया श्री विंध्याचल भगवती का जन्मोत्सव भी मनाना चाहिए। हम श्रीकृष्ण जन्मोत्सव तो मनाते हैं, किन्तु अपने भाई के लिए जीवन दांव पर लगाकर श्रीकृष्ण को बचाने वाली उनकी बहन योगमाया विंध्यवासिनी भगवती का जन्मोत्सव भूल जाते हैं।

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