Janmashtami Vrat 2020 Date and Time : जन्माष्टमी का व्रत 11 को रखें या 12 अगस्त को, बराबर मिलेगा पुण्य

ज्योतिषाचार्य डॉ सुधानंद झा ने व्रत रखने की तिथि का भ्रम किया दूर, कहा-दो में से किसी भी दिन रख सकते हैं व्रत

पूजा का शुभ समय रात 12 बजकर 5 मिनट से 12 बजकर 47 मिनट तक

senani.in

डिजिटल डेस्क

पिछले साल की तरह इस बार भी श्रद्धालुओं में जन्माष्टमी का व्रत रखने की तिथि को लेकर भ्रम है। सबके मन में यही सवाल है कि जन्माष्टमी का व्रत कब रखना है? कुछ विद्वान 11 अगस्त तो कुछ 12 अगस्त को व्रत रखने की सलाह दे रहे हैं।

प्रसिद्ध ज्योतिषी आचार्य डॉ सुधानंद झा इस भ्रम को दूर कर रहे हैं। उनका कहना है कि इस बार 11 अगस्त मंगलवार को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव व्रत है, जबकि 12 अगस्त बुधवार को श्री कृष्णाष्टमी व्रत संपन्न होगा। इसलिए आप अपनी श्रद्धा से या पारिवारिक परम्परा के अनुसार दोनों में से किसी भी दिन व्रत कर सकते हैं। फल समान ही मिलेगा।

आचार्य कहते हैं कि भाद्रपद मास कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मध्य रात्रि में श्रीकृष्ण भगवान का जन्म हुआ था। इसलिए इस दिन को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के नाम से जाना जाता है। इस बार श्रीकृष्ण जन्माष्टमी 11 अगस्त दिन मंगलवार को है।

11 अगस्त की रात मानेगा जन्मोत्सव

11 अगस्त को प्रातः काल सवा छह बजे तक सप्तमी तिथि है। उसके बाद दूसरे दिन 12 अगस्त बुधवार को प्रातः काल आठ बजकर एक मिनट तक अष्टमी है। चूंकि, अष्टमी तिथि मध्य रात्रि में 11 अगस्त मंगलवार को है। इसलिए मंगलवार को ही श्रीकृष्ण जन्मोत्सव मनाया जाएगा।

इस बार रोहिणी का संयोग नहीं

भगवान कृष्ण का जन्म अष्टमी तिथि को रोहिणी नक्षत्र में हुआ था। कई बार ऐसा होता है कि ये दोनों संयोग एक साथ नहीं बन पाते। इस बार भी कृष्ण जन्म की तिथि और नक्षत्र एक साथ नहीं मिल रहे हैं। इसलिए इस बार नक्षत्र की अपेक्षा तिथि का ही अधिक महत्व है।

ये है महात्म्य

जिस दिन भगवान का जन्म होता है, उस दिन के व्रत को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी (या श्री कृष्ण जयंती जन्मोत्सव) व्रत कहा जाता है। रात्रि में भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के बाद दूसरे दिन जो व्रत किया जाता है, उसे श्री कृष्णाष्टमी व्रत कहा जाता है।

भगवान विष्णु के आठवें अवतार थे कृष्ण

माना जाता है कि सृष्टि के पालनहार श्रीहरि विष्णु ने अष्टमी तिथि को श्रीकृष्ण के रूप में आठवां अवतार लिया था। इसलिए देश के सभी राज्यों में अलग-अलग तरीके से इस त्योहार को जन्माष्टमी के रूप में मनाया जाता है। हिंदुओं का यह सबसे कलरफुल त्योहार है।

जन्माष्टमी पर भी कोरोना का साया

कोरोना संक्रमण का असर अब जन्माष्टमी पर भी दिखाई देगा। मथुरा में इस दिन जन्मभूमि समेत वहां के तमाम बड़े मंदिरों में श्रद्धालुओं को प्रवेश नहीं मिलेगा। हां, आप ऑनलाइन या टेलीविजन पर घर बैठे देश-दुनिया के मंदिरों से कृष्ण जन्मोत्सव का सीधा प्रसारण देख सकते हैं। विभिन्न समाचार चैनलों और मंदिरों की आईटी टीम ने इसके लिए तैयारी कर ली है। पिछले पांच हजार साल में ऐसा पहली बार हो रहा है, जब कृष्ण जन्माष्टमी पर मथुरा में श्रद्धालुओं के प्रवेश पर पाबंदी लगी है। मथुरा के श्रीकृष्ण मंदिर में 12 अगस्त की अर्धरात्रि कान्हा का जन्मोत्सव मनाया जाएगा। इस अवसर पर मंदिर प्रबंधन से जुड़े मात्र सौ लोग ही मौजूद रहेंगे। इसी के साथ, वृंदावन में साल में एक बार होने वाली ठाकुर बांके बिहारी की मंगला आरती में भी श्रद्धालु नहीं पहुंच सकेंगे।

पूजन की विधि

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के दिन प्रात: काल स्नानादि के बाद पूजन-अर्चन कर व्रत का संकल्प लें। भगवान श्रीकृष्ण की मूर्ति या चित्र रखकर झांकी सजाएं। इसके बाद विधि-विधान से पूजा करें। मध्य रात्रि 12 बजे जन्मोत्सव मनाएं। अंत में प्रसाद वितरण कर भजन-कीर्तन करते हुए रात्रि जागरण करना चाहिए।

भगवान कृष्ण के विभिन्न रूपों का करें दर्शन

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