इस सूर्य मंत्र की स्तुति से नष्ट हो जाएगा दुर्भाग्य, भगवान कृष्ण के पुत्र साम्ब का भी खत्म हुआ था शाप

इस दुर्लभ सूर्य स्तुति का पाठ प्रातःकाल स्नानादि करके पूरब मुख खड़े होकर कीजिए, आपके जीवन के असाध्य रोग, भयंकर दरिद्रता दूर हो जाएगी

senani.in

डिजिटल डेस्क

भगवान कृष्ण के पुत्र साम्ब कृत सूर्य भगवान की वो स्तुति, जिसके दिव्य प्रभाव से मनुष्य के जीवन का कायाकल्प हो जाता है। चाहे उसका जन्म किसी भी राशि या लग्न में हुआ हो।

जन्मपत्री में चाहे किसी भी ग्रह के कारण समस्याएं आ रही हों। सूर्य भगवान की इस स्तुति के नित्य पाठ से दुर्भाग्य नष्ट हो जाता है और मनुष्य के जीवन में मंगल ही मंगल होने लगता है।

सबसे पहले साम्ब ने की थी इस मंत्र की स्तुति

ज्योतिषाचार्य डॉ सुधानंद झा जी के अनुसार श्री सूर्य भगवान की इस स्तुति का पाठ सबसे पहले श्रीकृष्ण के पुत्र साम्ब ने किया था। इसके बाद सूर्य भगवान की कृपा से उनके सारे रोग और शाप दूर हो गए थे।

इस प्रकार है सूर्य देव का मंत्र

ऊं नमः श्री सूर्याय। वशिष्ठ उवाच-
स्तुवंस्तत्र ततः साम्ब: कृशोधमनि संतत:!
राजन्नाम सहस्रेण,सहस्रांशुं दिवाकरम्।१।।

खिद्यमानन्तु तं दृष्ट्वा सूर्य: कृष्णात्मजं तदा।
स्वप्नेन दर्शनं दत्वा पुनर्वचन मब्रवीत्।।२।

श्री सूर्य उवाच-
साम्ब साम्ब महाबाहो श्रृणु जाम्बवती सुत।
अलन्नाम सहस्रेण पठस्वेवं स्तवं शुभम्।।३।।

यानि नामानि गुह्यानि, पवित्राणि शुभानि च।
तानि ते कीर्तयस्यामि,श्रुत्वा वत्सावधारय।।४।।

विकर्तनो विवस्वांश्च मार्त्तंडो भास्करो रवि:।।
लोक प्रकाशक: श्रीमान् लोक चक्षुर्ग्हेश्वर:।।५।।

लोक साक्षी त्रिलोकेश: कर्त्ता हर्त्ता तमिस्रहा।।
तपन: तापनश्चैव, शुचि: सप्ताश्व वाहन:।।६।।

गभस्ति हस्तो ब्रह्मा च, सर्व देव नमस्कृत:।
एक विंशति रित्येष स्तव इष्ट सदा मम।।७।।

शरीरारोग्यदश्चैव धनवृद्धि यशस्कर:।
स्तवराज इति ख्यात: त्रिषु लोकेषु विश्रुत:।।८।।
य एतेन महाबाहो, द्वे संध्ये स्तमनोदये।
स्तौति मां प्रणतो भूत्वा सर्व पापै: प्रमुच्यते।।९।।

कायिकं वाचिकं चैव मानसं यच्च दुष्कृतम्।
तत्सर्व मेक जप्येन प्रणश्यति ममाग्रत:।।१०।।
एष जप्यश्च होमश्च संध्योपासन मेव च।
बलि मंत्रोऽर्घ मन्त्रश्च धूप मंत्र: तथैव च।।११।।

अन्न दाने तथा स्नाने प्रणिपाते प्रदक्षिणे।
पूजितोऽयं महामंत्र: सर्व व्याधि हर: शुभ:।।१२।।

एवमुक्त्वा तु भगवान् भास्करो जगदीश्वर:।
आमंत्र्य कृष्ण तनयं तत्रैवान्तर धीयत।।१३।।

साम्बोऽपि स्तवराजेन स्तुत्वा सप्ताश्व वाहनम्।
पूतात्मा नीरुज: श्रीमान् तस्मात् रोगात् विमुक्तवान्।।१४।।

बोलिए श्री सूर्य भगवान की जय
ऊं आदित्याय नमो नमः
ऊं भास्कराय नमो नमः।

ये है पौराणिक कथा

Samba

कहा जाता है कि भगवान कृष्ण की कई रानियां थीं, जिनमें से एक जामवंत की पुत्री जामवंती भी थीं। कृष्ण और जामवंती के पुत्र का नाम साम्ब था।

साम्ब को इसलिए मिला शाप

कहते हैं कि साम्ब इतने सुंदर और आकर्षक थे कि कृष्ण की कई पटरानियां भी उनकी सुंदरता के प्रभाव में आ गई थीं।

साम्ब के रूप से प्रभावित होकर एक दिन श्रीकृष्ण की एक रानी ने साम्ब की पत्नी का रूप धारण कर उन्हें आलिंगन में भर लिया। ऐसा करते हुए श्रीकृष्ण ने उन दोनों को देख लिया। इससे गुस्सा होकर श्रीकृष्ण ने साम्ब को कोढ़ी हो जाने का श्राप दे दिया।

जब कृष्ण को हुआ गलती का अहसास

Lord Krishna

जब श्रीकृष्ण को अपनी गलती का अहसास हुआ तो उन्होंने साम्ब से कहा कि दिया हुआ शाप वापस नहीं लिया जा सकता लेकिन अब तुम्हें रोग से मुक्ति पाने के लिए सूर्यदेव की उपासना करनी होगी। श्रीकृष्ण बोले कि सूर्यदेव की तपस्या और पूजा के बाद ही तुम्हें इस कुष्ठ रोग से मुक्ति मिलेगी।

… तब साम्ब ने की सूर्य सेव की आराधना

चंद्रभागा नदी का किनारा, जहां सांब ने की थी सूर्यदेव की आराधना, फोटो क्रेडिट : सोशल मीडिया

इसलिए अपने पिता के कहे अनुसार साम्ब ने सूर्य भगवान की तपस्या आरंभ कर दी। कहा जाता है कि साम्ब को उपरोक्त मंत्रों की स्तुति से ही शाप से मुक्ति मिली थी।

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