नाग पंचमी : आपके जीवन में हों ये परेशानियां तो जरूर करें पूजा

राहू, केतु और चंद्रमा के कारण सफलता के मार्ग में आने वाली बाधाएं भगवान शिव तथा नाग देवता की पूजा से होंगी दूर

senani.in

डिजिटल डेस्क

श्रावण मास में एक नाग पंचमी कृष्ण पक्ष और दूसरी शुक्ल पक्ष में आती है।

ज्योतिषाचार्य डॉ सुधानंद झा के अनुसार कृष्ण पक्ष की नाग पंचमी को मौना नाग पंचमी कहा जाता है। शुक्ल पक्ष की नाग पंचमी को नाग पंचमी कहा जाता है। शुक्ल पक्ष की नाग पंचमी 25 जुलाई को आ रही है।

भगवान भोलेनाथ और नाग देवता की करें पूजा

आचार्य के अनुसार नाग पंचमी के दिन भगवान भोलेनाथ और नाग देवता की पूजा करनी चाहिए। यह पूजा हमारे सनातन शास्त्र में पारिवारिक और पारंपरिक विधि से की जाती है।

जीवन में हैं ये बाधाएं तो जरूर करें पूजा

आचार्य के अनुसार ज्योतिष के दृष्टिकोण से यह पूजा वैसे लोगों के लिए अधिक महत्वपूर्ण है, जिन्हें राहु, केतु और चंद्रमा के कारण जीवन में आर्थिक, व्यावसायिक, शारीरिक तथा मानसिक परेशानी होती है। साथ ही संतान नहीं होती। इलाज कराने के बावजूद बीमारी ठीक नहीं होती। सारे प्रयास के बाद भी व्यवसाय, कार्यालय, परिवार और जीवन में सफलता नहीं मिलती।

समस्याओं से छुटकारे के लिए करें प्रार्थना

आचार्य कहते हैं कि नाग पंचमी के दिन भगवान भोलेनाथ और नाग देवता की पूजा कीजिए। दान-दक्षिणा दीजिए तथा अपनी समस्याओं से मुक्ति के लिए प्रार्थना कीजिए।

पूजा की विधि

श्रावण मास कृष्ण पक्ष की नाग पंचमी सम्पन्न हो चुकी है। अब 25 जुलाई को श्रावण मास शुक्ल पक्ष की नाग पंचमी है। परंपरा के अनुसार नाग पंचमी के दिन घर के द्वार पर नाग देवता का चित्र बनाया जाता है और घर की दीवारों को नाग देवता से बंधा (चित्र से लपेटा) जाता है।

जिनके परिवार में कोई महिला गर्भवती है, उसमें केवल द्वार पर नाग देवता का चित्र बनाएंगे, किंतु अपने घर को नाग देवता से बांधेंगे नहीं। दही का खेल, दूध का खीर नीम का पत्ता, नींबू, तालाब के शैवाल, गाय के कच्चे दूध, धान का लावा आदि से नाग देवता की पूजा होती है।

किंतु जो लोग राहु, केतु और चंद्रमा के कारण अपनी असफलता को दूर करने के लिए नाग पंचमी के दिन श्री शंकर भगवान और नाग देवता की पूजा करेंगे, उन्हें वैसे ही पूजा करनी है जैसे अन्य दिन तथा महाशिवरात्रि में शंकर भगवान की वे पूजा करते हैं।

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