चीन का घमंड होगा चकनाचूर

हमारे पड़ोसी मुल्क को एलएसी पर हमसे टकराना इस बार पड़ा है महंगा, उसको न सिर्फ सैकड़ों करोड़ का कारोबारी नुकसान हुआ है, बल्कि विश्व समुदाय में भी पड़ गया अलग-थलग

senani.in

भारत से एलएसी (लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल) पर टकराव के बाद वार्ता के कई दौर बीत चुके हैं, लेकिन चीन गलवान त्सो के फिंगरों से हटने का नाम नहीं ले रहा है।

वह कई ठिकानों से पीछे हटकर टकराव को युद्ध की हद तक नहीं ले जाना चाहता लेकिन रणनीतिक महत्व के ठिकानों से पीछे भी नहीं हटना चाहता।

मुगालते में है हमारा पड़ोसी

चीन का मकसद सीमा पर उलझाकर भारत को परेशान करना है। वह देख रहा है कि सर्दियां लद्दाख में दस्तक दे रही हैं। ऐसे में उसे लग रहा है कि मनमानी सौदेबाजी के लिए उपयुक्त समय है। लेकिन, वह भूल रहा है कि सर्दियों में सैन्य जमावड़ा कायम रखना उसके लिए भी उतना ही दुरूह है, जितना भारत के लिए। भारत के सैनिक तो वर्षों से सीमा पर मुस्तैद हैं, चाहे वह लद्दाख का माइनस 40 डिग्री तापमान हो या राजस्थान सीमा का 45 डिग्री से ज्यादा का पारा। उलटे चीनी सैनिक इतनी सर्दी में ड्यूटी करने के अभ्यस्त नहीं हैं।

मजबूत किलेबंदी

जहां तक रणनीतिक बढ़त हासिल करने की उसकी कोशिश की बात है तो भारत ने भी किलेबंदी मजबूत कर ली है। जरूरत पड़ने पर युद्ध में मुंहतोड़ जवाब देने की तैयारी भी भारत ने है। ड्रैगन को जल-थल-नभ सबमें करारा जवाब मिलेगा।

चीन को बड़े बाजारों से भी धोना होगा हाथ

चीन को समझ लेना चाहिए कि अब वह दिन दूर नहीं, जब उसके गले से प्रोडक्शन हब का तमगा उतर जाएगा, जिसके सहारे वह महाशक्ति बनने के अरमान पाल रहा है। एसलिए क्योंकि वह विश्व परिदृश्य में अलग-थलग पड़ गया है। यह स्थिति अब समय के साथ उसे आर्थिक चोट के रूप में महसूस होगी। उसे अपना सस्ता घटिया माल अपने यहां कबाड़ करना होगा। उसकी फैक्ट्रियों के पहिए थम जाएंगे और बेरोजगारी की मार पड़ेगी सो अलग।

नहीं झुकेगा भारत

इस मामले में जहां तक भारत के प्रयासों का सवाल है तो सौ से ज्यादा मोबाइल ऐप पर रोक और पौने चार सौ आइटम के आयात पर प्रतिबंध लगाकर हमने ड्रैगन को बता दिया है कि भारत से टकराना उसके लिए आर्थिक तौर पर भी नुकसानदेह होगा।

आयात पर और सख्ती की जरूरत

हालांकि, यह प्रयास काफी नहीं हैं। उसके जबड़े पर चोट करने के लिए भारत को उसके यहां से आयात पर यथासंभव अधिक से अधिक रोक लगाने की जरूरत है। साथ ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इसके लिए माहौल बनाने की जरूरत है क्योंकि ड्रैगन को इसी से ताकत मिलती है।

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