रक्षाबंधन पर 29 साल बाद आया है ऐसा संयोग

सर्वार्थ सिद्धि और दीर्घायु आयुष्मान का शुभ संयोग बन रहा इस बार रक्षाबंधन पर, 1991 में भी आई थी ऐसी ही शुभ घड़ी

आचार्य सुधानंद झा के अनुसार भद्रा का कोई विचार नहीं होगा इस दिन, बहनें दिनभर और विशेष परिस्थिति में रात में भी भाइयों को बांध सकेंगी रखी

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तीन अगस्त को आ रहा रक्षाबंधन का त्योहार इस बार बेहद खास है। ऐसा इसलिए क्योंकि इस अवसर पर सर्वार्थ सिद्धि और दीर्घायु आयुष्मान योग का शुभ संयोग बन रहा है।

रक्षाबंधन पर ऐसा संयोग 29 साल बाद आया है। साथ ही इस साल भद्रा और ग्रहण का साया भी रक्षाबंधन पर नहीं पड़ रहा है। इससे पहले यह संयोग वर्ष 1991 में बना था। इस संयोग को कृषि क्षेत्र के लिए विशेष फलदायी माना जा रहा है। चूंकि, भारत कृषि प्रधान देश है। इसलिए यह संयोग बेहद खास माना जा रहा है। ऐसे समय में और भी जब लॉकडाउन के कारण उद्योगों की हालत खस्ता है और अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए पूरा देश एक बार फिर कृषि की ओर आशा भारी नजरों से देख रहा है।

सावन का अंतिम सोमवार भी इसी दिन

महान ज्योतिषी आचार्य डॉ सुधानंद झा कहते हैं कि सावन मास की पूर्णिमा के दिन रक्षाबंधन का त्योहार मनाया जाता है। इस साल रक्षाबंधन का पर्व तीन अगस्त यानी सोमवार को मनाया जाएगा। इसी दिन सावन का अंतिम सोमवार भी पड़ रहा है। सोमवार पड़ने के कारण यह दिन और भी शुभ हो गया है।

ये है महात्म्य

रक्षाबंधन भाई-बहन का पवित्र त्योहार है। इस दिन बहन भाई की कलाई में राखी बांधती है और भाई बहन की रक्षा करने का वचन देता है।

राखी बांधने की विधि

रक्षाबंधन के दिन बहनें राखी की थाली सजाएं। इस थाली में रोली, कुमकुम, अक्षत, पीले सरसों, दीपक और राखी रखें। इसके बाद भाई को तिलक लगाकर उसके दाहिने हाथ में राखी बांधें। राखी बांधने के बाद भाई की आरती उतारें। इसके बाद भाई को मिठाई खिलाएं। अगर भाई आपसे बड़ा है तो चरण स्‍पर्श कर उसका आशीर्वाद लें। अगर बहन बड़ी हो तो भाई को चरण स्‍पर्श करना चाहिए। राखी बांधने के बाद भाइयों को इच्‍छा और सामर्थ्‍य के अनुसार बहनों को भेंट देनी चाहिए। इस अवसर पर ब्राह्मण भी अपने यजमान की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधते हैं। राखी बांधते समय बहनें अगर मंत्र का उच्चारण करती हैं तो परिणाम और भी शुभ होते हैं। मंत्र निम्न है-

“येन बद्धो बली राजा दानवेन्द्रो महाबल तेन त्वां प्रतिबध्नामि रक्षे मा चल मा चल!!

राखी बांधने के लिए पूरा दिन शुभ, मुहूर्त के चक्कर में न पड़ें

आचार्य सुधानंद झा के अनुसार भाई-बहन का रक्षाबंधन पर्व दिन-रात मनाया जाएगा। उस पर भद्रा का कोई विचार नहीं होगा। अर्थात रक्षाबंधन पर दिन और रात किसी भी समय बहनें अपने भाइयों को सुविधा के अनुसार राखी बांध सकती हैं। आचार्य कहते हैं कि बहनें राखी बांधने के लिए किसी मुहूर्त के बारे में न सोचें। पूरा दिन शुभ होता है। विशेष परिस्थिति में बहनें रात में भी भाइयों को राखी बांध सकती हैं।

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