राफेल ने फ्रांस से भारत के लिए भारी उड़ान, कल अंबाला एयर फोर्स स्टेशन पर करेंगे लैंड

फ्रांस से खरीदे गए 36 विमानों में से पांच की पहली खेप आ रही भारत, चीन सीमा पर होगी तैनाती

senani.in

डिजिटल डेस्क

भारतीय वायु सेना के लिए फ्रांस से खरीदे गए छत्तीस राफेल लड़ाकू विमानों में से पांच ने सोमवार सुबह फ्रांस के मेरिग्नैक स्थित निर्माता कंपनी दसॉल्ट एविएशन फैसिलिटी से भारत के लिए उड़ान भर दी है।

इन पांच विमानों में तीन सिंगल सीटर विमान और दो ट्विन सीटर विमान शामिल हैं।

हवा में ही भरा जाएगा ईंधन

इन विमानों का आगमन दो चरणों में करने की योजना बनाई गई है। इन विमानों को फ्रांस से लाने की जिम्‍मेदारी भारतीय वायुसेना के पायलटों को दी गई है, जिन्होंने इन विमानों को उड़ाने का व्यापक प्रशिक्षण लिया है। वहां से आगमन के पहले चरण के दौरान हवा से हवा में ईंधन भरने का काम भी यही पायलट करेंगे। फ्रांसीसी वायु सेना द्वारा उपलब्‍ध कराए गए विशेष टैंकर की सहायता से यह काम सफलतापूर्वक किया जाएगा।

गोल्डन एरोज को मिली जिम्मेदारी

इन विमानों के 29 जुलाई 2020 को अंबाला स्थित एयर फोर्स स्टेशन पर पहुंचने की संभावना है। हालांकि, इन विमानों के आगमन के दौरान मौसम को भी ध्‍यान में रखना होगा। नंबर 17 स्क्वाड्रन ‘गोल्डन एरोज’ को राफेल विमानों से लैस इस सैन्‍य बेस पर तैयार किया जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक एक हफ्ते के अंदर ही इन विमानों को किसी भी मिशन के लिए तैयार कर लिया जाएगा।

आधुनिक हथियारों से हैं लेस

राफेल विमान दुनिया की सबसे घातक मिसाइलों और सेमी स्‍टील्‍थ तकनीक से लैस हैं। इन विमानों के भारतीय वायुसेना में शामिल होने से देश की सामरिक शक्ति में जबरदस्त इजाफा होगा।

सात हजार किलोमीटर की दूरी करेंगे तय

भारतीय वायुसेना के फाइटर पायलट 7000 किलोमीटर की हवाई दूरी तय करके बुधवार को अंबाला एयरबेस पहुंचेंगे। राफेल से भारतीय वायुसेना की मौजूदा ताकत में जबर्दस्त इजाफा होगा क्योंकि पांचवीं जनरेशन के इस लड़ाकू जेट की मारक क्षमता जैसा लड़ाकू विमान चीन और पाकिस्तान के पास नहीं हैं। इन विमानों के लिए भारत के 12 पायलटों की ट्रेनिंग पूरी हो चुकी है।

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