पाकिस्तान की मुश्किलें बढ़ीं, सिंधियों और बलूचियों ने की आजादी की मांग

पाक के खिलाफ संघर्ष के लिए आजादी समर्थक बलूच और सिंधी संगठन बनाएंगे संयुक्त मोर्चा

senani.in

डिजिटल डेस्क, इस्लामाबाद

पाकिस्तान में तेज हुआ बलूचियों का आंदोलन फोटो क्रेडिट : सोशल मीडिया

सिंध और बलूचिस्तान को पाकिस्तान से अलग कर नया राष्ट्र बनाने की मांग जोर पकड़ने लगी है।

इस मकसद से पाकिस्तान के खिलाफ लड़ने के लिए आजादी समर्थक बलूच और सिंधी संगठनों ने संयुक्त मोर्चा बनाने का फैसला किया है।

संगठनों की गुप्त वार्ता

बलूच राज अजोई संगर (ब्रास) के प्रवक्ता बलूच खान ने एक बयान में कहा कि ब्रास के सदस्य संगठनों और आजादी समर्थक सिंधी संगठन सिंधुदेश रेवोल्यूशनरी आर्मी (एसआरए) के प्रतिनिधियों की एक अज्ञात स्थान पर बैठक हुई।

इसमें क्षेत्र के मौजूदा हालात पर चर्चा हुई और बलूचिस्तान तथा सिंध को पाकिस्तान के कब्जे से मुक्त कराने के लिए संयुक्त मोर्चा बनाने की घोषणा की गई।

ब्रास में शामिल हैं ये संगठन

ब्रास में बलूच लिबरेशन आर्मी (बीएलए), बलूचिस्तान लिबरेशन फ्रंट (बीएलएफ), बलूच रिपब्लिकन आर्मी (बीआरए) और बलूच रिपब्लिकन गार्ड (बीआरजी) संगठन शामिल हैं।

दोनों राष्ट्रों में हजारों साल से संबंध

बैठक में शामिल होने वालों ने सर्वसम्मति से सहमति व्यक्ति की कि सिंधी और बलूच राष्ट्र के बीच हजारों साल से राजनीतिक, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंध रहे हैं। वर्तमान में दोनों राष्ट्रों का उद्देश्य पाकिस्तान से आजादी पाना है और दोनों पाकिस्तानी राज्य पंजाब को अपना कट्टर दुश्मन मानते हैं।

चीन की विस्तारवादी नीतियों का विरोध

पाकिस्तान के कराची में प्रदर्शन करतीं बलूच महिलाएं। फोटो क्रेडिट, सोशल मीडिया

बैठक में कहा गया कि यह समय की मांग है कि दोनों पड़ोसी राष्ट्र संयुक्त प्रतिरोध मोर्चा गठित करें। प्रतिनिधियों ने यह भी कहा कि सिंध और बलूचिस्तान दोनों ही चीन की विस्तारवादी और दमनकारी नीतियों के समान रूप से शिकार हुए हैं।

वक्ताओं ने कहा कि चीन पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (सीपीईसी) के जरिए पाकिस्तान और चीन का मकसद बलूचिस्तान और सिंध को उनके वैध राजनीतिक, आर्थिक और सैन्य हितों को अपने अधीन करना और बादिन से लेकर ग्वादर तक तटों और संसाधनों पर कब्जा जमाना है।

भारत और अन्य राष्ट्रों से मांगा समर्थन

सिंध और बलूचिस्तान का तट न सिर्फ हिंद महासागर से जुड़ा है, बल्कि यह वैश्विक व्यापार के लिए अहम जल मार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य के नजदीक भी है। बलूच खान ने कहा कि चीन और पाकिस्तान की विस्तारवादी नीति के खिलाफ भारत समेत अन्य क्षेत्रीय ताकतों को सिंधी और बलूच राष्ट्रों के साथ खड़ा होना होगा। इसी से क्षेत्र में शांति और स्थिरता की बहाली हो सकेगी।

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