सावन की अंतिम सोमवारी पर इस बार अलौकिक संयोग

उत्तराषाढ़ और श्रवण नक्षत्र के महान संयोग में संपन्न होगी श्रावण मास की अंतिम एवं पांचवीं सोमवारी पूजा तथा रक्षाबंधन

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डिजिटल डेस्क

जब भी श्रावण मास में पांच सोमवार पड़े हैं और भक्तों ने श्रद्धा से भगवान भोलेनाथ की आराधना की है, उस वर्ष संसार की बड़ी से बड़ी समस्याओं का अंत हुआ है। साथ ही संसार में समरसता का संदेश भी गया है।

महान ज्योतिषी आचार्य डॉ सुधानंद झा कहते हैं कि इस साल भी सावन में पांच सोमवार पड़ रहे हैं। सावन का अंतिम सोमवार तीन अगस्त को पड़ रहा है। इसी दिन रक्षाबंधन का त्योहार भी है। ऐसे में हम उम्मीद कर सकते हैं कि कोरोना से परेशान लोगों को रक्षाबंधन के दिन से राहत मिलने लगेगी।

भाई-बहनों का जीवन होगा सुखमय

आचार्य के अनुसार रक्षाबंधन एवं सावन के अंतिम सोमवार यानी तीन अगस्त को गुरु बृहस्पति और शनि देव अपनी-अपनी राशियों में रहेंगे तो शुक्र व शनि अपनी नवमांशा में रहेंगे। इस संयोग में रक्षाबंधन मनाने वाले भाई-बहनों और शिव भक्तों को भगवान सुखद जीवन प्रदान करेंगे।

एक साथ इतने सारे संयोग

उत्तराषाढ़ और श्रवण नक्षत्र के महान संयोग के साथ ही इस दिन बुधादित्य योग, हर्ष योग, अष्टलक्ष्मी योग और बंधुपूज्य योग भी बन रहे हैं। इतने सारे संयोगों मे पांचवीं सोमवारी व्रत पूजा और रक्षाबंधन के शुभ प्रभाव से भक्तों एवं भाई-बहनों को विपरीत परिस्थितियों में भी सफलता मिलती रहेगी।

मुहूर्त की जरूरत नहीं, भाई को दिन-रात कभी भी राखी बांध सकती हैं बहनें

हम अपने लेख में पहले भी आचार्य सुधानंद जी के हवाले से बता चुके हैं कि भाई-बहन के रक्षाबंधन पर्व पर भद्रा नहीं लगता है। ब्राह्मण लोग यजमानों को जो राखी बांधते हैं उस पर भद्रा अवश्य लगेगा।

इसलिए दिन-रात जब भी सुविधा हो, मन प्रसन्न हो या विशेष परिस्थिति हो, दिनभर और रातभर भाइयों की कलाई पर राखी बांधी जाएगी।

सोशल मीडिया पर फैलाई जा रही झूठी कहानी

आजकल सोशल मीडिया पर राखी बांधने के तमाम मुहूर्त बताए जा रहे हैं। साथ ही यह भी कहा जा रहा है कि रावण को शूर्पणखा ने भद्रा में राखी बांधी थी, इसीलिए रावण मारा गया। आचार्य सुधानंद जी कहते हैं कि ये सब मनगढ़ंत कहानियां हैं। इस विषय में विस्तृत खबर के लिए आप senani.in में हमारा पूर्व का लेख पढ़ सकते हैं।

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