… तेरा साथ गुलाब सा लगता है

अंकिता सिन्हा, कवयित्री

जिंदगी में तेरा साथ गुलाब सा लगता है
लिफाफों में खुशियों का मलाल है

उम्र का रंगीन तथाकथित पड़ाव है
मेरा होकर भी मेरा नहीं ये गुलाब है

भ्रम की मुहब्बतों का बहता सैलाब है
अपने गुम हुए अब आपस में मनमुटाव है

परछाई भी दर्द भरी दास्तां कहती है
इजहारे-वफ़ाएं कहती ये गुलाब हैं

बेरंगे सपनों की बांहों में उलझे बहाव हैं
नयनों की पुतलियों में आंसू नहीं शराब हैं

जहर, खंजर, तलवार बेअसर हथियार हैं
दगाबाज धोखाधड़ी का ओढ़ा नकाब है

सच कहूँ फिर भी
प्यार प्रति समर्पण का छलावा भाव है
शोरोगुल गुलाबी रंगों में घुला गुलाब है।

@ अंकिता सिन्हा, जमेशदपुर, झारखंड

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