मानस सपूत

गोस्वामी तुलसीदास

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अस्तित्व ऐसा पावन, पवित्र
मोह लोभ अहंकार क्रोध
मलग्रसित हृदय ना, समावेश हुआ
हुलसी माता के गर्भ से यह
विद्वान मानस सपूत तुलसीदास हुआ

पिता आत्माराम दुबे जग में खुशहाल हुए
उनके पुत्र का नाम महान हुआ
सरयूपारीण ब्राह्मण
ऐसा न कोई दूजा हुआ
हुलसी माता के गर्भ से यह
विद्वान मानस तुलसीदास सपूत हुआ

उनके चरित्र मर्यादा पुरुषोत्तम
रामचरित्र समान हुआ
ग्रंथ रामचरितमानस हृदय विख्यात हुआ
इनके गुरु धन्यवान हुए
गुरुदेव हरिदास जी का सम्मान हुआ

महान हिंदी साहित्य के कवि
जग रोशन नाम तुलसीदास हुआ
हुलसी माता के गर्भ से विद्वान
सपूत तुलसीदास हुआ

रचयिता प्रेमी, पत्नी रत्नावली प्रेम
उजागर जगसार हुआ
जुदाई में आधी आधी रात
जन्मो जन्मो का बिरह वेदन हुआ।

सर्प का रूप रस्सी लगे
उनका जीना मुहाल हुआ
रामभक्ति प्रेम भाव मोक्ष प्राप्ति का साधन

मार्गदर्शन रत्नावली का पावन प्रेम हुआ
हुलसी माता के गर्भ से तुलसीदास सपूत हुआ।

@ अंकिता सिन्हा, युवा कवयित्री,
जमेशदपुर, झारखंड

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